राष्ट्रपति : भारत राष्ट्र की पहचान गंगा व संतों से है, ‘इंडिया गेट या लाल किला’ से नहीं

President: India's identity is with Ganga and saints, not from 'India Gate or Red Fort'

सितम्बर 26, 2017 #राष्ट्रपति #रामनाथ कोविंद सोमवार को दिव्य-प्रेम सेवा मिशन के कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। तभी उन्होंने कहा कि इस राष्ट्र ने गंगा व #साधु-संतों के विचार-प्रभाव से अपना स्वरूप ग्रहण किया है और वही इस #राष्ट्र … Continue reading

करोड़ो भक्तों ने क्यों मनाया धर्मगुरु बापू आसारामजी का आत्म-साक्षात्कार दिवस?

self realization day,

सितम्बर 21, 2017  जोधपुर जेल में धर्मगुरु बापू आसारामजी, बिना आरोप सिद्ध हुए चार साल से जेल में बंद हैं और वे हमेशा मीडिया की सुर्खियों में रहते हैं ।  आपको बता दें कि उनके करोड़ो भक्त गुरुवार को आत्म-साक्षात्कार … Continue reading

जाने सर्वपितृ अमावस्या के दिन श्राद्ध क्यो करना चाहिए, नही करने से क्या होगी हानि ?

SHRADDH MAHIMA

सर्वपितृ अमावस्या 19 सितम्बर 2017 राजा रोहिताश्व ने मार्कण्डेयजी से प्रार्थना की : ‘‘भगवन् ! मैं श्राद्धकल्प का यथार्थरूप से श्रवण करना चाहता हूँ । मार्कण्डेयजी ने कहा : ‘‘राजन् ! इसी विषय में आनर्त-नरेश ने भर्तृयज्ञ से पूछा था … Continue reading

इतिहास देख लो वर्तमान में सभी संतों की निंदा हुई है, बाद में उनकी मूर्ति को पूजते हैं

all saints have been condemned, they worship their statue later

इतिहास देख लो वर्तमान में सभी संतों की निंदा हुई है, बाद में उनकी मूर्ति को पूजते हैं भारत देश ऋषि-मुनियों, साधु-संतों का देश रहा है, उनके ही मार्गदर्शन में राजसत्ता चलती थी, भगवान श्रीकृष्ण भी संदीपनी ऋषि के पास … Continue reading

विघ्नविनाशक भगवान श्री गणपति जी की महिमा, एवं उस दिन से सालभर तक चंद्र दर्शन के कलंक से कैसे बचें?

ganesh chaturthi

गणेश चतुर्थी :  25 अगस्त जिस दिन गणेश तरंगें प्रथम पृथ्वी पर आयी अर्थात जिस दिन गणेश जी अवतरित हुए, वह माघ शुक्ल पक्ष की चतुर्थी का दिन था । उसी दिन से गणपति का चतुर्थी से संबंध स्थापित हुआ … Continue reading

क्या स्वतंत्रता सेनानियों ने इसी आजाद भारत का सपना देखा था

क्या स्वतंत्रता सेनानियों ने इसी आजाद भारत का सपना देखा था

15 अगस्त 1947 को भारत गुलामी की बेडि़यों से आजाद हो गया । सबका त्याग, तपस्या, लगन और आजादी से साँस लेने की ललक ने, वह तूफान खड़ा किया, जिनके समक्ष #अंग्रेजी_शासन का #झंडा हिल गया और #देश आजाद हो … Continue reading

श्रीकृष्णजन्माष्टमी : 15 अगस्त 2017

स्वार्थी, तामसी, आसुरी प्रकृति के कुकर्मी लोग बढ़ जाते हैं तब भगवान का प्रागट्य होता है #पृथ्वी आक्रान्त होकर श्रीहरि से अपने त्राण के लिए #प्रार्थना करती है। जो पृथ्वी इन आँखों से दिखती है वह पृथ्वी का #आधिभौतिक स्वरूप … Continue reading

आजाद हिंद सेना स्थापना दिन – 5 जुलाई

5 जुलाई
🚩भारत की #स्वतंत्रता संग्राम में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभानेवाले #आजाद हिंद सेना का #5 जुलार्इ 1943 को गठन हुआ था ।
azaad hind sena sthapna din
🚩#आजाद
हिंद सेनाके #संस्थापक #नेताजी सुभाषचंद्र बोस उग्रमतवादी थे ।
अंग्रेजोंको परास्त करनेके लिए भारतकी स्वतंत्रता संग्रामकी अंतिम लडाईका
नेतृत्व नियतीने नेताजीके हाथों सौंपा था । नेताजीने यह पवित्र कार्य असीम
साहस एवं तन, मन, धन तथा प्राणका त्याग करनेमें तत्पर रहनेवाले हिंदी
सैनिकोंकी #‘आजाद हिंद सेना’ संगठनद्वारा पूर्ण किया । इस  संगठनका अल्पसा
परिचय !
🚩1. ब्रिटिश सेनाके हिंदी सैनिकोंका नेताजीने बनाया संगठन
अंग्रेजोंकी स्थानबद्धतासे भाग जानेपर नेताजीने फरवरी 1943
तक जर्मनीमें ही वास्तव्य किया । वे जर्मन सर्वसत्ताधीश #हिटलरसे अनेक बार
मिले और उसे हिंदुस्थानकी स्वतंत्रताके लिए सहायताका आवाहन भी किया ।
दूसरे महायुद्धमें विजयकी ओर मार्गक्रमण करनेवाले हिटलरने नेताजीrको सर्व
सहकार्य देना स्वीकार किया । उस अनुसार उन्होंने जर्मनीकी शरणमें आए
अंग्रेजोंकी सेनाके #हिंदी सैनिकोंका प्रबोधन करके उनका #संगठन बनाया ।
नेताजी के वहांके भाषणोंसे हिंदी सैनिक देशप्रेममें भावविभोर होकर
स्वतंत्रताके लिए प्रतिज्ञाबद्ध हो जाते थे ।
🚩2. #आजाद हिंदी सेनाकी स्थापना और #‘चलो दिल्ली’का नारा
पूर्व एशियाई देशोंमें जर्मनीका मित्रराष्ट्र #जापानकी सेना
#ब्रिटिश सेनाको धूल चटा रही थी । उनके पास भी शरण आए हुए, ब्रिटिश सैनाके
हिंदी सैनिक थे । नेताजीके मार्गदर्शनानुसार वहां पहलेसे ही रहनेवाले
#रासबिहारी बोसने हिंदी सेनाका संगठन किया । इस हिंदी सेनासे मिलने नेताजी
90 दिन  पनडुब्बीसे यात्रा करते समय मृत्युसे जूझते जुलाई वर्ष 1943 में जापानकी राजधानी #टोकियो पहुंचे । #रासबिहारी बोसजीने इस सेनाका नेतृत्व नेताजीके हाथों सौंपकर दिया । 5 जुलाई 1943
को सिंगापुरमें नेताजीने ‘आजाद हिंद सेना’की स्थापना की । उस समय सहस्रों
सैनिकोंके सामने ऐतिहासिक भाषण करते हुए वे बोले, ‘‘सैनिक मित्रों ! आपकी
युद्धघोषणा एक ही रहे ! #चलो दिल्ली ! आपमें से कितने लोग इस
स्वतंत्रतायुद्धमें जीवित रहेंगे, यह तो मैं नहीं जानता; परंतु मैं इतना
अवश्य जानता हूं कि अंतिम विजय अपनी ही है। इसलिए उठो और अपने अपने
शस्त्रास्त्र लेकर सुसज्ज हो जाओ । हमारे भारतमें आपसे पहले ही
क्रांतिकारकोंने हमारे लिए मार्ग बना रखा है और वही मार्ग हमें दिल्लीतक ले
जाएगा । ….चलो दिल्ली ।”
🚩3. भारतके अस्थायी शासनकी प्रमुख सेना
सहस्रों सशस्त्र हिंदी सैनिकोंकी सेना सिद्ध होनेपर और पूर्व
एशियाई देशोंकी लाखों हिंदी जनताका भारतीय स्वतंत्रताको समर्थन मिलनेपर
नेताजीने #21 अक्टूबर 1943 को
स्वतंत्र हिंदुस्थानका दूसरा #अस्थायी शासन स्थापित किया । इस अस्थायी
शासनको जापान, जर्मनी, चीन, इटली, ब्रह्मदेश आदि देशोंने उनकी मान्यता
घोषित की । इस अस्थायी शासनका आजाद हिंद सेना, यह प्रमुख सेना बन गई !
#आजाद हिंद सेनामें सर्व जाति-जनजाति, अलग-अलग प्रांत, भाषाओंके सैनिक थे ।
सेनामें एकात्मताकी भावना थी । #‘कदम कदम बढाए जा’, इस गीतसे समरस होकर
नेताजीने तथा उनकी सेनाने #आजाद हिंदुस्थानका स्वप्न साकारनेके लिए #विजय
यात्रा आरंभ की ।
🚩4. #‘रानी ऑफ झांसी रेजिमेंट’की स्थापना
        नेताजीने झांसीकी रानी #रेजिमेंटके पदचिन्होंपर
महिलाओंके लिए #‘रानी ऑफ झांसी रेजिमेंट’की स्थापना की । पुरुषोंके कंधेसे
कंधा मिलाकर महिलाओंको भी सैनिक प्रशिक्षण लेना चाहिए, इस भूमिकापर वे दृढ
रहे । नेताजी कहते, हिंदुस्थानमें #1857
के #स्वतंत्रतायुद्धमें लडनेवाली झांसीकी रानीका आदर्श सामने रखकर
#महिलाओंको भी #स्वतंत्रतासंग्राममें अपना सक्रिय योगदान देना चाहिए ।’
🚩5. आजाद हिंद सेनाद्वारा धक्का
आजाद हिंद सेनाका ब्रिटिश सत्ताके विरोधमें सैनिकी आक्रमण
आरंभ होते ही जापानका सत्ताधीश #जनरल टोजोने इंग्लैंडसे जीते हुए #अंदमान
एवं #निकोबार ये दो द्वीप आजाद हिंद सेनाके हाथों सौंप दिए । 29 दिसंबर 1943
को स्वतंत्र हिंदुस्थानके प्रमुख होनेके नाते नेताजी अंदमान गए और अपना
#स्वतंत्र ध्वज वहां लहराकर सेल्युलर कारागृहमें दंड भोग चुके
क्रांतिकारकोंको आदरांजली समर्पित की । जनवरी #1944 में नेताजीने अपनी सशस्त्र सेना ब्रह्मदेशमें स्थलांतरित की ।
19 मार्च 1944 के
ऐतिहासिक दिन #आजाद हिंद सेनाने भारतकी भूमिपर कदम रखा । इंफाल, कोहिमा आदि
स्थानोंपर इस सेनाने ब्रिटिश सेनापर विजय प्राप्त की । इस विजयनिमित्त 22
सितंबर 1944 को किए हुए भाषणमें
नेताजीने गर्जना की कि, #‘‘अपनी मातृभूमि स्वतंत्रताकी मांग कर रही है !
इसलिए मैं आज आपसे आपका रक्त मांग रहा हूं । केवल रक्तसे ही हमें
स्वतंत्रता मिलेगी । तुम मुझे अपना #रक्त दो । मैं तुमको #स्वतंत्रता दूंगा
!” (‘‘दिल्लीके लाल किलेपर तिरंगा लहरानेके लिए तुम मुझे खून दो, मैं
तुम्हे आजादी दूंगा”) यह भाषण इतिहासमें अजरामर हुआ । उनके इन हृदय झकझोर
देनेवाले उद्गारोंसे उपस्थित हिंदी युवाओंका मन रोमांचित हुआ और उन्होंने
अपने रक्तसे प्रतिज्ञा लिखी ।
🚩6. ‘चलो दिल्ली’का स्वप्न अधूरा; परंतु ब्रिटिशोंको झटका
मार्च 1945 से दोस्तराष्ट्रोंके सामने जापानकी पराजय होने लगी । #7 मई 1945
को जर्मनीने बिना किसी शर्तके #शरणागति स्वीकार ली, जापानने 15 अगस्तको
शरणागतिकी अधिकृत घोषणा की । जापान-जर्मनीके इस अनपेक्षित पराजयसे नेताजीकी
सर्व आकांक्षाएं धूमिल हो गइं । ऐसेमें अगले रणक्षेत्रकी ओर अर्थात् सयाम
जाते समय 18 अगस्त #1945 को
फार्मोसा द्वीपपर उनका #बॉम्बर विमान गिरकर उनका हदयद्रावक अंत हुआ । आजाद
हिंद सेना दिल्लीतक नहीं पहुंच पाई; परंतु उस सेनाने जो प्रचंड आवाहन्
बलाढ्य ब्रिटिश साम्राज्यके सामने खडा किया, इतिहासमें वैसा अन्य उदाहरण
नहीं । इससे ब्रिटिश सत्ताको भयंकर झटका लगा । हिंदी सैनिकोंके विद्रोहसे
आगे चलकर भारतकी सत्ता अपने अधिकारमें रखना बहुत ही कठिन होगा, इसकी आशंका
अंग्रेजोंको आई । चतुर और धूर्त अंग्रेज शासनने भावी संकट ताड लिया ।
उन्होंने निर्णय लिया कि पराजित होकर जानेसे अच्छा है हम स्वयं ही देश
छोडकर चले जाएं । तत्कालीन ब्रिटिश प्रधानमंत्रीने अपनी स्वीकृति दे दी ।
🚩7. ब्रिटिश भयभीत हो गए और नेहरू भी झुके
स्वतंत्रताके लिए सर्वस्व अर्पण करनेवाली नेताजीकी #आजाद हिंद
सेनाको संपूर्ण भारतवासियोंका उत्स्फूर्त #समर्थन प्राप्त था । नेताजीने
ब्रिटिश-भारतपर सशस्त्र आक्रमण करनेकी घोषणा की, तब पंडित नेहरूने उनका
विरोध किया; परंतु नेताजीकी एकाएक मृत्युके उपरांत आजाद हिंद सेनाके
सेनाधिकारियोंपर अभियोग चलते ही, संपूर्ण देशसे सेनाकी ओरसे  लोकमत प्रकट
हुआ । सेनाकी यह लोकप्रियता देखकर अंतमें नेहरूको झुकना पडा, इतना ही नहीं
उन्होंने स्वयं सेनाके अधिकारियोंका अधिवक्तापत्र (वकीलपत्र) लिया । अंततः
आरोप लगाए गए सेनाके ३  सेनाधिकारी सैनिक न्यायालयके सामने दोषी ठहराए गए;
परंतु उनका दंड क्षमा कर दिया; क्योंकि अंग्रेज सत्ताधीशोंकी ध्यानमें आया
कि, नेताजीके सहयोगियोंको दंड दिया, तो 90 वर्षोंमें लोकक्षोभ उफन कर आएगा ।
आजाद हिंद सेनाके सैनिकोंकी निस्वार्थ देशसेवासे ही स्वतंत्रताकी आकांक्षा
कोट्यवधी देशवासियोंके मनमें निर्माण हुई ।
🚩संदर्भ : ‘झुंज क्रांतीवीरांची : स्वातंत्र्यलढ्याचा सशस्त्र इतिहास’, लेखक : श्री. सुधाकर पाटील
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अमेरिका के विश्वविद्यालय के प्रोफेसर ने रामायण पढ़ने के लिए अंग्रेजी भाषा छोड़ी

अमेरिका के विश्वविद्यालय के प्रोफेसर ने रामायण पढ़ने के लिए छोड दी अंग्रेजी
मई 5, 2016
#पाश्चत्य
संस्कृति के अंधानुकरण के कारण भले ही आज भारत में भगवान श्री राम और
#रामायण का महत्व कम समझ पा रहे हैं, लेकिन कई विदेशी बुद्धिजीवी लोगों ने
गीता, रामायण आदि ग्रन्थों का अध्ययन किया और आखिरी सार पर आये कि दुनिया
में सबसे श्रेष्ठ हिन्दू धर्म ही है और बाद में उन्होंने हिन्दू धर्म भी
अपना लिया ।
importance of Hindi
ऐसे
ही अमेरिका की विश्वविद्यालय ऑफ हवॉई के #प्राध्यापक #रामदास ने बताया कि
उन्होंने रामायण सीखने के लिए #अंग्रेजी का भी त्याग कर दिया ।
जबलपुर
: गुरु ने दो वर्ष तक अंग्रेजी न बोलने का संकल्प दिला दिया। फिर #हिंदी
बोलना सीखा। दो वर्ष तक लगातार अभ्यास किया और हिंदी सीख ली। अब भारत में
सभी से हिंदी में ही बात करता हूँ । यह बात चर्चा के दौरान अमेरिका की
विश्वविद्यालय ऑफ हवॉई में धर्म विभाग के प्राध्यापक रामदास ने कही।
उन्होंने
बताया कि मां काफी गरीब थी, जो दूसरों के घरों में सफाई करने जाया करती थी
। वहां से पुस्तकें ले आती थी। एक बार महात्मा गांधी की पुस्तक लेकर आईं,
जिसे पढ़कर भारत आने का मन हुआ। लोगों के सहयोग से 20 साल की उम्र में पहली
बार भारत आया। दूसरी बार 22 वर्ष की उम्र में भारत आया। उन्होंने बताया कि
इसके बाद चित्रकूट में मानस महाआरती त्यागी महाराज के सानिध्य में आया और
उनसे दीक्षा ले ली।
अमेरिका में रामलीला करती है #स्टार्नफील्ड की टीम
25
साल पहले विश्वविद्यालय में अचानक #महर्षि वाल्मीकि का चित्र दिखा, इसमें
उन्हें अपने पिता का चेहरा दिखार्इ दिया। उनके बारे में जानकारी एकत्रित
की और #वाल्मीकि रामायण पढा तभी से रामायण को विस्तृत जानने की प्रेरणा
निर्माण हुर्इ। यह बात विश्व रामायण परिषद में शामिल होने आए #महर्षि
विश्वविद्यालय ऑफ मैनेजमेंट पेयरफिल्ड, लोवा यूएसए के प्रोफसर #माइकल
स्टार्नफिल्ड ने कही। उन्होंने बताया कि उनकी 400 लोगों की एक टीम है,
जिसमें बच्चे, युवा व बुजुर्ग शामिल हैं, जो #वाल्मीकि रामायण पर आधारित
रामलीला करते हैं। उनकी ड्रेस #भारतीय रामलीला से मिलती जुलती है।
थाईलैंड की प्राथमिक शिक्षा में शामिल है #रामायण
बैंकाक
की #सिल्पाकॉर्न विश्वविद्यालय के एसोसिएटेड प्राध्यापक #बूंमरूग खाम-ए ने
बताया कि थाईलैंड में रामायण,लिटरेचर की तरह स्कूल और कॉलेजों के
पाठ्यक्रम में शामिल है। विश्वविद्यालय के खोन (नाट्य) विभाग के छात्र सबसे
अधिक #रामलीला को पसंद करते हैं। थाईलैंड में रामायण को #रामाकेन और
#रामाकृति बोलते हैं। जो वाल्मीकि रामायण से मिलती जुलती है, किंतु इसमें
थाई कल्चर का समावेश है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय के अनेक
विद्यार्थी #रामायण पर #पीएचडी कर रहे हैं। इसमें से कुछ वर्ल्ड रामायण
कांफ्रेंस में शामिल होने जबलपुर आए हैं।
थाईलैंड की रामायण में हनुमानजी ब्रह्मचारी नहीं
प्राध्यापक
बंमरूग खाम-ए ने बताया कि भारत की वाल्मीकि रामायण में हनुमान जी को
ब्रह्मचारी बताया गया है। जबकि थाईलैंड की रामायण (रामाकेन) में हनुमानजी
की पत्नी और पुत्र का उल्लेख है।
हम हिंदी प्रेमी हैं
थाईलैंड
से आईं चारिया #धर्माबून हिंदी प्रेमी हैं। पढ़ाई के दौरान राम के चरित्र
से प्रभावित होकर रामायण पर पीएचडी कर रही हैं। उन्होंने अपने इस प्रेम को
टीशर्ट पर ‘हम हिंदी प्रेमी हैं’ के रूप में भी लिख रखा है। वर्ल्ड रामायण
कांफ्रेंस में शामिल होने उनके साथ #सुपापोर्न पलाइलेक, #चोनलाफाट्सोर्न
बिनिब्राहिम और #पिबुल नकवानीच आए हैं। सभी #शिल्पाकर्न विश्वविद्यालय से
#रामायण में #पीएचडी कर रहे हैं। पीएचडी करने वाले विद्यार्थी रामायण पर
आधारित पैंटिंग और रामलीला भी करते हैं।
भारत के मंदिरों का इतिहास खोज निकाला
अमेरिका
के #डॉ. स्टीफन कनाप ने बताया कि उन्हें हर विषय की गहराई में जाना अच्छा
लगता है। 1973-74 में रामायण के बारे में जानकारी मिली, जिसे पढ़ा और इसकी
खोज में भारत आया। यहां रामायण के संबंध में काफी खोज की। अनेक किताबें लिख
चुके #डॉ. स्टीफन ने बताया कि उन्होंने भारत के मंदिरों के इतिहास की खोज
कर उन पर अनेक पुस्तकें लिखी हैं।
हिन्दू
पुराणों और शास्त्रों में इतना गूढ़ रहस्य है कि अगर मनुष्य उसको ठीक से
पढ़कर समझे तो सुखी स्वस्थ और सम्मानित  जीवन जी सकता है । इस लोक में तो
सुखी रह सकता और परलोक में भी सुखी रह सकता है ।
जिसके
जीवन में #हिन्दू संस्कृति का ज्ञान नही है उसका जीवन तो धोबी के कुत्ते
जैसा है न घर का न घाट का, इस लोक में भी दुःखी चिंतित और परेशान रहता है
और परलोक में भी नर्क में जाकर दुःख ही पाता है ।
अतः बुद्धिमान व्यक्ति को समय रहते भारतीय #संस्कृति के अनुसार अपने जीवन को ढाल लेना चाहिये ।
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वातावरण प्रदूषण मुक्त कैसे हो?

🚩 *वातावरण प्रदूषण मुक्त कैसे हो?*
विश्व पर्यावरण दिवस : 5 जून
🚩पर्यावरण
प्रदूषण की समस्या पर सन् 1972 में #संयुक्त राष्ट्र संघ ने स्टॉक होम
(स्वीडन) में विश्व भर के देशों का पहला पर्यावरण सम्मेलन आयोजित किया।
इसमें 119 देशों ने भाग लिया और पहली बार एक ही पृथ्वी का सिद्धांत मान्य
किया।
Azaad bharat – World_Environment_Day
🚩इसी
सम्मेलन में संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) का जन्म हुआ तथा
प्रति वर्ष 5 जून को #पर्यावरण दिवस आयोजित करके नागरिकों को प्रदूषण की
समस्या से अवगत कराने का निश्चय किया गया। तथा इसका मुख्य उद्देश्य
पर्यावरण के प्रति जागरूकता लाते हुए #राजनीतिक चेतना जागृत करना और आम
जनता को प्रेरित करना था।
🚩वन
हमारी #धरती की #भूमि के #द्रव्यमान का एक तिहाई हिस्सा आच्छादित करते हैं
तथा अपने महत्वपूर्ण कार्यों तथा सेवाओं द्वारा हमारे ग्रह (पृथ्वी) पर
संभावनाओं को जीवित रखते है। वास्तव में 1.6 अरब लोग अपनी आजीविका के लिए
वनों पर निर्भर हैं।
स्वास्थ्य एवं #पर्यावरण रक्षक प्रकृति के अनमोल उपहार !!
🚩#अन्न,
जल और वायु हमारे जीवन के आधार हैं । सामान्य #मनुष्य प्रतिदिन औसतन 1
किलो अन्न और 2 किलो जल लेता है परंतु इनके साथ वह करीब 10,000 लीटर (12 से
13.5 किलो) #वायु भी लेता है । इसलिए #स्वास्थ्य की सुरक्षा हेतु शुद्ध
वायु अत्यंत आवश्यक है ।
🚩#प्रदूषणयुक्त,
ऋण-आयनों की कमी वाली एवं ओजोन रहित हवा से रोग प्रतिकारक शक्ति का ह्रास
होता है व कई प्रकार की शारीरिक-मानसिक #बीमारियाँ होती हैं ।
🚩#प्रदूषण मुक्त कैसे हो?
🚩#पीपल
का वृक्ष दमानाशक, हृदयपोषक, ऋण-आयनों का खजाना, रोगनाशक, आह्लाद व मानसिक
प्रसन्नता का खजाना  तथा रोगप्रतिकारक शक्ति बढानेवाला है । बुद्धू
बालकों तथा हताश-निराश लोगों को भी #पीपल के स्पर्श एवं उसकी छाया में
बैठने से अमिट #स्वास्थ्य-लाभ व पुण्य-लाभ होता है । #पीपल की जितनी महिमा
गायें, कम है । #पर्यावरण की शुद्धि के लिए जनता-जनार्दन एवं #सरकार को
बबूल, नीलगिरी (यूकेलिप्टस) आदि जीवनशक्ति का ह्रास करनेवाले वृक्ष सड़कों
एवं अन्य स्थानों से #हटाने चाहिए और #पीपल, आँवला, तुलसी, वटवृक्ष व नीम
के वृक्ष दिल खोल के #लगाने चाहिए ।
🚩इससे
#अरबों रुपयों की दवाइयों का खर्च बच जायेगा । ये #वृक्ष शुद्ध वायु के
द्वारा प्राणिमात्र को एक प्रकार का उत्तम भोजन प्रदान करते हैं ।
🚩#पीपल
: यह धुएँ तथा धूलि के दोषों को वातावरण से सोखकर #पर्यावरण की रक्षा
करनेवाला एक महत्त्वपूर्ण वृक्ष है । यह #चौबीसों घंटे #ऑक्सीजन उत्सर्जित
करता है । इसके नित्य स्पर्श से रोग-प्रतिरोधक क्षमता की वृद्धि,
मनःशुद्धि, आलस्य में कमी, ग्रहपीड़ा का शमन, शरीर के आभामंडल की शुद्धि और
विचारधारा में धनात्मक परिवर्तन होता है । बालकों के लिए #पीपल का स्पर्श
बुद्धिवर्धक है । #रविवार को पीपल का स्पर्श न करें ।
🚩#आँवला
: #आँवले का वृक्ष #भगवान #विष्णु को प्रिय है । इसके #स्मरणमात्र से
#गोदान का फल प्राप्त होता है । इसके दर्शन से दुगना और फल खाने से तिगुना
पुण्य होता है । #आँवले के वृक्ष का #पूजन कामनापूर्ति में सहायक है ।
#कार्तिक में आँवले के वन में भगवान श्रीहरि की पूजा तथा आँवले की छाया में
भोजन पापनाशक है । #आँवले के वृक्षों से वातावरण में ऋणायनों की वृद्धि
होती है तथा शरीर में शक्ति का, धनात्मक ऊर्जा का संचार होता है ।
🚩#आँवले
से नित्य स्नान पुण्यमय माना जाता है और #लक्ष्मीप्राप्ति में सहायक है ।
जिस #घर में सदा #आँवला रखा रहता है वहाँ भूत, प्रेत और राक्षस नहीं जाते ।
🚩#तुलसी
: #प्रदूषित #वायु के #शुद्धीकरण में #तुलसी का #योगदान सर्वाधिक है ।
#तुलसी का पौधा उच्छ्वास में स्फूर्तिप्रद ओजोन वायु छोडता है, जिसमें
#ऑक्सीजन के दो के स्थान पर तीन परमाणु होते हैं । #ओजोन वायु वातावरण के
बैक्टीरिया, वायरस, फंगस आदि को नष्ट करके #ऑक्सीजन में रूपांतरित हो जाती
है । #तुलसी उत्तम प्रदूषणनाशक है । #फ्रेंच डॉ. विक्टर रेसीन कहते हैं :
‘#तुलसी एक अद्भुत औषधि है । यह रक्तचाप व #पाचनक्रिया का नियमन तथा रक्त
की वृद्धि करती है ।
🚩#वटवृक्ष
: यह #वैज्ञानिक दृष्टि से #पृथ्वी में #जल की मात्रा का स्थिरीकरण
करनेवाला एकमात्र #वृक्ष है । यह भूमिक्षरण को रोकता है । इस वृक्ष के
समस्त भाग #औषधि का कार्य करते हैं । यह #स्मरणशक्ति व एकाग्रता की वृद्धि
करता है । इसमें देवों का वास माना जाता है । इसकी छाया में #साधना करना
बहुत लाभदायी है । #वातावरण-शुद्धि में सहायक हवन के लिए वट और पीपल की
समिधा का वैज्ञानिक महत्त्व है ।
🚩#नीम
: #नीम की #शीतल छाया कितनी सुखद और तृप्तिकर होती है, इसका अनुभव सभीको
होगा । #नीम में ऐसी #कीटाणुनाशक शक्ति मौजूद है कि यदि #नियमित #नीम की
छाया में दिन के समय विश्राम किया जाय तो सहसा कोई #रोग होने की सम्भावना
ही नहीं रहती ।
🚩#नीम
के अंग-प्रत्यंग (पत्तियाँ, फूल, फल, छाल, लकडी) उपयोगी और औषधियुक्त होते
हैं । इसकी कोंपलों और पकी हुई पत्तियों में #प्रोटीन, कैल्शियम, लौह और
विटामिन ‘ए पर्याप्त मात्रा में पाये जाते हैं ।
🚩#नोट
: #नीलगिरी के वृक्ष भूल से भी न लगायें, ये जमीन को बंजर बना देते हैं ।
जिस #भूमि पर ये लगाये जाते हैं उसकी शुद्धि 12 वर्ष बाद होती है, ऐसा माना
जाता है । इसकी #शाखाओं पर ज्यादातर पक्षी घोंसला नहीं बनाते, इसके मूल
में प्रायः कोई प्राणी बिल नहीं बनाते, यह इतना हानिकारक, जीवन-विघातक
वृक्ष है।
 🚩
हे समझदार मनुष्यो ! पक्षी एवं प्राणियों जितनी अक्ल तो हमें रखनी चाहिए ।
हानिकर वृक्ष हटाओ और तुलसी, पीपल, नीम, वटवृक्ष, आँवला आदि लगाओ ।
🚩#पूज्य
#बापू जी कहते हैं कि ये #वृक्ष लगाने से आपके द्वारा प्राणिमात्र की बड़ी
सेवा होगी । यह लेख पढने के बाद #सरकार में अमलदारों व अधिकारियों को सूचित
करना भी एक सेवा होगी । खुद #वृक्ष लगाना और दूसरों को प्रेरित करना भी एक
#सेवा होगी ।
🚩 (सोस्त्र : संत श्री आसारामजी आश्रम से प्रकाशित ऋषि प्रसाद अगस्त 2009 )
🚩विश्व पर्यावरण दिवस पर ‘इतना’ तो हम कर ही सकते हैं ।
🚩#सरकार
जितने भी नियम-कानून लागू करें उसके साथ-साथ #जनता की जागरूकता से ही
#पर्यावरण की रक्षा संभव हो सकेगी । इसके लिए कुछ अत्यंत सामान्य बातों को
जीवन में दृढ़ता-पूर्वक अपनाना आवश्यक है।
🚩जैसे –
🚩1.
प्रत्येक व्यक्ति प्रति वर्ष यादगार अवसरों (#जन्मदिन, #विवाह की
#वर्षगांठ) पर अपने घर, मंदिर या ऐसे स्थल पर फलदार अथवा औषधीय #पौधा-रोपण
करें, जहां उसकी देखभाल हो सके।
 🚩2.#उपहार में भी सबको #पौधे दें।
🚩3.शिक्षा
संस्थानों व #कार्यालयों में विद्यार्थी, #शिक्षक, अधिकारी और कर्मचारीगण
राष्ट्रीय पर्व तथा महत्त्वपूर्ण तिथियों पर पौधे रोपें।
🚩4.विद्यार्थी एक #संस्था में जितने वर्ष अध्ययन करते हैं, उतने पौधे लगाएं और जीवित भी रखें।
🚩5.प्रत्येक #गांव/शहर में हर मुहल्ले व कॉलोनी में #पर्यावरण संरक्षण समिति बनाई जाए।
🚩6.निजी वाहनों का #उपयोग कम से कम किया जाए।
🚩7.#रेडियो-टेलीविजन की आवाज धीमी रखें। सदैव धीमे स्वर में बात करें। घर में पार्टी हो तब भी शोर न होने दें।
🚩8.जल व्यर्थ न बहाएं। गाड़ी धोने या पौधों को पानी देने में #इस्तेमाल किये गए पानी का प्रयोग करें।
 🚩9.अनावश्यक #बिजली की बत्ती जलती न छोडें। पोलोथिन का उपयोग न करें। कचरा कूड़ेदान में ही डालें।
🚩10.अपना #मकान बनवा रहे हों तो उसमें वर्षा के जल-संरक्षण और उद्यान के लिए जगह अवश्य रखें।
🚩ऐसी
अनेक छोटी-छोटी बातों पर ध्यान देकर भी पर्यावरण की रक्षा की जा सकती है।
ये आपके कई अनावश्यक खर्चों में तो कमी लाएंगे साथ ही पर्यावरण के प्रति
अपनी ज़िम्मेदारी निभाने की आत्मसंतुष्टि भी देंगे।
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