हो गया खुलासा, भारतीय मीडिया विदेशी फंड से चलती है

25 June 2018
🚩भारत में इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट मीडिया में जो भी खबरें चलती हैं उसके पीछे कोई न कोई ऐजंडा होता है ये आप सभी ने देखा होगा।
🚩आपने अधिकतर ये भी देखा होगा कि किसी हिन्दू पर अत्याचार होता है तो मीडिया मौन रहती है, जबकि ईसाई या मुस्लिम पर अत्याचार होता है तो मीडिया उनके पक्ष में दिन रात खबरें चलाती है । इससे उल्ट देखिये कि जब हिन्दू साधु-संत पर आरोप लगता है तो मीडिया दिन-रात खबरें चलाती है लेकिन ईसाई पादरी या मौलवी पर आरोप लगता तो भी कोई खबर नही आती है ।
🚩आपके सामने हाल ही में सामने आया एक ताजा मामला रखते हैं…
Explained, Indian media moves from foreign funds
🚩अभी 18-19 जून को झारखंड खूंटी में 5 लड़कियों का अपहरण हुआ और बाद में उनके साथ बलात्कार किया गया । उसमें न कोई डिबेट चली और न कोई ब्रेकिंग न्यूज बनी । 
🚩 आखिर क्यों हिन्दू संतों पर लगे आरोप को मुख्य सुर्खियों में लाने वाली मीडिया ईसाई पादरियों पर सिद्ध हुए आरोपों पर चुप्पी साधे है ??
🚩क्योंकि इस घटना को अंजाम ईसाई पादरियों ने दिया था और यहाँ तक कि उन पांच लड़कियों को ईसाई फादर ने कहा था, घटना की जानकारी किसी को मत देना, नहीं तो आपके मां-बाप का मर्डर हो जायेगा ।
🚩आपको बता दें कि झारखण्ड खूंटी के कोचांग से अपहरण के बाद पांच युवतियों से गैंग रेप को लेकर पुलिस ने जिस पीड़ित महिला और नुक्कड़ नाटक के संचालक संजय कुमार शर्मा का बयान रिकॉर्ड किया है, बयान में कई चौंकानेवाले तथ्य सामने आये हैं । पुलिस द्वारा रिकॉर्ड बयान के अनुसार पीड़ित लड़की ने अपने बयान में दावा किया है कि कि चर्च के फादर अल्फाेंस ने षड्यंत्र  के तहत स्थानीय अपराधियों से मिल कर लड़कियों का अपहरण कर गाली-गलौज और रेप की घटना को अंजाम दिलवाया है। 
🚩पीड़िता ने बताया कि ईसाई फादर ने लड़कियों को समझाते हुए कहा था कि इसकी सूचना कहीं नहीं देना, नहीं तो तुम्हारे मां- बाप का मर्डर हो जायेगा 
। तुम्हारा परिवार खतरे में पड़ जायेगा ।
🚩आप पीड़िता के बयान से समझ गये होंगे कि ईसाई पादरियो ने मिलकर षडयंत्र रचा और लड़कियों का बलात्कार हुआ, उनको पीटा गया, प्राईवेट पार्ट पर भयंकर नुकसान पहुँचाया गया और 4 पादरी और 8 अन्य को पुलिस ने गिरफ्तार भी कर लिया है फिर भी मीडिया चुप है क्योंकि मामला ईसाई पादरी का है ।
🚩षडयंत्र के तहत कोई महिला खड़ी हो जाती है और हिन्दू साधु-संत पर आरोप लगा देती है तो मीडिया दिन रात ब्रेकिंग न्यूज़ ओर डिबेट चलाती है लेकिन ईसाई धर्म का मामला आया तो मीडिया ने मौन धारण कर लिया ।
🚩इससे साफ पता चलता है कि भारत से हिन्दू धर्म को नष्ट करने के लिए हिन्दू धर्मगुरुओं बदनाम करने और धर्मान्तरण कराने वाले ईसाई पादरियों को बचाने के लिए विदेश से भारी फंडिग होती है ।
🚩ईसाई पादरियों के यह एक मामला दुष्कर्म का नही है ऐसे तो हजारों पादरियों पर मामले दर्ज हुए हैं, छोटे बच्चो और ननो के साथ भी दुष्कर्म करते पकड़े गए है और पादरियों को सजा भी हुई है लेकिन एक भी खबर मीडिया में नही आ रही है । 
🚩आपको बता दें कि सुदर्शन न्यूज चैनल के मालिक श्री सुरेश चव्हाणके ने बताया है कि भारत की मीडिया को अधिकतर फंडिग वेटिकन सिटी जो ईसाई धर्म का बड़ा स्थान है वहाँ से आता है इसलिए मीडिया हिन्दू धर्म को नष्ट करने के लिए केवल हिन्दू धर्म के साधु-संतों को बदनाम करती है और ईसाई पादरियों के दुष्कर्म को छुपाती है ।
🚩भारतवासी इन विदेशी फंडिग से चलने वाली मीडिया से सावधान रहें ।
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रानी दुर्गावती ने तीन बार अकेले मुगल सेना को रौंद दिया था, जानिए इतिहास

24 June 2018
🚩भारत में शूर, बुद्धिमान और साहसी कई वीरांगना पैदा हुई, जिनके नाम से ही मुगल सल्तनत काँपने लगती थी पर दुर्भाग्य की बात यह है कि भारत के इतिहास में उनको कहीं स्थान नहीं दिया गया इसके विपरीत क्रूर, लुटेरे, बलात्कारी मुगलों का इतिहास पढ़ाया जाता है । आज अगर सही इतिहास पढ़ाया जाए तो हमारी भावी पीढ़ी पश्चिमी संस्कृति की तरफ मुड़कर भी नही देखेगी इतना महान इतिहास है अपना ।
Rani Durgavati tripled the Mughal army three times, know history
🚩भारत की नारियों में अथाह सामर्थ्य है, अथाह शक्ति है। अपनी छुपी हुई शक्ति को जाग्रत करके अवश्य महान बन सकती है । आइये ऐसी एक महान नारी की याददाश्त को ताजा करते हैं ।
🚩रानी दुर्गावतीका जन्म 10 जून, 1525 को तथा हिंदु कालगणनानुसार आषाढ शुक्ल द्वितीयाको चंदेल राजा कीर्ति सिंह तथा रानी कमलावतीके गर्भसे हुआ । वे बाल्यावस्थासे ही शूर, बुद्धिमान और साहसी थीं । उन्होंने युद्धकलाका प्रशिक्षण भी उसी समय लिया । प्रचाप (बंदूक) भाला, तलवार और धनुष-बाण चलानेमें वह प्रवीण थी । गोंड राज्यके शिल्पकार राजा संग्रामसिंह बहुत शूर तथा पराक्रमी थे । उनके सुपुत्र वीरदलपति सिंहका विवाह रानी दुर्गावतीके साथ वर्ष 1542 में हुआ । वर्ष 1541 में राजा संग्राम सिंहका निधन होनेसे राज्यका कार्यकाज वीरदलपति सिंह ही देखते थे । उन दोनोंका वैवाहिक जीवन 7-8 वर्ष अच्छेसे चल रहा था । इसी कालावधिमें उन्हें वीरनारायण सिंह नामक एक सुपुत्र भी हुआ ।
🚩 रानी दुर्गावतीने गोंड राजवंशवकी बागडोर (लगाम) थाम ली
🚩दलपतशाहकी मृत्यु लगभग 1550 ईसवी सदीमें हुई । उस समय वीर नारायणकी आयु बहुत अल्प होनेके कारण, रानी दुर्गावतीने गोंड राज्यकी बागडोर (लगाम) अपने हाथोंमें थाम ली । अधर कायस्थ एवं मन ठाकुर, इन दो मंत्रियोंने सफलतापूर्वक तथा प्रभावी रूपसे राज्यका प्रशासन चलानेमें रानीकी मदद की । रानीने सिंगौरगढसे अपनी राजधानी चौरागढ स्थानांतरित की । सातपुडा पर्वतसे घिरे इस दुर्गका (किलेका) रणनीतिकी दृष्टिसे बडा महत्त्व था ।
🚩कहा जाता है कि इस कालावधिमें व्यापार बडा फूला-फला । प्रजा संपन्न एवं समृद्ध थी । अपने पतिके पूर्वजोंकी तरह रानीने भी राज्यकी सीमा बढाई तथा बडी कुशलता, उदारता एवं साहसके साथ गोंडवनका राजनैतिक एकीकरण ( गर्‍हा-काटंगा) प्रस्थापित किया । राज्यके 23000 गांवोंमेंसे 12000 गांवोंका व्यवस्थापन उसकी सरकार करती थी । अच्छी तरहसे सुसज्जित सेनामें 20,000 घुडसवार तथा 1000 हाथीदलके साध बडी संख्यामें पैदलसेना भी अंतर्भूत थी । रानी दुर्गावतीमें सौंदर्य एवं उदारताका धैर्य एवं
🚩बुद्धिमत्ताका सुंदर संगम था । अपनी प्रजाके सुखके लिए उन्होंने राज्यमें कई काम करवाए तथा अपनी प्रजाका ह्रदय (दिल) जीत लिया । जबलपुरके निकट ‘रानीताल’ नामका भव्य जलाशय बनवाया । उनकी पहलसे प्रेरित होकर उनके अनुयायियोंने चेरीतल का निर्माण किया तथा अधर कायस्थने जबलपुरसे तीन मीलकी दूरीपर अधरतलका निर्माण किया । उन्होंने अपने राज्यमें अध्ययनको भी बढावा दिया ।
🚩आक्रमणकारी बाजबहादुर जैसे शक्तिशाली राजाको युद्ध में हराना
🚩राजा दलपतिसिंहके निधनके उपरांत कुछ शत्रुओंकी कुदृष्टि इस समृद्धशाली राज्यपर पडी । मालवाका मांडलिक राजा बाजबहादुरने विचार किया, हम एक दिनमें गोंडवाना अपने अधिकारमें लेंगे । उसने बडी आशासे गोंडवानापर आक्रमण किया; परंतु रानीने उसे पराजित किया । उसका कारण था रानीका संगठन चातुर्य । रानी दुर्गावतीद्वारा बाजबहादुर जैसे शक्तिशाली राजाको युद्धमें हरानेसे उसकी कीर्ति सर्वदूर फैल गई । सम्राट अकबरके कानोंतक जब पहुंची तो वह चकित हो गया । रानीका साहस और पराक्रम देखकर उसके प्रति आदर व्यक्त करनेके लिए अपनी राजसभाके (दरबार) विद्वान `गोमहापात्र’ तथा `नरहरिमहापात्र’को रानीकी राजसभामें भेज दिया । रानीने भी उन्हें आदर तथा पुरस्कार देकर सम्मानित किया । इससे अकबरने सन् 1540 में वीरनारायणसिंहको  राज्यका शासक मानकर स्वीकार किया । इस प्रकारसे शक्तिशाली राज्यसे मित्रता बढने लगी । रानी तलवारकी अपेक्षा बंदूकका प्रयोग अधिक करती थी । बंदूकसे लक्ष साधनेमें वह अधिक दक्ष थी । ‘एक गोली एक बली’, ऐसी उनकी आखेटकी पद्धति थी । रानी दुर्गावती राज्यकार्य संभालनेमें बहुत चतुर, पराक्रमी और दूरदर्शी थी ।
🚩अकबरका सेनानी तीन बार रानिसे पराजित
🚩अकबरने वर्ष 1563 में आसफ खान नामक बलाढ्य सेनानीको (सरदार) गोंडवानापर आक्रमण करने भेज दिया । यह समाचार मिलते ही रानीने अपनी व्यूहरचना आरंभ कर दी । सर्वप्रथम अपने विश्वसनीय दूतोंद्वारा अपने मांडलिक राजाओं तथा सेनानायकोंको सावधान हो जानेकी सूचनाएं भेज दीं । अपनी सेनाकी कुछ टुकडियोंको घने जंगलमें छिपा रखा और शेषको अपने साथ लेकर रानी निकल पडी । रानीने सैनिकोंको मार्गदर्शन किया । एक पर्वतकी तलहटीपर आसफ खान और रानी दुर्गावतीका सामना हुआ । बडे आवेशसे युद्ध हुआ । मुगल सेना विशाल थी । उसमें बंदूकधारी सैनिक अधिक थे । इस कारण रानीके सैनिक मरने लगे; परंतु इतनेमें जंगलमें छिपी सेनाने अचानक धनुष-बाणसे आक्रमण कर, बाणोंकी वर्षा की । इससे मुगल सेनाको भारी क्षति पहुंची और रानी दुर्गावतीने आसफ खानको पराजित किया । आसफ खानने एक वर्षकी अवधिमें ३ बार आक्रमण किया और तीनों ही बार वह पराजित हुआ ।
🚩गोंडवानाकी स्वतंत्रताके लिए आत्मबलिदान देनेवाली रानी
🚩अंतमें वर्ष 1564 में आसफखानने सिंगारगढपर घेरा डाला; परंतु रानी वहांसे भागनेमें सफल हुई । यह समाचार पाते ही आसफखानने रानीका पीछा किया । पुनः युद्ध आरंभ हो गया । दोनो ओरसे सैनिकोंको भारी क्षति पहुंची । रानी प्राणोंपर खेलकर युद्ध कर रही थीं । इतनेमें रानीके पुत्र वीरनारायण सिंहके अत्यंत घायल होनेका समाचार सुनकर सेनामें भगदड मच गई । सैनिक भागने लगे । रानीके पास केवल 300 सैनिक थे । उन्हीं सैनिकोंके साथ रानी स्वयं घायल होनेपर भी आसफखानसे शौर्यसे लड रही थी । उसकी अवस्था और परिस्थिति देखकर सैनिकोंने उसे सुरक्षित स्थानपर चलनेकी विनती की; परंतु रानीने कहा, ‘‘मैं युद्ध भूमि छोडकर नहीं जाऊंगी, इस युद्धमें मुझे विजय अथवा मृत्युमें से एक चाहिए ।” अंतमें घायल तथा थकी हुई अवस्थामें उसने एक सैनिकको पास बुलाकर कहा, “अब हमसे तलवार घुमाना असंभव है; परंतु हमारे शरीरका नख भी शत्रुके हाथ न लगे, यही हमारी अंतिम इच्छा है । इसलिए आप भालेसे हमें मार दीजिए । हमें वीरमृत्यु चाहिए और वह आप हमें दीजिए”; परंतु सैनिक वह साहस न कर सका, तो रानीने स्वयं ही अपनी तलवार गलेपर चला ली ।
🚩वह दिन था 24 जून 1564 का, इस प्रकार युद्ध भूमिपर गोंडवानाके लिए अर्थात् अपने देशकी स्वतंत्रताके लिए अंतिम क्षणतक वह झूझती रही । गोंडवानापर वर्ष 1549 से 1564 अर्थात् 15 वर्ष तक रानी दुर्गावतीका अधिराज्य था, जो मुगलोंने नष्ट किया । इस प्रकार महान पराक्रमी रानी दुर्गावतीका अंत हुआ । इस महान वीरांगनाको हमारा शतशः प्रणाम !
🚩जिस स्थानपर उन्होंने अपने प्राण त्याग किए, वह स्थान स्वतंत्रता सेनानियोंके लिए निरंतर प्रेरणाका स्रोत रहा है ।
🚩उनकी स्मृतिमें 1883 में मध्यप्रदेश सरकारने जबलपुर विश्वविद्यालयका नाम रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय रखा ।
🚩इस बहादुर रानीके नामपर भारत सरकारने 24 जून 1988 को डाकका टिकट प्रचलित कर (जारी कर) उनके बलिदानको श्रद्धांजली अर्पित की ।
🚩गोंडवानाको स्वतंत्र करने हेतु जिसने प्राणांतिक युद्ध किया और जिसके रुधिरकी प्रत्येक बूंदमें गोंडवानाके स्वतंत्रताकी लालसा थी, वह रणरागिनी थी महारानी दुर्गावती । उनका इतिहास हमें नित्य प्रेरणादायी है ।
🚩आज की भारतीय नारियाँ इन आदर्श नारियों से प्रेरणा पाकर आगे बढ़े, पाश्चात्य संस्कृति की तरफ न भागे । भारत की नारियां अपने बच्चों में सदाचार, संयम आदि उत्तम संस्कारों का सिंचन करें तो वह दिन दूर नहीं, जिस दिन पूरे विश्व में भारतीय सनातन धर्म और संस्कृति की दिव्य पताका पुनः लहरायेगी।
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पहले सरकारीकरण किए मंदिरों के भ्रष्टाचार का उत्तर दें सरकार – हिन्दू जनजागृति समिति

🚩कांग्रेस सरकार ने पहले सरकारी खजाना खाली कर दिया और उसके बाद उनकी वक्रदृष्टि हिन्दू मंदिरों में श्रद्धालुआें के धन पर पड़ी । इस धन को हड़पने के लिए उन्होंने हिन्दुआें के मंदिरों का सरकारीकरण आरंभ किया । इसके द्वारा मंदिर के श्रद्धालुआें के करोडों रुपए लूटे तथा हज यात्रा एवं चर्च के विकास के लिए उस धन का उपयोग किया ।
🚩हाल ही में कर्नाटक में हुए चुनावों के समय भाजपा ने अपने चुनावी घोषणापत्र में हिन्दुआें के सरकारीकरण हुए मंदिर हिन्दुआें को वापस करेंगे, ऐसी एक प्रमुख घोषणा की थी । परंतु महाराष्ट्र में यही भाजपा सरकार हिन्दुआें से मंदिर छीनकर उनका सरकारीकरण कर रही है ।
Answer to the corruption of the first government-made
temples Government – Hindu Janajagruti Samiti
🚩सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशानुसार धर्मनिरपेक्ष सरकार को हिन्दुआें के मंदिर चलाने का अधिकार नहीं है । न्यायालय ने केवल प्रबंधन कि त्रुटियां दूर कर मंदिर पुनः उस समाज को लौटाने के निर्देश दिए हैं । ऐसा होते हुए भी भाजपा सरकार ने शिंगणापूर के श्री शनैश्‍वर देवस्थान का सरकारीकरण करने का निर्णय लिया । इस निर्णय का हिन्दू जनजागृति समिति निषेध करती है । शासन ने यदि यह निर्णय निरस्त नहीं किया तो जनांदोलन किया जाएगा, ऐसी चेतावनी समिति के महाराष्ट्र संगठक श्री. सुनील घनवट ने दी है ।
🚩श्री. घनवट ने आगे कहा कि इससे पहले भी शासन ने पंढरपुर स्थित श्री विठ्ठल-रुक्मिणी मंदिर, तुळजापुर का श्री तुळजाभवानी मंदिर, मुंबई का श्री सिद्धीविनायक मंदिर, शिर्डी का श्री साई संस्थान, तथा ‘पश्‍चिम महाराष्ट्र देवस्थान समिति’ बनाकर उसके द्वारा पूरे 3067 मंदिर अपने नियंत्रण में लिए । इसमें कोल्हापुर के श्री महालक्ष्मी एवं श्री ज्योतिबा देवस्थान का भी समावेश है । इन सभी मंदिरों का सुव्यवस्थापन करने के नाम पर सरकारीकरण किया गया । प्रत्यक्ष में इसके विपरीत मंदिरों के व्यवस्थापन में शासकीय समितियों ने बडी मात्रा में भ्रष्टाचार कर करोडों रुपयो का धन लुटा है । इस विषय में ‘सीआइडी’ जांच तथा न्यायालय में याचिका चल रही है । देवनिधि लूटनेवाले पापी व्यक्तियों को दंड न देनेवाले शासन को श्री शनैश्‍वर देवस्थान को नियंत्रित करने का कोई नैतिक अधिकार नहीं । शासन ने नियंत्रण में लिए मंदिरों का धन लूटनेवालों पर अभी तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं की उन भ्रष्टाचारियों को खुला क्यों छोड रखा है इसका उत्तर देना आवश्यक है अन्यथा शासन पर श्री शनिदेव का ही नहीं हिन्दुआें का भी कोप होगा ।
🚩हिन्दू श्रद्धालु मंदिरों में दान, सामाजिक और शासकीय कामों के लिए नहीं करता, धर्मकार्य के लिए करता है । इस दान का उपयोग धर्मकार्य में ही होना चाहिए ऐसा कार्य वास्तविक भक्त ही कर सकते हैं । इसलिए शासन आज तक अधिग्रहित किए सभी मंदिर भक्तों को सौंप दें । भ्रष्टाचार हुए मंदिर के दोषियों पर कठोरतम कार्रवाई करे अन्यथा हिन्दू जनजागृति समिति सडक पर उतरकर राज्यव्यापी आंदोलन करेगी ऐसी चेतावनी भी श्री. घनवट ने इस समय दी ।
🚩सरकारी कामकाज मे लगभग सभी जगा भ्रष्टाचार मिलता है अब वे हिन्दुओ की आस्था के प्रीतक मंदिरो को भी सरकारी करण करने लगे है तो फिर उसमें भ्रष्टाचार होना स्वाभाविक ही है।
🚩हिन्दू कितना भी आर्थिक रूप से कमजोर हो लेकिन फिर भी अपनी जिस देवस्थान में आस्था रखता है वहाँ कुछ के कुछ भेट चढाता ही है वे इसलिए चढ़ाता है कि उन पैसे का सही इस्तेमाल होगा और सत्कर्म में लगेगा जिससे उसका और उसके परिवार का उद्धार होगा और ऐसे भी हिन्दू धर्म मे कमाई का दसवां हिस्सा दान करने का शास्त्र का नियम है तो लगभग सभी हिन्दू मंदिरो या आश्रमों में जाकर दान करते है और उन दान के पैसे से धर्म, राष्ट्र और समाज के उत्थान के लिये कार्य होते है ।
🚩सरकार अगर इन मंदिरों को सरकारी करण कर लेती है तो धर्म और राष्ट के हित के कार्य रुक जाएंगे और भ्रष्टाचार में पैसे चले जायेंगे इसलिए सरकार को मंदिरो को सरकारी तंत्र से मुक्त कर देना चाहिए ।
🚩सरकार कभी चर्च या मस्जिद को नियंत्रिण में लेने के लिए विचार करती है? अगर नही तो फिर मन्दिरों को ही  नियंत्रण में लेना चाहती है? जबकि चर्चो और मस्जिदों में धर्मिक उन्माद बढ़ाया जाता है जो देश के लिए हानिकारक है और मंदिरों में शांति का पाठ पढ़ाया जाता है जो देश के लिए हितकारी है अतः अभी सरकार को शिघ्र मंदिरो को सरकारी हस्तक्षेप से मुक्त कर देना चाहिए ।
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हिन्दू संतों को बदनाम करना “सी आई ए” का बड़ा षडयंत्र : दारा सेना

🚩श्री दारा सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री मुकेश जैन की अध्यक्षता में हुई हिन्दू सगठनों की बैठक में दिल्ली पुलिस और क्राइम ब्रांच पर आरोप लगाया कि वो हिन्दू संतो पर बलात्कार का आरोप लगाने वाली युवतियों का दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 164 ए के तहत मेंडिकल परीक्षण नहीं करा रही है और बिना किसी साक्ष्य के ही हिन्दू सन्तों को बदनाम करने की सी आई ए (सेंट्रल इंटलीजेंस एजंसी) और उसकी आतंकवादी ईसाई मिश्निरियों की साजिश के तहत काम कर रही है।
🚩बैठक में दारा सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री मुकेश जैन ने बताया कि बलात्कार के मामले में भी भारतीय दण्ड संहिता की धारा 375 में साफ लिखा है कि बलात्कार वो ही माना जायेगा जिसमें शारिरिक संबध के साथ-साथ जबरदस्ती भी की गयी हो। और इस जबरदस्ती के साक्ष्य उपबल्ध कराने के लिये 164 के तहत कथित पीड़िता का बयान ही पर्याप्त नहीं है बल्कि 164 ए के तहत कथित पीड़िता का मेडिकल परीक्षण भी होना जरूरी है। दाती महाराज की आड़ में हिन्दू धर्म को बदनाम करने में लगी दिल्ली पुलिस इन सब साक्ष्यों को बिना जुटाये ही हिन्दू धर्म को बदनाम करने में जुटी हैं।
Describing Hindu saints a big conspiracy of “CIA”: Dara army
🚩श्री जैन ने आरोप लगाया हिन्दू धर्म को बदनाम करने में दिल्ली पुलिस सर्वोच्च न्यायालय के किसी मुकदमें में दिये गये उस फैसले को ढाल बना रही है जिसमें पीड़िता के बयान को ही न्यायालय ने सही माना है। श्री जैन ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय खुद कह चुका है कि उसका फैसला केवल और केवल उसी मुकदमें तक सीमित है जिस मुकदमें में वह दिया गया है क्योंकि कानून संसद बनाती है वो भी महामहिम राष्ट्रपति जी की लिखित स्वीकृति के बाद। श्री जैन ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय का फैसला कोई कानून नहीं है क्योंकि सर्वोच्च न्यायालय को भी कानून बनाने के लिये संविधान के अनुच्छेद 145 के तहत महामहिम राष्ट्रपति जी की स्वीकृति जरूरी है।
🚩हिन्दू संगठनों ने सरकार और गृह मंत्रालय को आगाह किया कि एक बड़ी खूंखार नक्सली मिश्निरी ईसाई आतंकवादी साजिश के तहत एक-एक कर उन हिन्दू सन्तों को निशाना बनाया जा रहा जो अनाथालय चला रहे है ताकि हिन्दू अनाथालयों को बर्बाद करके लावारिस और घर से भागे लड़के और लड़कियों को केवल और केवल ईसाई  मिश्नरियों के अनाथालय में डालकर उन बच्चों के हाथों में हथियार पकड़ा कर पुलिस के जवानों और सैनिकों को मारने के लिये बड़ी फौज खड़ी की जा सके । स्वाति मालीवाल जैसी खूंखार नक्सली मिशनरी ईसाई आतंकवादी और “सी आई ए” की ऐजेन्ट का हिन्दू सन्तों को बदनाम करने और उन्हे साजिशन फसाना इसकी पुष्टी करता है।
🚩हिन्दू संगठनों ने सरकार से इस नक्सली मिशनरी ईसाई आतंकवादी साजिश की जांच करने और बलात्कार के मामले में सम्बन्धित कानून के तहत पीड़िता के आरोपों की पुष्टी करके ही मुकदमा दर्ज करने की मांग की।
🚩गौरतलब है कि अभी हाल ही में दिल्ली के दाती महाराज पर रेप का आरोप लगा है इसलिए आरोप लगाने वाली युवती का 164 ए के तहत मेडिकल परीक्षण कर बलात्कार की पुष्टी की जाये इसलिए हिन्दू संगठन दारा सेना ने दिल्ली में बैठक कर प्रेस विज्ञप्ति जारी किया है ।
🚩आपको बता दे कि साधु-संतों पर सदियो से आरोप लगते रहे है क्योंकि जब जब अच्छे कार्य करने कोई भी जाता है तो उसके पीछे आसुरी शक्तियां पड़ती है और हमारे साधु-संत तो हमेशा अच्छे कार्य करते है तो दुष्टप्रकृति के लोगो को सहन नही हो पाता है और उन्हें बदनाम करने के लिए अनेक षड्यंत्र रचते है बुद्ध भगवान, स्वामी विवेकानंद, कबीरजी, मीरा बाई, ज्ञानेश्वर महाराज आदि आदि पर अनेक आरोप लगे लेकिन आज भी उनकी पूजा करोड़ो लोग करते है ।
🚩वर्तमान में भी जयेन्द्र सरस्वती, साध्वी प्रज्ञा, स्वामी नित्यानंद जी,  स्वामी असीमानन्द जी,
संत आसाराम बापू, श्री नारायण साई, कृपालु महाराज, स्वामी केशवानन्द जी आदि पर अनेक आरोप लगे है और लग रहे है ।
🚩द्वारका गुजरात के स्वामी केशवानन्द जी पर बलात्कार का केस लगाया और निचली अदालत ने 12 साल की सजा सुना दी बाद में उच्चन्यायालय ने 7 साल बाद निर्दोष बरी किया, ऐसे ही जयेन्द्र सरस्वती जी को निचली अदालत ने दोषी ठहराया और उच्च न्यायालय ने 9 साल बाद निर्दोष बरी किया ।
वर्तमान में संत आसाराम बापू को भी निर्दोष होने के सबूत को मान्य नही रखकर निचली अदालत ने उम्रकैद सुना दी अब वे भी उच्चन्यायालय से निर्दोष बरी होंगे ।
🚩बात यहाँ पर ये है कि राष्ट्र और धर्म विरोधियों को हिन्दू संत रास नही आ रहे है क्योंकि वे धर्मान्तरण नही होने देते है, घरवापसी करवा देते है, अपने धर्म के प्रति कट्टर बनाते है, व्यशन छुड़वा देते है, सिनेमा आदि देखने को मना करते है जिससे ईसाई मिशनरियों का धर्मान्तरण का और विदेशी कम्पनियों को अरबो-खरबो का नुकसान होता है इसलिए वे लोग मीडिया को भारी फंड देते है इसलिए मीडिया उनको खूब बदनाम करती है जिससे  हिन्दुओ को अपने धर्मगुरुओं के प्रति आस्था कम हो जाये और हिन्दू अपने धर्म से घृणा करने लगे और विदेशी कल्चर को अच्छा मानने लगे फिर उन विधर्मियों का धर्मान्तरण और विदेशी प्रोडक्ट बेचना आसान हो जाये ।
🚩अतः हिन्दू सावधान रहें राष्ट्र और धर्म के विरोधियों को पहचाने और उसका विरोध करें ।
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राजा दाहिर सेन ने आखिरी सांस तक घुसने नही दिया था मुगलों को, जानिए इतिहास

🚩आज बलिदान दिवस है एक ऐसे हिन्दू राजा कि जिनके बारे में इतिहासकार लिखते ही नहीं, वो चीजों को बड़ी ही मक्कारी से छिपाते है दाहिर सेन जो कि सिंधुपति थे सिन्धु राज्य के राजा थे, जिनका जन्म 663 ईसवी में हुआ था और 712 ईसवी में आज ही के दिन 20 जून को भूमि कि रक्षा करते हुए उन्होंने बलिदान दे दिया था ।
🚩आज के बलोचिस्तान ईरान कराची और पुरे सिन्धु इलाके के राजा थे दाहिर सेन, मोहम्मद के मरने के बाद सुन्नियों और शियाओं में संघर्ष शुरू हो गया कि मोहम्मद के बाद मुसलमानों का नेता कौन होगा ।
King Dahir Sen did not allow him to enter the last breath
🚩मोहम्मद के परिवार वालो को सुन्नियों ने निशाना बनाना शुरू कर दिया, अली इत्यादि कि हत्या कि गयी और मोहम्मद के कई और परिजन थे उनकी भी हत्या की गयी। मोहम्मद के कई परिजनों को सिंधुपति दाहिर सेन ने बचाया और अपने सिन्धु देश में शरण दी ।
🚩भारत मे दाहिर सेन का शायद नाम भी नही जानते होंगे कई लोग सामान्य लोग तो दूर खुद इतिहास के छात्र और कई शिक्षक भी  क्योंकि पुस्तको में नाम आता तो खतरे में आ जाती तथाकथित धर्मनिरपेक्षता क्योंकि बोलना पड़ता सच और सच मे ये भी था कि मुहम्मद बिन कासिम नाम के एक आक्रांता का भी जिक्र करना होगा जिसने अपने जीवन को लूट हत्या और बलात्कार में बिता दिया …
🚩भारत को लूटने और इस पर कब्जा करने के लिए पश्चिम के रेगिस्तानों से आने वाले मजहबी हमलावरों का वार सबसे पहले सिन्ध कि वीरभूमि को ही झेलना पड़ता था। इसी सिन्ध के राजा थे दाहरसेन जिन्होंने युद्धभूमि में लड़ते हुए प्राणाहुति दी। उनके बाद उनकी पत्नी, बहन और दोनों पुत्रियों ने भी अपना बलिदान देकर भारत में एक नयी परम्परा का सूत्रपात किया ।
🚩सिन्ध के महाराजा चच के असमय देहांत के बाद उनके 12 वर्षीय पुत्र दाहरसेन गद्दी पर बैठे। राज्य की देखभाल उनके चाचा चन्द्रसेन करते थे पर छह वर्ष बाद चन्द्रसेन का भी देहांत हो गया। अतः राज्य कि जिम्मेदारी 18 वर्षीय दाहरसेन पर आ गयी। उन्होंने देवल को राजधानी बनाकर अपने शौर्य से राज्य कि सीमाओं का कन्नौज, कंधार, कश्मीर और कच्छ तक विस्तार किया।
🚩राजा दाहरसेन एक प्रजावत्सल राजा थे। गौरक्षक के रूप में उनकी ख्याति दूर-दूर तक फैली थी। यह देखकर ईरान के शासक हज्जाम ने 712 ई. में अपने सेनापति मोहम्मद बिन कासिम को एक विशाल सेना देकर सिन्ध पर हमला करने के लिए भेजा। कासिम ने देवल के किले पर कई आक्रमण किये पर राजा दाहरसेन और हिन्दू वीरों ने हर बार उसे पीछे धकेल दिया।
🚩सीधी लड़ाई में बार-बार हारने पर कासिम ने धोखा किया। 20 जून 712 ई. को उसने सैकड़ों सैनिकों को हिन्दू महिलाओं जैसा वेश पहना दिया। लड़ाई छिड़ने पर वे महिला वेशधारी सैनिक रोते हुए राजा दाहरसेन के सामने आकर मुस्लिम सैनिकों से उन्हें बचाने की प्रार्थना करने लगे। राजा ने उन्हें अपनी सैनिक टोली के बीच सुरक्षित स्थान पर भेज दिया और शेष महिलाओं कि रक्षा के लिए तेजी से उस ओर बढ़ गये जहां से रोने के स्वर आ रहे थे।
🚩इस दौड़भाग में वे अकेले पड़ गये। उनके हाथी पर अग्निबाण चलाये गये जिससे विचलित होकर वह खाई में गिर गया। यह देखकर शत्रुओं ने राजा को चारों ओर से घेर लिया। राजा ने बहुत देर तक संघर्ष किया पर अंततः शत्रु सैनिकों के भालों से उनका शरीर क्षत-विक्षत होकर मातृभूमि की गोद में सदा के लिये सो गया। इधर महिला वेश में छिपे मुस्लिम सैनिकों ने भी असली रूप में आकर हिन्दू सेना पर बीच से हमला कर दिया। इस प्रकार हिन्दू वीर दोनों ओर से घिर गये और मोहम्मद बिन कासिम का पलड़ा भारी हो गया।
🚩राजा दाहरसेन के बलिदान के बाद उनकी पत्नी लाड़ी और बहन पद्मा ने भी युद्ध में वीरगति पाई। कासिम ने राजा का कटा सिर, छत्र और उनकी दोनों पुत्रियों (सूर्या और परमाल) को बगदाद के खलीफा के पास उपहारस्वरूप भेज दिया। जब खलीफा ने उन वीरांगनाओं का आलिंगन करना चाहा तो उन्होंने रोते हुए कहा कि कासिम ने उन्हें अपवित्र कर आपके पास भेजा है।
🚩इससे खलीफा भड़क गया। उसने तुरन्त दूत भेजकर कासिम को सूखी खाल में सिलकर हाजिर करने का आदेश दिया। जब कासिम कि लाश बगदाद पहुंची तो खलीफा ने उसे गुस्से से लात मारी। दोनों बहनें महल की छत पर खड़ी थीं। जोर से हंसते हुए उन्होंने कहा कि हमने अपने देश के अपमान का बदला ले लिया है। यह कहकर उन्होंने एक दूसरे के सीने में विष से बुझी कटार घोंप दी और नीचे खाई में कूद पड़ीं। खलीफा अपना सिर पीटता रह गया।
🚩बाद में इन दोनों बहनों कि लाशों को घोड़े में बाँध कर पूरे बगदास में घसीटा गया आज धर्म कि रक्षा के लिए पूरे परिवार को न्योछावर कर देने वाले उस महान धर्मरक्षक हिन्दू राजा दाहिरसेन को  उनके बलिदान दिवस पर बारम्बार नमन…
स्त्रोत : दैनिक भारत
🚩स्कूल, कॉलेज के पाठ्यक्रम के इतिहास में केवल लुटेरे, क्रूर, बलात्कारी मुगलों व अंग्रेजो के इतिहास ही पढ़ाया जाता है सच्चा इतिहास कभी नही पढ़ाया जाता है इसलिए हमें हमारे वीर बहादुर देशभक्तो के बारे में नही जान पाते हैं अभी सरकार को इसपर ध्यान देना चाहिए और सही इतिहास पढ़ाना चाहिए।
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