टी राजा सिंह द्वारा राम मंदिर बनाने और गौरक्षा के लिए बोलने पर मीडिया में आया भूचाल..

टी राजा सिंह द्वारा राम मंदिर बनाने और गौरक्षा के लिए बोलने पर मीडिया में आया भूचाल..
हिंदुस्तानियों
को एक बात गौर करने जैसी है कि जब भी देश के हित के लिए,कोई भी #हिंदुत्व
का कार्य करने आगे बढ़ते हैं तब मीडिया उनके पीछे पड़ जाती है और उनको किसी
भी तरह गिराने का काम करती है ।
आपने
देखा होगा कि जब से #उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार आने वाली
थी तब से लेकर आज तक कुछ मीडिया और खासकर #बीबीसी न्यूज कैसी मंगढ़तन बातें
योगी जी के खिलाफ लिख रही है।
T Raja Singh – Media Hindu
क्या भारत में शान्ति लाना नही चाहती बीबीसी..? क्यों इतना घबरा गई है #हिंदुत्वनिष्ठों से ???
अगर
आप बीबीसी न्यूज को थोड़ा ध्यान देकर देखेंगे और पढ़ेंगे तो आपको पता चलेगा
कि ये पूरा #मुस्लिम समुदाय के पक्ष में है और हिंदुत्वनिष्ठों के खिलाफ
खड़ा हैं ।
जब-जब मुस्लिम
समुदाय के कुछ असामाजिक लोगों द्वारा आतंक फैलाया गया तब तब बीबीसी न्यूज
मौन रहा पर जैसे ही देश की शांति के लिए हिंदुत्वनिष्ठ उनको जवाब देते हैं
तब वो उनके खिलाफ बोलना शुरू कर देता है ।
भारत
में अल्पसंख्यक #मुस्लिमों की चिंता करने वाले बीबीसी न्यूज ने पाकिस्तान
और बंग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहा अत्याचार पर क्यों चुप्पी साध ली है !!
जिस भारत ने विश्व को शांति और भाईचारे का पाठ पढ़ाया, वहां #अशान्ति का वातावरण बनाने में मीडिया का बड़ा हाथ है ।
क्यों योगी जी सत्ता पर आते ही मीडिया की आँख की किकरी बन गए ?
तेलंगाना,
भारतीय जनता पार्टी विधायक टी राजा सिंह ने भी (भारत लुटेरे #बाबर ने
रामजी का मंदिर तोड़कर मस्जिद बनवाया था ) जब फिर से #राम मंदिर बनाने के
लिए आवाज उठायी तो मीडिया को परेशानी क्यों हुई ?
टी.
राजा सिंह ने #बीबीसी न्यूज के सवांदाता को करारा जवाब देते हुए कहा कि,
“राम मंदिर बनाना हर हिंदू का संकल्प है और मेरा भी संकल्प है । #हिंदू हो
या मुस्लिम सिख हो या ईसाई अगर कोई भी राम मंदिर के बीच में आता है तो हम
हमारे #प्राण दे भी सकते हैं और हम अगले के प्राण ले भी सकते हैं” ।
उन्होंने
आगे कहा कि “अगर कोई बात से नहीं मानता है तो हम हर प्रकार से तैयार हैं ।
बस हमारा लक्ष्य #अयोध्या में राम मंदिर बनाना है । उसके लिए हम हर तरह से
तैयार हैं । “विधायक से पहले मैं एक #हिंदू हूँ । मैं अपना कर्तव्य निभा
रहा हूँ ।”
टी राजा सिंह ने 1999 में #श्रीराम युवा सेना व गोरक्षा दल का निर्माण किया और तभी से गौहत्या का विरोध शुरु किया ।
गोरक्षा
के मुद्दे पर टी राजा $सिंह राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रमुख मोहन
भागवत के हॉल में कहते हैं कि “मैं मोहन #भागवत के उस बयान का समर्थन करता
हूँ कि जो गोरक्षा के लिए है।
वो किसी के ऊपर हमला न
करें । लेकिन जब हम गोरक्षा को जाते हैं । #ट्रक पकड़ते हैं, तब अगर उनकी
ओर से हमला होता है तो सेल्फ डिफेंस तो करना होगा । नहीं तो हम मारे जाएंगे
।”
गाय का महत्व अगर कोई
व्यक्ति जान लेता है तो गाय की हत्या पर वो आपा खो बैठता है । उन्होंने कहा
कि,” #गाय से बढ़कर हमारे लिए कुछ नहीं है”
#गौमाता को चराने स्वयं भगवान श्री कृष्ण जाते थे उनको बचाने के लिए अगर गौ रक्षक कुछ भी करें तो कोई गलत नही हो सकता ।
अब तो उत्तरप्रदेश में शिया समुदाय के मुस्लिमों ने गोहत्या रोकने के लिए  ‘शिया गो-रक्षा दल’ भी बना लिया है ।
गुजरात
के #मुख्यमंत्री विजय रूपानी ने भी कहा है कि “गाय हमारी मां है और यह
हमारे लिए विश्वास की बात है, हमारी सरकार को ऐसे लोगों से कोई सहानुभूति
नहीं है जिनको गायों के प्रति कोई दया नहीं है।”
विजय
रूपानी ने आगे कहा कि राज्य सरकार ने गाय और उसकी संतान को मारने से रोकने
के लिए सख्त कानून बनाए हैं। गाय में प्रजनन के माध्यम से #गांवों में
कमाई का एक तरीका भी है। हम चाहते हैं कि गुजरात में एक बार फिर घी और दूध
की नदियों बहें।
गौमाता हमारे लिए कितनी उपयोगी है जानने के लिए नीचे दी गई लिंक पर क्लिक करें ।
गाय
आर्थिक रूप से तो समृद्धि देने वाली है ही साथ-साथ में गाय का होना भी
वातावरण में शुद्धि लाता है एवं गाय माता का #दूध, #दही, #छाछ, #मक्खन,
#घी, #मूत्र एवं #गोबर मनुष्य के लिए वरदानस्वरूप है इसके उपयोग से मनुष्य
स्वस्थ्य और सुखी जीवन जी सकता है ।
अतः गौ माता की रक्षा करना हितकारी है और गौ हत्या करना विनाश का संकेत है।

भगवान महावीर स्वामी जी का दिव्य जीवन चरित्र

भगवान महावीर स्वामी जी का दिव्य जीवन चरित्र
जयंती 9 अप्रैल 2017

 

Azaad Bharat – Mahavir Jayanti
महावीर स्वामी का जन्म करीब ढाई हजार साल पहले हुआ था । ईसा से 599 वर्ष पहले वैशाली गणतंत्र के क्षत्रिय कुण्डलपुर में पिता सिद्धार्थ और माता त्रिशला के यहाँ चैत्र शुक्ल तेरस को वर्धमान का जन्म हुआ । यही #वर्धमान बाद में इस काल के अंतिम #तीर्थंकर #महावीर_स्वामी बने ।

 

जैन ग्रंथों के अनुसार, 23वें #तीर्थंकर #पार्श्वनाथ जी के निर्वाण (मोक्ष) प्राप्त हो जाने के 278 वर्ष बाद इनका जन्म हुआ था । महावीर को ‘वीर’, ‘#अतिवीर’ और ‘#सन्मति’ भी कहा जाता है।

 

तीर्थंकर महावीर स्वामी #अहिंसा के #मूर्तिमान प्रतीक थे । उनका #जीवन #त्याग और #तपस्या से ओतप्रोत था । उन्होंने एक #लंगोटी तक का परिग्रह नहीं रखा । हिंसा, पशुबलि, जात-पात का भेद-भाव जिस युग में बढ़ गया, उसी युग में भगवान महावीर का जन्म हुआ । उन्होंने दुनिया को #सत्य, अहिंसा का पाठ पढ़ाया ।

 

महावीर जी ने अपने उपदेशों और प्रवचनों के माध्यम से दुनिया को सही राह दिखाकर मार्गदर्शन किया ।

 

भगवान महावीर, #ऋषभदेव से प्रारंभ हुई वर्तमान चौबीसी के अंतिम तीर्थंकर थे।
प्रभु महावीर प्रारंभिक तीस वर्ष राजसी वैभव एवं विलास के दलदल में ‘कमल’ के समान रहे ।

 

मध्य के बारह वर्ष घनघोर जंगल में मंगल साधना और आत्म जागृति की आराधना की जिसमें दुष्टों ने इन्हें कई यातनाएं दी । कान में खीले ठोके फिर भी महावीर #साधना में लगे रहे । बाद के तीस वर्ष उन्होंने न केवल जैन जगत या मानव समुदाय के लिए अपितु प्राणी मात्र के कल्याण एवं मुक्ति मार्ग की प्रशस्ति में व्यतीत किये ।

 

जनकल्याण हेतु उन्होंने चार तीर्थों #साधु-साध्वी-श्रावक-श्राविका की रचना की। इन सर्वोदयी तीर्थों में क्षेत्र, काल, समय या जाति की सीमाएँ नहीं थी । भगवान महावीर का आत्मधर्म जगत की प्रत्येक आत्मा के लिए समान था। दुनिया की सभी आत्मा एक-सी हैं इसलिए हम दूसरों के प्रति वही विचार एवं व्यवहार रखें जो हमें स्वयं के लिए पसंद हो। यही महावीर का ‘#जियो और जीने दो’ का सिद्धांत है।

 

इतने वर्षों के बाद आज भी भगवान महावीर का नाम स्मरण बड़ी #श्रद्धा और #भक्ति से लिया जाता है, इसका मूल कारण यह है कि महावीर जी ने इस जगत को न केवल #मुक्ति का संदेश दिया, अपितु मुक्ति की सरल और सच्ची राह भी बताई। भगवान महावीर ने #आत्मिक और शाश्वत सुख की प्राप्ति हेतु पाँच सिद्धांत हमें बताए : सत्य, अहिंसा, अपरिग्रह, अचौर्य और ब्रह्मचर्य।

 

वर्तमान में अशांत, आतंकी, भ्रष्ट और हिंसक वातावरण में महावीर जी की अहिंसा ही शांति प्रदान कर सकती है । महावीर जी की अहिंसा केवल सीधे वध को ही हिंसा नहीं मानती है, अपितु मन में किसी के प्रति बुरा विचार भी हिंसा है । जब मानव का मन ही साफ नहीं होगा तो अहिंसा को स्थान ही कहाँ…???

 

वर्तमान युग में प्रचलित नारा ‘समाजवाद’ तब तक सार्थक नहीं होगा जब तक आर्थिक विषमता रहेगी । एक ओर अथाह पैसा, दूसरी ओर अभाव ।

 

इस असमानता की खाई को केवल भगवान महावीर का ‘अपरिग्रह’ का सिद्धांत ही भर सकता है । अपरिग्रह का सिद्धांत कम साधनों में अधिक संतुष्टि पर बल देता है । यह आवश्यकता से ज्यादा रखने की सहमति नहीं देता है । इसलिए सबको मिलेगा और भरपूर मिलेगा ।

 

जब अचौर्य की भावना का प्रचार-प्रसार और पालन होगा तो चोरी, लूटमार का भय ही नहीं होगा । सारे जगत में मानसिक और आर्थिक शांति स्थापित होगी । चरित्र और संस्कार के अभाव में सरल, सादगीपूर्ण एवं गरिमामय जीवन जीना दूभर होगा। भगवान महावीर ने हमें अमृत कलश ही नहीं, उसके रसपान का मार्ग भी बताया है ।

 

सत्य के बारे में भगवान महावीर स्वामी कहते हैं…

 

हे पुरुष ! तू सत्य को ही सच्चा तत्व समझ । जो #बुद्धिमान सत्य की ही आज्ञा में रहता है, वह मृत्यु को तैरकर पार कर जाता है।

 

अहिंसा – इस लोक में जितने भी त्रस जीव (एक, दो, तीन, चार और पाँच इंद्रिय वाले जीव) आदि है उनकी हिंसा मत करों , उनको उनके पथ पर जाने से न रोको । उनके प्रति अपने मन में दया का भाव रखो । उनकी रक्षा करो । यही अहिंसा का संदेश भगवान महावीर अपने उपदेशों से हमें देते हैं ।

 

अपरिग्रह – परिग्रह पर भगवान महावीर कहते हैं जो आदमी खुद सजीव या निर्जीव चीजों का संग्रह करता है, दूसरों से ऐसा संग्रह कराता है या दूसरों को ऐसा संग्रह करने की सम्मति देता है, उसको दुःखों से कभी छुटकारा नहीं मिल सका । यही संदेश अपरिग्रह के माध्यम से भगवान महावीर दुनिया को देना चाहते हैं ।

 

ब्रह्मचर्य – महावीर स्वामी ब्रह्मचर्य के बारे में अपने बहुत ही अमूल्य उपदेश देते हैं कि ब्रह्मचर्य उत्तम तपस्या, नियम, ज्ञान, दर्शन, चरित्र, संयम और विनय की जड़ है । तपस्या में #ब्रह्मचर्य श्रेष्ठ तपस्या है । जो पुरुष स्त्रियों से संबंध नहीं रखते, वे मोक्ष मार्ग की ओर बढ़ते हैं ।

 

क्षमा – क्षमा के बारे में भगवान महावीर कहते हैं- ‘मैं सब जीवों से क्षमा चाहता हूँ । जगत के सभी जीवों के प्रति मेरा मैत्रीभाव है । मेरा किसी से वैर नहीं है । मैं सच्चे हृदय से धर्म में स्थिर हुआ हूँ । सब जीवों से मैं सारे अपराधों की क्षमा माँगता हूँ । सब जीवों ने मेरे प्रति जो अपराध किए हैं, उन्हें मैं क्षमा करता हूँ ।’

 

वे यह भी कहते हैं ‘मैंने अपने मन में जिन-जिन पाप की वृत्तियों का संकल्प किया हो, वचन से जो-जो पाप वृत्तियाँ प्रकट की हों और शरीर से जो-जो पापवृत्तियाँ की हों, मेरी वे सभी पापवृत्तियाँ विफल हों
। मेरे वे सारे पाप मिथ्या हों।’

 

धर्म – #धर्म सबसे उत्तम मंगल है । अहिंसा, संयम और तप ही धर्म है । महावीरजी कहते हैं जो धर्मात्मा है, जिसके मन में सदा धर्म रहता है, उसे देवता भी नमस्कार करते हैं ।

 

भगवान महावीर ने अपने प्रवचनों में धर्म, सत्य, अहिंसा, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह, क्षमा पर सबसे अधिक जोर दिया । त्याग और संयम, प्रेम और करुणा, शील और सदाचार ही उनके प्रवचनों का सार था । भगवान महावीर ने चतुर्विध संघ की स्थापना की । देश के भिन्न-भिन्न भागों में घूमकर भगवान महावीर ने अपना पवित्र संदेश फैलाया ।

 

जैसे हर संत के जीवन में देखा जाता है, वैसे महावीर स्वामी के समय भी जहाँ उनसे लाभान्वित होनेवाले लोग थे, वहीं समाजकंटक निंदक भी थे ।

 

उनमें से पुरंदर नाम का निंदक बड़े ही क्रूर स्वभाव का था । वह तो महावीरजी के मानो पीछे ही पड़ गया था । उसने कई बार महावीर स्वामी को सताया, उनका अपमान किया पर संत ने उसे माफ कर दिया । एक दिन महावीर स्वामी पेड़ के नीचे ध्यानस्थ बैठे थे । तभी घूमते हुए पुरंदर भी वहाँ पहुँच गया । वह महावीरजी को ध्यानस्थ देख आग-बबूला होकर बड़बड़ाने लगा : ‘‘अभी इनका ढोंग उतारता हूँ ।

 

अभी मजा चखाता हूँ…’’ और आवेश में आकर उसने एक लकड़ी ली और उनके कान में खोंप दी । कान से रक्त की धार बह चली लेकिन महावीरजी के चेहरे पर पीड़ा का कोई चिह्न न देखकर वह और चिढ़ गया, और कष्ट देने लगा । इतना सब होने पर भी महावीरजी किसी प्रकार की कोई पीड़ा को व्यक्त किये बिना शांत ही बैठे रहे । परंतु कुछ समय बाद अचानक उनका ध्यान टूटा, उन्होंने आँख खोलकर देखा तो सामने पुरंदर खड़ा है । उनकी आँखों से आँसू झरने लगे । पुरंदर ने पूछा : ‘‘क्या पीड़ा के कारण रो रहे हो ?’’
महावीर स्वामी : ‘‘नहीं, शरीर की पीड़ा के कारण नहीं ।’’

 

पुरंदर : ‘‘तो किस कारण रो रहे हो ?’’
‘‘मेरे मन में यह व्यथा हो रही है कि मैं निर्दोष हूँ फिर भी तुमने मुझे सताया है तो तुम्हें कितना कष्ट सहना पड़ेगा ! कैसी भयंकर पीड़ा सहनी पड़ेगी ! तुम्हारी उस पीड़ा की कल्पना करके मुझे दुःख हो रहा है ।’’
यह सुन पुरंदर मूक हो गया और पीड़ा की कल्पना से सिहर उठा ।

 

पुरंदर की नाईं गौशालक नामक एक कृतघ्न गद्दार ने भी महावीर स्वामी को बहुत सताया था । महावीरजी के 500 शिष्यों को उनके खिलाफ खड़ा करने का उसका षड्यंत्र भी सफल हो गया था । उस दुष्ट ने महावीर स्वामीजी को जान से मारने तक का प्रयत्न किया लेकिन जो जैसा बोता है उसे वैसा ही मिलता है । धोखेबाज लोगों की जो गति होती है, गौशालक का भी वही हाल हुआ ।

 

गौशालक के साथ पाँच सौ निंदक मिल गये  । वे कौन-से नरक में सड़ते होंगे पता नहीं है लेकिन महावीर को तो लाखों-करोड़ो लोग आज भी मानते हैं  ।

 

भगवान महावीर ने ईसापूर्व 527, 72 वर्ष की आयु में बिहार के पावापुरी (राजगीर) में कार्तिक कृष्ण अमावस्या को निर्वाण (मोक्ष) प्राप्त किया ।

 

समाज का दुर्भाग्य रहा है कि जब महापुरुष हयात होते हैं तब उन पर आरोप – प्रत्यारोप लगाते हैं ।उनका आदर नही करते,उनके जाने के बाद अनेकों मंदिर बनवाकर उनकी पूजा करते हैं ।

 

संत निंदको व कुप्रचारको ! अब भी समय है, कर्म करने में सावधान हो जाओ । अन्यथा जब प्रकृति तुम्हारे कुकर्मों की तुम्हें सजा देगी उस समय तुम्हारी वेदना पर रोनेवाला भी कोई न मिलेगा ।

क्या आपको पता है कौन है जाकिर नाईक..???

🚩क्या आपको पता है कौन है #जाकिर नाईक..???
💥कैसे बना #मुस्लिम युवाओं का चहेता..???
💥देखिये वीडियो👇🏻
🖥https://youtu.be/FOT1sxC_a5o
💥#बांग्लादेश की #राजधानी ढाका #आतंकी हमले में आतंकवादी रोहन इम्तियान जाकिर नाईक का फॉलोवर था।
💥इसलिए मुस्लिम #धर्मगुरु डॉ. जाकिर नाईक विवादों में है। इस्लाम के अलावा अन्य धर्मों की आलोचना नाईक की फितरत है।
💥वह अपने भाषण में #हिंदू देवी-देवताओं को अपमानित कर मुस्लिम युवाओं का दिमाग बदलता है। गीता के श्लोक की गलत व्याख्या कर हिंदुओं को विरोधी बनाता है।
💥#मुस्लिम युवाओं का चहेता बना डॉ जाकिर नाईक कभी दक्षिण मुंबई के भिंडी बाजार की गलियों में एक छोटे से कबाड़खाने जैसे घर में रहता था।
जाकिर नाईक – Zakir Naik – jago hindustani
💥 लेकिन कट्टरवादी सोच के साथ इस्लाम का प्रचार कर उसने इतनी दौलत और शोहरत कमा ली है कि आज वह मुंबई के बेहद पॉश इलाके नेपियंसी रोड़ पर #आलीशान कोठी में रहता है।
💥#डॉ. नाईक पीस टीवी नामक एक #इस्लामी #चैनल का संस्थापक है जिसका अनेक देशों में प्रसारण होता है। 18 अक्तूबर 1965 में जन्मा जाकिर को बचपन में ही कुरान की आयतें कंठस्थ हो गई थी। उसके बाद उसने मेडिकल की पढ़ाई की।
💥अपने पिता #अब्दुल करीम नाईक की मदद से डोंगरी में एक #इस्लामिक #स्कूल की नींव रखी। डॉ. जाकिर के पिता का #महाराष्ट्र के बड़े नेता शरद पवार और पूर्व #मुख्यमंत्री दिवंगत अब्दुल रहमान अंतुले से जान पहचान थी।
💥इसके बल पर जाकिर का इस्लामिक स्कूल चल निकला। उसके बाद उसने कई मदरसे खोले। साल 1991 में इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन की स्थापना कर वह मदरसों में मुस्लिम युवाओं को कट्टरता की ट्रेनिंग देने लगा। इसके वह संस्थापक और अध्यक्ष हैं और उनकी पत्नी #फरहत नाईक फाउंडेशन में #महिलाओं के लिए काम करती हैं।
💥मुंबई के जिस इलाके में उनका फाउंडेशन चलता है वह इलाका #अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम का माना है। यह इलाका डोंगरी के नाम से जाना जाता है।
💥 दक्षिण-मध्य मुंबई के डोंगरी में दाऊद के अलावा हाजी मस्तान, करीम लाला, छोटा शकील, अरुण गवली और रमा नाईक जैसे अंडरवर्ल्ड डॉनों का भी इलाका रहा है।

💥जाकिर अपने इस फाउंडेशन के जरिए जहां इस्लामिक #धर्म का प्रचार करता है, वहीं उसके इस #फाउंडेशन के लिए #दुनियाभर से डोनेशन भी आते हैं।

💥 डोनेशन की राशि फाउंडेशन के नाम से डेवलपमेंट क्रेडिट #बैंक में खुले खाते में जमा होती है। यह फाउंडेशन मुस्लिम छात्रों को स्कॉलरशिप देता है और नौकरियां भी दिलाता है। जाकिर इस्लाम पर भाषण देने के साथ कुरान की प्रतियाँ
भी बांटता हैं।
💥जाकिर से ढाका के आतंकी हमले के दो आतंकी ही प्रभावित नहीं हैं बल्कि मुंबई के मालवणी के रहने वाले #आईएस मॉड्यूल अयाज सुल्तान और हैदराबाद के आईएस प्रमुख इब्राहिम यजदानी भी जाकिर से प्रभावित हैं। इनके अलावा मुंबई लोकल बम धमाके का आरोपी राहिल शेख भी जाकिर से प्रभावित था। इब्राहिम ने तो जांच एजेंसी एनआईए को पूछताछ में खुलासा किया कि वह वर्ष 2010 में जाकिर के 10 दिनों के कैंप में बतौर कार्यकर्ता काम किया था।
💥जाकिर कुछ ही दिनों में खुद को इस्लाम का स्कॉलर कहलवाने लगा। इस तरह जाकिर का मजहबी दायरा बढ़ता गया। वह बीते 20 सालों में 30 से ज्यादा देशों में दो हजार से अधिक व्याख्यान दे चुका है।
💥उर्दू के वरिष्ठ पत्रकार #अजीज #एजाज बताते है कि इस्लामिक व्याख्यान देने वाले जाकिर के पास #सऊदी अरब, बहरीन आदि इस्लामिक देशों से बड़ी रकम पहुंचने लगी। उसके बाद उसने इस्लामिक धर्मगुरु के रूप में खुद को स्थापित कर लिया।
💥जाकिर नायक पहली बार विवादों में तब आया था जब उसने ओसामा बिन लादेन को आतंकी कहने से इंकार कर दिया था।जाकिर ने कहा था कि अगर लादेन इस्लाम के विरोधियों से लड़ रहा था तो हम उसके साथ है।
💥 जाकिर ने सभी मुसलमानों को आतंकवादी बनने की नसीहत दी थी। जाकिर नायक ने 2010 में मुंबई में एक #प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा था कि मैं सारे मुस्लिमों से कहता हूँ कि हर मुसलमान को #आतंकी होना चाहिए।
💥पीस #टीवी पर अपने धार्मिक कार्यक्रमों की वजह से जाकिर #बांग्लादेश में भी काफी लोकप्रिय है।
💥नाइक पर दूसरे धर्मों के खिलाफ नफरत फैलाने का आरोप है । कई देश की सरकारों ने जाकिर नाईक के प्रवेश पर रोक लगा रखी है। #ब्रिटेन, #कनाडा लन्दन, और मुस्लिम बहुल देश #मलेशिया में भी बैन किया गया है ।
💥अगर ढाका में जाकिर नाईक के खिलाफ  #मुकदमा दर्ज होता है तो #भारतीय #एजेंसियां उसकी गिरफ्तारी करेगी ।
💥भारत में जाकिर जैसे लोगो को रोकने के लिए जल्द ही कानून बन सकता है।
💥 मौजूदा भारत के कानून की वजह से जाकिर जैसे लोग, जो अपने #भाषण से #आतंकियों को प्रेरित करते हैं , उनपर  बैन लगाने का कोई कानून नहीं है।
💥जो #हिन्दू #देवी-देवताओं का अपमान करता रहता है । #श्रीमद्द भगवतगीता को गलत बोलता है और मुस्लिमो को आतंकवादी बनने की प्रेरणा देता है । ऐसे जाकिर नाइक को जेल भेज देना चाहिए जिससे दुनिया में सुख शाँति बनी रहे ।
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एक बार फिर अन्याय निर्दोष संतो के साथ

🚩एक बार फिर अन्याय #निर्दोष #संतो के साथ…!!!
💥#क्लीनचिट के बावजूद भी साध्वी #प्रज्ञा ठाकुर को नहीं मिली जमानत ।
💥2008 के #मालेगांव ब्लास्ट  केस में साध्वी प्रज्ञा सिंह के वकीलों ने मकोका #कोर्ट में 30 मई को जमानत याचिका दायर की थी । जमानत याचिका पर आज(28/6/2016) सुनवाई थी ।
💥 #स्पेशल मकोका कोर्ट ने नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (#एनआईए) से क्लीन चिट मिलने के बावजूद भी उन्हें जमानत देने से इन्कार कर दिया । साध्वी प्रज्ञा जी का परिवार अब हाई कोर्ट में अपील करेंगा ।
💥साध्वी प्रज्ञा के वकीलों ने इससे पहले भी कोर्ट में दो बार जमानत याचिका दायर की थी, लेकिन दोनों बार जमानत याचिका खारिज हो गई । ये तीसरी बार है कि उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी गई ।
💥साध्वी प्रज्ञा जी मालेगांव ब्लास्ट के मामले में पिछले आठ सालों से जेल में हैं । साध्वी जी ने पहले इस मामले की जांच करने वाली एजेंसी #एटीएस पर शोषण का भी आरोप लगाया था ।
💥एटीएस ने इस मामले में दो #चार्जशीट दाख‍िल की थी । एटीएस ने साध्वी जी को ब्लास्ट की साजिश रचने का आरोपी बनाया था।  हालांकि वो इस आरोप से इन्कार कर चुकी हैं और इनको #NIA ने भी क्लीन चिट दे दी है ।
💥साध्वी जी कैंसर से पीड़ित है फिर भी आठ साल से उन्हें बिना सबूत जेल में रखा गया है । साध्वी जी को #ATS वालों ने अश्लीलता वाली वीडियो दिखाई थी, मारपीट की थी और कोई सबूत नही होने के बावजूद भी अमानवीय अत्याचार किया था ।
💥क्या हो रहा है इस देश में…???
💥क्या ऐसा किसी #ईसाई पादरी या मौलवी के साथ कर सकते है..???
💥क्या ये #हिन्दू #साध्वी है इसलिए उन पर इतना अत्याचार किया जा रहा है…???
💥हमारे देश में जब #आतंकवादी पकड़ा जाता है,तो उसके पीछे दिन के लाखों रुपये खर्च करके सुविधा उपलब्ध कराई जाती है । लेकिन बिना सबूत निर्दोष संतों को जेल में रखकर अति कष्टकारी पीड़ा दी जा रही है ।
💥आखिर क्यों..???
💥भारत देश में आरोप सिद्ध होने के बावजूद भी आतंकवादियों को जमानत, #पत्रकारों को जमानत,अभिनेताओं को जमानत, नेताओं को जमानत पर हिन्दू निर्दोष संतो को नही…!!!
💥वाह रे कानून व्यवस्था…!!!
वाह रे भाजपा सरकार…!!!
💥देश में #सत्ता परिवर्तन तो हुआ, पर #आधुनिकतावादियों के
दबाव में #हिन्दुत्वनिष्ठों का किया जा रहा शोषण कब रुकेगा ?
💥हमारे महान भारत देश में , जिसकी गरिमा हमारे संतो से रही है वहाँ हमारे संतो को चाहे वो साध्वी #प्रज्ञा ठाकुर हो या संत #आसारामजी बापू या स्वामी #असीमानन्द जी हो या #नारायण प्रेम साईं जी ।
💥इनको जमानत नही मिल सकती ।
💥क्यों..???
💥क्योंकि इन्होंने देश को #विश्वगुरु के पद तक ले जाने का संकल्प लिया है ।
💥क्योंकि इन्होंने #सनातन #संस्कृति के प्रचार के लिए #ईसाई #धर्मान्तरण पर रोक लगाई है ।
💥क्योंकि इन्होंने #विदेशी #कम्पनियों का बहिष्कार करवाया और लाखों लोगों को व्यसन मुक्त करवाया । करोड़ो लोगो को सन्मार्ग दिखाया ।
💥और सनातन संस्कृति का परचम विश्व में लहराया ।
💥और सबसे बड़ी बात कि ये हिन्दू संत है ।
💥इतने बड़े बड़े अपराध करने के बाद कैसे इन #निर्दोष संतो को जमानत दी जा सकती है…!!!
💥आज अगर हिन्दू न जगा तो वो दिन दूर नही जब सनातन संस्कृति की जगह #ईसाईयत का जयकारा लग रहा होंगा ।
💥आज हिंदुओं को कन्धे से कन्धा मिलाकर हमारे निर्दोष संतो के साथ हो रहे अन्याय के खिलाफ अपनी आवाज बुलन्द करनी ही होंगी ।
💥नही तो एक के बाद एक की बारी..!!!
🙏🏻जय हिन्द!!!
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श्रीमति सुनन्दा तंवर का आज़ तक को एक खुला पत्र

🚩#’इंडिया टूडे’(आजतक) के नाम #लंदन की एक महिला #श्रीमति सुनन्दा तंवर का एक खुला पत्र
पत्र की लिखित पोस्ट
प्रिय इंडिया टूड
💥मैं ‘इंडिया टूडे’ में संत श्री #आशाराम जी बापू के विषय में प्रकाशित एक लेख को पढ़ कर तुम्हें यह पत्र लिख रही हूँ।
💥यह लेख अत्यंत गरीब व आदिवासियों के हित में काम कर रही उनकी संस्था व #आश्रम को बदनाम करने के उद्देश्य से लिखा गया झूठ का एक पुलिन्दा मात्र है।
💥आपके सीनियर व खोजी(?) पत्रकार ने लिखा है कि #संत श्री आशाराम जी बापू के आश्रम को प्रतिवर्ष 150 से 200 करोड़ रुपये चन्दे के रूप में प्राप्त होते हैं।
💥इस पर मुझे कहना है कि संत श्री आशाराम जी बापू आम आदमी के संत हैं।
💥तथा वे  #सत्संग अथवा #शिविर के लिए कोई फीस भी चार्ज नहीं करते हैं।
और
💥यदि कभी आपको पूज्य #बापू जी का सत्संग अथवा उनकी कोई #सी.डी.सुनने का सौभाग्य प्राप्त हो जाये तो आपको जानकारी मिलेगी कि बापू जी ना तो दीक्षा देते हुए कोई नकद दक्षिणा अथवा कोई वस्तु स्वीकार करते हैं और ना ही गुरु #पूर्णिमा अथवा अन्य किसी पर्व पर भी।
💥आश्चर्य का विषय है कि आपका खोजी व सीनियर पत्रकार तो आश्रम द्वारा आयोजित भंडारों एवं अन्य सद्प्रवृतियों द्वारा भी धन एकत्रित करने का आरोप लगा रहा है।
💥मैं आपको बता दूँ कि आश्रम द्वारा संचालित भण्डारे केवल गरीबों, #बनवासियों तथा #आदिवासियों में विराजमान ‘दरिद्र #नारायण’ की सेवा के लिए आयोजित किये जाते हैं ना की चंदा एकत्र करने के लिये।
💥कितने आश्चर्य की बात है कि आपका बिजनेस ग्रुप-आजतक समाचार #चैनल, #म्यूजिक टूडे चैनल, बिजनेस टूडे चैनल अथवा अन्य कई #विदेशी ब्रांड्स के साथ बिजनेस कर आपके लिए धनवर्षा कर रहा है।
💥किन्तु फिर भी जैसी कि एक कहावत है कि पैसे से कभी मनुष्यता नहीं खरीदी जा सकती, आपका केस भी मुझे वही लगता है।
💥आपने तो मनुष्यता के अत्यंत नीचे स्तर पर उतरकर वेटिकन व ईसाई मिशनरियों द्वारा प्रयोजित यह लेख केवल उनकी प्रसन्नता प्राप्त करने के लिए छापा गया लगता है।
और ऐसा पहली बार भी नहीं है, जब आप देश के एक महान हिंदू संत श्री आशाराम जी बापू के विरुद्ध पहली बार ऐसा काम कर रहे हैं।
💥सितम्बर #2010 में भी आपके समाचार चैनल ‘आजतक’ ने एक स्टिंग ऑपरेशन में दिखाया था कि संत श्री आशाराम जी बापू अपने आश्रम में एक अपराधी महिला को रखने के लिए राजी हो गये हैं।
💥मैंने जब इस विषय में कुछ खोज की तो पता चला कि आपके चैनल के ही कुछ व्यक्ति एक महिला को लेकर बापू जी के पास हरिद्वार पहुँचे थे तथा कहा था कि इस महिला की जान को खतरा है, अत: कृपया एक दो दिन इसको अपने आश्रम में शरण दे दें।
💥यह पूरा #षड्यंत्र आपके चैनल की टीम ने बनाया था तथा जो स्टिंग वो दिखा रहे थे, वह भी काफी जोड़-तोड़ करके बनाया गया स्टिंग था।
💥मैंने जब आपके चैनल के अधिकारियों को बिना एडिट किया हुआ पूरा स्टिंग दिखाने के लिए फोन किया तो उन्होंने अत्यंत निर्लज्जता से उत्तर दिया था कि आप अदालत में जा सकती हैं।
💥वेटिकन की ईसाई #मिशनरियों का उद्देश्य #भारत का #‘ईसाईकरण’ है इसीलिए भारतीय #संस्कृति व सनातन धर्म का झंडा बुलंद करने वाले संत श्री आशाराम जी बापू तो उनके जन्मजात दुश्मन बने हुए हैं।
💥अत: उन्हें हटाने के लिए ही वो भारत के ‘देशद्रोही व निर्लज्ज’ #मीडिया को अपनी अकूत दौलत के बल पर आज #‘जयचंद’ बना रहे हैं।
💥#‘इंडिया टूडे’ ग्रुप एक अत्यंत धनी व पैसे वाला बिजनेस ग्रुप है किन्तु जब भी भारतीय संस्कृति व हिंदू धर्म का इतिहास लिखा जाएगा तो आपका नाम भी आज के ऐसे ‘जयचंदों’ की सूची में शामिल होगा जिन्होंने पैसे की लिप्सा के लिए अपनी आत्मा व धर्म दोनों को ही धर्म के सौदागरों के हाथ नीलाम कर दिया था।
💥धन्यवाद सहित
💥भवदीय, सुनंदा तंवर 16, पालम कोर्ट, लन्दन, यू.के.
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आधुनिकतावादियों के दबाव में हिन्दुत्वनिष्ठों का हो रहा शोषण कब रुकेगा ?

🚩#देश में सत्ता परिवर्तन तो हुआ, पर आधुनिकतावादियों के
दबाव में हिन्दुत्वनिष्ठों का किया जा रहा शोषण कब रुकेगा ?
💥#हिन्दू #धर्म का कार्य करने वाली #सनातन संस्था को अभी भी बनाया जा रहा है बली का बकरा…!!!
💥#डॉ. दाभोलकर हत्या प्रकरण में निष्पाप
💥#डॉ. विरेंद्रसिंह तावडे को बन्दी बनाकर
💥सनातन #संस्था को पुन: बनाया जा रहा है बली का बकरा…!!!
💥मालेगांव बम-विस्फोट प्रकरण में साध्वी प्रज्ञा जी को बंदी बनाने के 8 वर्ष उपरांत उनके विरुद्ध प्रमाण नहीं है ऐसा जांच संस्थाआें ने बताया ।
💥मडगांव बम-विस्फोट प्रकरण में सनातन संस्था के साधकों को 4 वर्ष उपरांत निर्दोष मुक्त किया गया।
💥 पानसरे हत्या प्रकरण में समीर गायकवाड को बंदी बनाए 8 महीनें हो गए, पर अभी तक एक भी प्रमाण जांच संस्थाआें के पास नहीं है, इसलिए आरोपपत्र प्रविष्ट करने में जानबूझकर टालमटोल की जा रही है ।ऐसे में डॉ. वीरेंद्रसिंह तावडे को बंदी बनाया गया है।
💥इसके माध्यम से पुनः एक बार #हिन्दुत्व का कार्य करनेवाली सनातन संस्था को सॉफ्ट टार्गेट समझकर बली का बकरा बनाना, भाजपा के #शासनकाल में भी जारी है ।
💥 कुल मिलाकर #केंद्र और #राज्य में सत्ता परिवर्तन तो हो गया, पर #हिन्दुत्वनिष्ठों का शोषण नहीं रुका, यही इससे स्पष्ट होता है ।
💥इस कारण देश के अनेक हिन्दुत्वनिष्ठ #संगठनों ने सरकार की इस नीति के विषय में रोष व्यक्त किया है ।
💥कुछ दिन पूर्व सनातन के पुणे के 15 साधकों से पूछताछ की गई, उनमें से 2 लोगों के पॉलीग्राफिक टेस्ट की मांग सीबीआई ने की । उसे मान्य कर सनातन संस्था ने इस प्रकरण में पूरा सहयोग किया । इस टेस्ट का आगे क्या हुआ, यह कहीं भी पता नहीं है ।
💥सितंबर 2015 में ही दाभोलकर हत्या प्रकरण में जांच करनेवाले सीबीआई के अधिकारी नंदकुमार नायर के विरुद्ध सनातन संस्था ने पत्रकार #परिषद लेकर उच्च न्यायालय द्वारा गंभीर आपत्तियां जताए गए अधिकारी की इस प्रकरण में नियुक्ति हुई है ।
💥इसलिए वे यहां भी #सनातन संस्था को फंसाएंगे, ऐसा आरोप लगाया था । वह आज सत्य सिद्ध हो गया ।
💥 कुछ दिन पूर्व देर रात को डॉ. तावडे को बंदी बनाकर सनातन को फंसाने के लिए #सीबीआई एक पग आगे बढ़ी। डॉ. तावडे निर्दोष हैं और सनातन के पनवेल स्थित आश्रम में साधना करने के लिए आते थे ।
💥 2007 के पहले वे हिन्दू जनजागृति समिति में कार्यरत थे । कुछ पारिवारिक कारणों से वे घर पर रहकर साधना कर रहे थे ।  फिर से कलबुर्गी हत्या प्रकरण में भी सनातन के कुछ और निर्दोष साधकों को फंसाकर बंदी बनाने का प्रयास निश्‍चित रूप से किया जाएगा, इसमें कोई शंका नहीं ।
💥दाभोलकर हत्या प्रकरण की पहली गिरफ्तारी ऐसा अनुचित प्रसार..!!!
💥डॉ. #दाभोलकर की हत्या के प्रकरण में नागोरी और खंडेलवाल नामक दो गुंडों को इससे पहले बंदी बनाया गया था । साथ ही उनके पास से हत्या में उपयोग हुई पिस्तौल मिली है, ऐसा भी न्यायालय में बताया गया था ।
💥यदि ये पिस्तौल पुलिस के पास है, तो उसी पिस्तौल से अगली दो हत्याएं कैसे हो सकती है ?
💥इसमें से नागोरी ने न्यायालय में राकेश मारीया पर “अपराध कबूल करो, 25 लाख देता हूं” ऐसा दबाव डालने का खलबली मचानेवाला आरोप लगाया था ।
💥इस आरोप की भी आगे जांच नहीं हुई और दोनों जमानत पर मुक्त भी हो गए ।
💥गोवा में 19 जून 2016 को #हिन्दू विधिज्ञ परिषद के #राष्ट्रीय सचिव अधिवक्ता श्री. संजीव पुनाळेकरजी ने विधर्मियों का बुरखा फाड़ते हुए कहा कि,  ‘अंनिस के डॉ. नरेंद्र दाभोलकर के न्यास ने अनेक वर्षों से शासन को अपना आयकर प्रस्तुत नहीं किया है । अंनिस के न्सया द्वारा अवैधानिक रूप से विदेश से धन एकत्रित कर उससे चारपहिया वाहन खरीद किए थे ।
💥डॉ. दाभोलकर को अंतिम छः मास में यह निश्‍चित ज्ञात था कि उन्हें कारावास भोगना पड सकता है । यदि डॉ. दाभोलकर के वास्तविक हत्यारे मिल जाते हैं, तो ‘परिवर्तन न्यास’ के 4-5 करोड रुपये दाभोलकर परिवार को नहीं मिलेंगे ।
💥इसलिए दाभोलकर परिवार प्रभावी रूप से #हिन्दू #धर्मप्रसार करनेवाली सनातन #संस्था को लक्ष्य बनाकर वास्तविक हत्यारों को छिपा रहा है ।
💥 परिणामस्वरूप धर्म का कार्य करने से जिन्हें हानि होने वाली है, जो भ्रष्टाचार नहीं कर पाएंगे, ऐसे सबने मिलकर सनातन के विरोध में षडयंत्र रचा है ।
💥श्री. #पुनाळेकर बोले कि,
💥1.पश्‍चिम #महाराष्ट्र देवस्थान समिति के घोटाले हमने बाहर निकाले हैं ।उसका प्रतिशोध लेने के लिए सनातन के विरोध में #षड़यंत्र चल रहा है ।
💥2. सनातन के संदर्भ में अन्वेषण की संपूर्ण जानकारी प्रसार माध्यमों द्वारा प्रसारित की जा रही है; परंतु ‘सीबीआई’ वाले पत्रकार परिषद लेकर जनता के समक्ष कोई जानकारी क्यों नहीं रखते ?
💥 इससे ‘#सीबीआई’ का झूठ उजागर होता है ।
💥#गृहमंत्री #राजनाथ सिंह को अंधेरे में रखकर सीबीआई यह पूरा षड़यंत्र रच रही है, ऐसा आरोप भी पुनाळेकर ने इस समय लगाया ।
💥#जागो हिंदुओं!!!
💥एक के बाद एक हिँदुत्व का कार्य करने वालो को टारगेट किया जा रहा है । #मीडिया भी #विदेशी #फंड से चलती है इसलिए हमेंशा हिन्दू धर्म का कार्य करने के खिलाफ बोलती है अभी समय है हिन्दू जाग जाओ…!!!
एक हो जाओ…!!!
💥अधिक जानकारी के लिए देखे👇🏻
💥https://www.hindujagruti.org/hindi/news/76826.html
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श्री गुरु हरगोविंदसिंहजी जयंती : 21 जून

🚩श्री #गुरु हरगोविंदसिंहजी जयंती : 21 जून

💥संतत्व और शूरता का संगम!
💥#सिक्खों के छठवें गुरु श्री #हरगोविंदसिंहजी के बारे में भाई गुरुदासजी ने कहा है :
💥अरजन काईया पलटि कै मूरति हरिगोवद सवारी ।
दलभंजन गुर सूरमा वड जोधा बहु पर उपकारी ।।
💥संवत् 1652 में आषाढ़ कृष्ण पक्ष 6 को गाँव वडाली, जिला #अमृतसर में पंचम गुरु श्री #अर्जुनदेवजी के घर माताश्री #गंगा देवीजी की कोख से गुरु हरगोविंदसिंहजी का जन्म हुआ ।
💥मात्र 11 वर्ष की उम्र में आपको गुरुगद्दी पर विराजित किया गया । श्री गुरु अर्जुनदेवजी की शहादत के बाद पुरातन गुरु-मर्यादा के अनुसार सेली एवं माला-फकीरी के चिह्न धारण करने की जगह श्री गुरु हरगोविदसिंहजी ने दो तलवारें, एक दायें एक बायें तरफ धारण की । इसका कारण बताते हुए आपने कहा था कि….
💥“अब #भक्ति के साथ शूरवीरता का होना भी ज़रूरी है इसलिए शूरवीरता के चिह्न धारण करने की आवश्यकता है । केवल सेली तथा माला अपनाने का अब यह समय नहीं रहा।
💥उनकी ये तलवारें ‘मीरी और ‘पीरी के नाम से विख्यात हैं । कैसे होते हैं #महापुरुष ! वर्तमान समाज की उन्नति जिसमें निहित हो, उसी के अनुसार उनकी चेष्टाएँ होती हैं ।
💥#गुरु हरगोविंदसिंहजी भक्ति के साथ-साथ शूरवीरता का भी उपदेश देते थे । वे स्वयं घुड़सवारी एवं अस्त्र-शस्त्र का भी अभ्यास करते थे । इसी प्रकार अपने भक्तों से भी करवाते थे ।
💥उस वक्त #दिल्ली के तख्त पर जहाँगीर था । #जहाँगीर का दीवान चंदू अपनी बेटी की शादी हरगोविंदसिंहजी से करवाना चाहता था लेकिन अर्जुनदेवजी ने यह रिश्ता ठुकरा दिया था ।
💥अतः द्वेषवश चंदू जहाँगीर के कान भरता रहता था कि : “गुरु अर्जुनदेव का पुत्र हरगोविंदसिंह अपने पिता की शहीदी का बदला लेने के लिए जंग का सामान तथा सेना इकट्ठी कर रहा है । उसने गद्दी लगाकर बैठनेवाली अपनी पुरानी मर्यादा छोडकर अपने बैठने के लिए तख्त बना लिया है । उस तख्त पर बैठकर बादशाहों की तरह अदालत लगाता है तथा आदेश देता है ।
💥 फकीर होकर तख्त पर बैठना ? तख्त बादशाहों के लिए होते हैं, फकीरों के लिए गद्दियाँ होती हैं । वह अपने-आपको सच्चा बादशाह कहलाता है । उसको अगर अभी वश में न किया गया तो फिर वह किसी दिन भी हुजूर की बादशाही को खतरा पैदा कर सकता है ।
💥चंदू की ऐसी उकसानेवाली बातें सुनकर जहाँगीर ने हरगोविंदसिंहजी को दिल्ली बुला लिया एवं ग्वालियर के किले में कैद करवा दिया । उस समय ग्वालियर का किला मुगल बादशाहों के विरोधियों तथा राजघरानों के लिए एक बहुत प्रसिद्ध बंदीगृह बना हुआ था । जो एक बार इसमें बंद किया जाता था वह फिर मरकर ही बाहर निकलता था ।
💥इससे माता को चिंता हो गयी एवं उन्होंने साँर्इं मियाँ मीरजी के पास संदेश भिजवाया । जहाँगीर साँर्इं मियाँ मीरजी की बड़ी इज्जत करता था । अतः जब उनके द्वारा चंदू की शिकायत की असलियत का पता चला तब जहाँगीर ने हरगोविंदसिंहजी को रिहा करने का आदेश दे दिया ।
💥किन्तु हरगोविंदसिंहजी अकेले रिहा कैसे होते ?
💥उस वक्त उस किले में 52 #राजपूत राजा एवं राजघराने के लोग भी कैद थे, जो खुसरो की मदद करने के आरोप में बंदी थे ।
💥गुरु हरगोविंदसिंहजी ने उनसे बादशाह के प्रति वफादार रहने का वचन लेकर तथा जहाँगीर को स्वयं उनकी वफादारी का भरोसा देकर उनको भी कैद में से छुडवाया । इस परोपकार के परिणामस्वरूप ये ‘बंद छोड पीर के नाम से पहचाने जाने लगे ।
💥कहा जाता है कि : इसकी यादगार के रूप में ग्वालियर के किले में एक चबूतरे पर आज भी ‘बंद छोड पीर का बोर्ड लगा हुआ है ।
💥रिहाई के बाद जहाँगीर प्रगट तौर पर गुरु हरगोविंदसिंहजी से प्रेम करता था किन्तु भीतर से उन पर भरोसा नहीं करता था । जहाँगीर ने उनके पिता गुरु अर्जुनदेवजी को कष्ट दे-देकर मरवाया था। उसको भय था कि : ‘कहीं ये अपने पिता का वैर लेने के लिए मुझसे आज़ाद होकर मेरे विरुद्ध कोई बगावत न कर दें । इसलिए जहाँगीर हमेशा उन्हें अपनी निगरानी में ही रखना चाहता था किन्तु यह कब तक संभव हो पाता ?
💥संवत् 1684 में जहाँगीर की मृत्यु हुई । उसका बड़ा पुत्र #शाहजहाँ दिल्ली के तख्त पर बैठा । शाहजहाँ की सेना के साथ गुरु हरगोविंदसिंहजी के चार युद्ध हुए । प्रत्येक युद्ध में यवनों की सेना कई गुना ज्यादा होते हुए भी विजय गुरु हरगोविंदसिंहजी की ही हुई ।
💥सच है, जहाँ धर्म होता है वहाँ विजय होती ही है ।
💥सन्‌ 1688 में नदौन का युद्ध हुआ जो जम्मू के नवाब अलफ खाँ के साथ हुआ था। सन्‌ 1689 में पहाड़ी #नवाब हुसैन खाँ ने गुरुजी से युद्ध छेड़ दिया, जिसमें गुरुजी की जीत हुई। सन्‌ 1699 को वैशाखी वाले दिन गुरुजी ने केशगढ़ साहिब में पंच पियारों द्वारा तैयार किया हुआ अमृत सबको पिलाकर खालसा पंथ की नींव रखी।
💥खालसा का मतलब है वह सिक्ख जो गुरु से जुड़ा है। वह किसी का गुलाम नहीं है, वह पूर्ण #स्वतंत्र है। सन्‌ 1700 से 1703 तक आपने पहाड़ी राजाओं से आनंदपुर साहिब में चार बड़े युद्ध किए व हर युद्ध में विजय प्राप्त की। पहाड़ी राजाओं की प्रार्थना पर गुरुजी को पकड़ने के लिए औरंगजेब ने सहायता भेजी।
💥मई सन्‌ 1704 की #आनंदपुर की आखिरी लड़ाई में मुगल फौज ने आनंदपुर साहिब को 6 महीने तक घेरे रखा। अंत में गुरुजी सिक्खों के बहुत मिन्नतें करने पर अपने कुछ सिक्खों के साथ आनंदपुर साहिब छोड़कर चले गए।
💥#सिरसा नदी के किनारे एक भयंकर युद्ध हुआ, इसमें दो छोटे साहिबजादे माता रूजरी बिछुड़ गए। 22 दिसंबर सन्‌ 1704 में ‘चमकौर का युद्ध’ नामक ऐतिहासिक युद्ध हुआ, जिसमें 40 सिक्खों ने 10 लाख फौज का सामना किया। इस युद्ध में बड़े साहिबजादे अजीतसिंह और जुझारसिंहजी शहीद हुए।
💥अंतिम युद्ध संवत् 1704 के बाद उन्होंने अपना निवास-स्थान कीर्तिपुर में बना लिया एवं दूर-दूर जाकर सिक्ख धर्म का प्रचार किया । कश्मीर, पीलीभीत, बार और मालवा देशों में जाकर लाखों लोगों को आपने मुक्ति-पथ की ओर अग्रसर किया । आप अनेकों #मुसलमानों को सिक्खी-मण्डल में ले आये एवं देश-देशांतरों में उदासी प्रचारकों को भेजकर श्रीगुरु #नानकदेवजी का झंडा फहराया ।
💥संवत् 1704 में चैत्र शुक्ल पक्ष 5 तदनुसार 3 मार्च 1644 को आपने अपने योग्य पोते श्री #हरिरायजी को गुरुगद्दी सौंपकर परलोकगमन किया ।
(ऋषि प्रसाद : जून २००१)
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हिन्दू धर्म के लोग अफवाह पर जल्दी विश्वास क्यों कर लेते है ?

🚩श्री #महागणपति #आध्यात्मिक मिशन के प्रमुख #आचार्य राघव कीर्ति जी #महाराज की #मीडिया से हुई वार्त्तालाप के कुछ अंश…
💥https://youtu.be/-p8NYlC00qg
💥आचार्य राघव कीर्ति जी ने मीडिया से कहा कि जो #हिन्दू #संस्कृति के क्षरण के लिए #षड़यंत्र चलाया जा रहा है वो साफ दिखाई दे रहा है ।
💥 एक के बाद एक हिन्दू #संत पर अटैक किया जा रहा है । उनके लिए भ्रामक जानकारियाँ समाज में दी जा रही है । ये अच्छी बात नहीं है । ये हमारे हिन्दू धर्म के लिए ठीक नहीं है ।
💥संत #आशारामजी बापू ही नहीं साध्वी #प्रज्ञा ठाकुर को ले लो या स्वामी #असीमानंद जी को ले लो या अन्य संत को ले लो, जिनके चरित्र हनन का प्रयास किया जा रहा है ।
💥हिन्दू #धर्म में हमारे यहाँ लोग जल्दी विश्वास कर लेते है । तथात्मक बातों पर विश्वास किया जाना चाहिए, केवल एक अफवाह के तोड़ पर या मुहीम के तोड़ पर सूचनाएँ आती है तो विश्वास कर लेते है । जो उचित नहीं है ।
💥मै तो नहीं मानता कि ये संत ऐसे है और उन्होंने ऐसे कृत्य किये है । मै अंतर मन से जो अनुभव करता हूँ और समाज में जो देख रहा हूँ कि संत आसारामजी बापू का एक साधक का स्वरुप है । वो वाकई में निर्दोष है और एक न एक दिन समय सिद्ध करेगा ।
💥 मै तो जानता हूँ साधकों पर अनादि काल से आरोप-प्रत्यारोप लगते आ रहे है । इस जनता ने, विधर्मियो ने भगवान राम, भगवान कृष्ण को भी नहीं छोड़ा । कई संतो को नहीं छोड़ा । संत #ज्ञानेश्वर को नहीं छोड़ा । तो इनके आरोप -प्रत्यारोप से साधकों का बल कम नहीं होता । साधकों का बल दिन दुगुना रात चगुना बढ़ता है ।
💥मै सिद्धिविनायक गणपति जी से प्रार्थना करता हूँ कि सभी संत निर्दोष साबित हो । संत आशारामजी बापू भी #निर्दोष साबित हो । जल्दी न्याय मिलें और अपने साधकों के बीच अपने भक्तो के बीच जल्द आये और वैदिक धर्म के प्रचार में संलग्न हो ।
🙏🏻जय हिन्द!!!
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200 करोड़ विदेशी NGOs ने धर्मपरिवर्तन में खर्च किए

🚩#बिदेशी पैसों से चल रहे #NGO #धर्मपरिवर्तन और #देश को तोड़ने का कर रहें हैं घिनौना काम….
देखिये वीडियो👇
💥https://youtu.be/tZVI0aosVfw
💥#खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट ने बताया कि कई NGO #भारत देश में धर्मान्तरण के काम में लगे हुए हैं और इनमें से कई ऐसे है जो बहुत ही छोटी – मोटी घटनाओं को मजहबी रंग देने की साजिश रचते हैं ।
💥#रिपोर्ट के अनुसार 18 ऐसे विदेशी डोनर्स की पहचान हुई है जो भारत में NGO को फ़ण्डिंग करते हैं ताकि #हिंदुओं का #धर्मान्तरण करवाया जा सके । इन विदेशी डोनर्स में #अमेरिका, #दक्षिण कोरिया और #यूरोप शामिल हैं ।
💥#गृहमंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक साल 2013 – 14 में विदेशी डोनर्स ने करीब 12,980 करोड़ रुपये #NGO को दिए उसमें एक हिस्सा हिंदुओं का धर्म परिवर्तन करने में NGO ने लगाया था ।
देखिये वीडियो👇
💥बहुत सारे NGO’s धर्म परिवर्तन के काम में लगे हुए हैं लेकिन पहले ऐसी कोई रिपोर्ट अब तक तैयार नहीं की गई थी अब पहलीबार रिपोर्ट #ख़ुफ़िया एजेंसीस ने जो #गृहमंत्रालय को दी है, उसमें कई फैक्ट है जो चौंकानेवाला रिपोर्ट हैं ।
💥विदेशी पैसों से चलने वाले NGO’S धर्मपरिवर्तन ही करा रहे हैं ऐसा ही नहीं है बल्कि छोटी-छोटी घटनाओं को सांप्रदायिक बनाने की कोशिश करके भारत देश का माहोल भी खराब कर रहें हैं ।
रिपोर्ट में दो तरीके की बातें हैं, एक तो धर्म परिवर्तन करने वाले NGO’s की पहचान हुई है और भारत को बदनाम करने के लिए कैसे साजिश रची जा रही है, इसके लिए काफी ज्यादा मात्रा में विदेशों से NGO’s को पैसे मिलते हैं ।
💥उसमें से करीब-करीब 200 करोड़ रुपये मोटा-मोटा एक डेटा तैयार किया गया है, वो पैसा जो Conversion होता है । उसमें खर्च किये जा रहैं हैं ।
💥उसमें #छत्तीसगढ़, #झारखण्ड, #गुजरात, मध्यप्रदेश, #उत्तरप्रदेश आदि कई राज्यों  में गरीब आदिवासियों में धर्म परिवर्तन कराने के लिए बड़े पैमाने पर इस पैसों का उपयोग हो रहा है ।

💥“उसमे से तीस्ता #सीतलवाड़ के “सबरंग NGO’s” का #FCRA लाइसेंस गृहमंत्रालय ने रद्द कर दिया है ।” उस पर विदेशी चंदा विनियम कानून के उल्लंघन का आरोप था ।
देखिये वीडियो👇
💥https://youtu.be/q6iTJq0BY9w

💥गैर #कानूनी कामों में लिप्त विदेशी फंड से चलने वाली NGO’s की इन्क्वाइरी में पता चला की इसके पैसे विदेश से इसलिए आते थे की वो बच्चों की #शिक्षा में उपयोग करें ।
💥लेकिन ये NGO’s देश में जहग-जहग दँगा फैलाने का काम करते हैं । भारत देश को तोड़ने के लिए कई जगहों पर इन्होने दंगे भी करवाये थे ।
इसलिये गृहमंत्रायल ने इनका लाइसेंस रद्द कर दिया है ।
💥अब ये बड़ी चौंकाने वाली #रिपोर्ट है । लेकिन ये बात स्वर्गीय #VHP के श्री #अशोक सिंघल जी ने पहले ही बता दी थी । लेकिन इस बात पर कोई ध्यान नही दे रहा था । भारत को तोड़ने के लिए एक नहीं दो नहीं कई हजारों NGO’s लगे है जो आज से नहीं चल रहे हैं कई सालों से चल रहे हैं ।
देखिये वीडियो👇
💥https://youtu.be/cSeqoDaJ6qU
💥इनका उद्देश्य केवल यही है कि भारत देश को फिर से गुलाम बनाना जाये । उसके लिए ये NGO’s दिन रात काम कर रहें हैं और उनको इसके लिए विदेश से अरबों-खरबों रूपये भेजे जातें हैं ।
💥इन NGO’s के धर्मपरिवर्तन करने में आड़े जो भी आते थे, उन पर उनके ही लोगों द्वारा गुमराह कर झूठा आरोप लगवाकर (जैसे कि आम जनता अच्छी तरह भ्रमित हो जाये) जेल में अथवा तो जान से मारकर अथवा तो कैसे भी साइड करवा दिया जाता है ।
💥पहले का इतिहास आप पढोगे तो पता चलेगा कि महाराणा प्रताप, झांसी की रानी, संभाजी राजे आदि मुगल या अंग्रेजों के हाथों में नहीं आने वाले थे पर उनके ही लोगों को खरीद कर उनके ही लोगों की गद्दारी के कारण वो पकड़ाये गए । ऐसे ही संतों को बदनाम करने के लिये उनके ही लोभी, लालची, गद्दार लोगों का उपयोग करते हैं और मीडिया और राजनैतिक मिलीभगत के कारण बदनाम करके जेल धकेल दिया जाता है । जैसे की काची काम कोटि पीठ के #जयेन्द्र सरस्वती जी, #स्वामी नित्यानंद जी, #साध्वी प्रज्ञा ठाकुर, स्वामी असीमानंद, #स्वामी अवधेशानंद जी, #संत आसारामजी बापू, #नारायण साँई, धनंजय देसाई को जेल डलवाया और लक्ष्मणानंद जी की हत्या करवा दी गई थी ।
💥इन हिन्दू संतों ने, जो NGO’s के कारण #हिन्दू #धर्मपरिवर्तन कर चुके थे ऐसे लाखों हिन्दुओं को घरवापसी करवाई और देश में जहाँ-जहाँ पर धर्मपरिवर्तन कर रहे थे वहाँ-वहाँ जाकर हिन्दू संस्कृति का प्रचार प्रसार किया । जिससे हिन्दूओं का धर्मपरिवर्तन करने में रुकावट आ रही थी । तो कई संतों की हत्या करवा दी जिसे मीडिया में 1 मिनिट भी नहीं दिखाया और कई संतों को मीडिया द्वारा बदनाम करवाकर जेल भेज दिया ।
💥हिन्दू सावधान रहे आपको जो मीडिया में खबरें दिखाई जाती है वो सच नही होती ।मीडिया के मालिक विदेशी हैं और उनका सपना है कि हिन्दू संस्कृति को तोड़कर भारत को गुलाम बनाया जाये ।
💥इसलिए मीडिया हमेशा हिन्दु विरोधी ख़बरें ही दिखाती है ।
💥भारतवासी हमेशा सतर्क रहे, सावधान रहे । अपने देश को तोड़ने वाली ताकतों का सामना करे । हमेशा हिन्दू #भाई-बहनों, #साधू-संतों को सपोर्ट करे । आपसी घरेलू छोटे-मोटे मतभेदों को भुलाकर अपने इस देश के लिए एकजुट रहें ।
🙏🏻जय हिन्द
💥भारत को तोड़ने वाले NGOS की सच्चाई पहुचाने के लिए इस बात सभी #सोशल साइट्स पर #शेयर जरूर करें ।
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धर्मवीर छत्रपति संभाजी राजे जयंती 17 जून

🚩अद्भुत जीवन चरित्र…
धर्मवीर छत्रपति संभाजी राजे…
💥ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष द्वादशी विक्रम सवंत 1571 को पुरंदगढ़ में स्वराज्य के दूसरे छत्रपति शम्भुराजा का जन्म हुआ ।
💥संभाजी #राजा ने अपनी अल्पायु में जो अलौकिक कार्य किए, उससे पूरा हिंदुस्थान प्रभावित हुआ । इसलिए प्रत्येक #हिन्दू को उनके प्रति कृतज्ञ रहना चाहिए ।
💥उन्होंने साहस एवं निडरता के साथ #औरंगजेब की आठ लाख सेना का सामना किया तथा अधिकांश मुगल सरदारों को #युद्ध में पराजित कर उन्हें भागने के लिए विवश कर दिया ।
💥शम्भाजी (1657-1689) #मराठा
#सम्राट और #छत्रपति शिवाजी के उत्तराधिकारी थे ।
💥 उस समय मराठाओं के सबसे प्रबल शत्रु
💥  #मुगलबादशाह औरंगजेब
बीजापुर औरगोलकुण्डा का शासन
#हिन्दुस्तान से समाप्त करने में प्रमुख भूमिका निभा रहे थे ।
💥सम्भाजी अपनी शौर्यता के लिये काफी प्रसिद्ध थे। सम्भाजी ने अपने कम समय के शासन काल मे 120 युद्ध किये और इसमे एक प्रमुख बात ये थी कि उनकी सेना एक भी युद्ध मे पराभूत नहीं हुई।
💥 इस तरह का पराक्रम करने वाले वह शायद एकमात्र योद्धा होंगे। उनके पराक्रम की वजह से परेशान हो कर दिल्ली के बादशाह औरंगजेब ने कसम खायी थी कि जब तक छत्रपति संभाजी पकड़े नहीं जायेंगे, वो अपना किमोंश सर पर नहीं चढ़ाएगा।
💥#छत्रपति संभाजी नौ वर्ष की अवस्था में छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रसिद्ध आगरा यात्रा में साथ गये थे।
💥 औरंगजेब के बंदीगृह से निकल, छत्रपति शिवाजी महाराज के महाराष्ट्र वापस लौटने पर, मुगलों से समझौते के फलस्वरूप, संभाजी मुगल सम्राट् द्वारा राजा के पद तथा पंचहजारी मंसब से विभूषित हुए।
💥औरंगाबाद की मुगल छावनी में, मराठा सेना के साथ उनकी नियुक्ति (1668) हुई ।
💥#युगप्रवर्तक राजा के पुत्र रहते उनको यह नौकरी मान्य नहीं थी। किन्तु स्वराज्य स्थापना की शुरू के दिन होने के कारण और पिता के आदेश के पालन हेतु केवल 9 साल के उम्र में ही इतनी जिम्मेदारी का ही नही बल्कि अपमान जनक कार्य उन्होंने धीरता से किया।
💥 उन्होंने केवल 14 साल में बुधाभुषणम, नखशिख, नायिकाभेद तथा सातशातक यह #संस्कृत ग्रंथ लिखे थे।
💥#छत्रपति शिवाजी महाराज के राज्याभिषेक के बाद स्थापित अष्टप्रधान मंत्रीमंडल में से कुछ लोगों के राजकारण के वजह से यह संवेदनशील युवराज काफी क्षतिग्रस्त हुए थे। पराक्रमी होने के बावजूद उन्हें अनेक लड़ाईयों से दूर रखा गया।
💥 स्वभावत: संवेदनशील रहने वाले संभाजी अपना पराक्रम दिखाने की कोशिश में मुगल सेना से जा मिले (16 दिसम्बर 1678) । किन्तु कुछ ही समय में जब उनको अपनी गलती समझ आई तब वो वहां से पुन: स्वराज्य में आये। मगर इस प्रयास में वो अपने पुत्र शाहू, पत्नी रानी येसूबाई और बहन गोदावरी को अपने साथ लाने में असफल रहे।
💥छत्रपति शिवाजी महाराज की मृत्यु (20 जुलाई 1680) के बाद कुछ लोगों ने संभाजी के अनुज राजाराम को सिंहासनासीन करने का प्रयत्न किया। किन्तु सेनापति मोहिते के रहते यह कारस्थान नाकामयाब हुआ और 10 जनवरी 1681 को संभाजी महाराज का विधिवत्‌ राज्याभिषेक हुआ।
💥संभाजी को मुग़ल, पोर्तुगीज, अंग्रेज़ तथा अन्य शत्रुओं से लड़ने के साथ-साथ अंतर्गत शत्रुओं से भी लड़ना पड़ा।
💥1683 में उन्होंने पुर्तगालियों को पराजित किया। इसी समय वह किसी राजकीय कारण से संगमनेर में रहे थे।
💥बहनोई गणोजी शिर्के की बेईमानी एवं मुगलों द्वारा संभाजी राजा का घेराव….
💥येसुबाई के वरिष्ठ बंधु अर्थात #शम्भु राजा के बहनोई गणोजी शिर्के हिंदवी स्वराज्य से बेईमान हो गए । जुल्पिकार खान #रायगढ़ पर #आक्रमण करने आ रहा है यह समाचार मिलते ही शम्भुराजा सातारा-वाई-महाड मार्ग से होते हुए रायगढ़ लौटने वाले थे।परंतु मुकर्रबखान कोल्हापुर तक आ पहुंचा । इसलिए शम्भु राजा ने संगमेश्वर मार्ग के चिपलन-खेड मार्ग से रायगढ़ जाने का निश्चय किया ।
💥 शम्भुराजे के स्वयं संगमेश्वर आने की वार्ता आसपास के क्षेत्र में हवा समान फैल गई । शिर्के के दंगों के कारण उद्ध्वस्त लोग अपने परिवाद लेकर संभाजी राजा के पास आने लगे । जनता के परिवाद को समझकर उनका समाधान करने में उनका समय व्यय हो गया एवं उन्हें संगमेश्वर में 4-5 दिन तक निवास करना पड़ा ।
💥उधर राजा को पता चला कि कोल्हापुर से मुकर्रबखान निकलकर आ रहा है । कोल्हापुर से संगमेश्वर की दूरी 90 मील की थी तथा वह भी सह्याद्रि की घाटी से व्याप्त कठिन मार्ग था ।
💥 इसलिए न्यूनतम 8-10 दिन के अंतर वाले संगमेश्वर को बेईमान गणोजी शिर्के मुकर्रबखान को समीप के मार्ग से केवल 4-5 दिन में ही ले आया ।
💥 संभाजी से प्रतिशोध लेने के उद्देश्य से शिर्के ने बेईमानी की थी तथा अपनी जागीर प्राप्त करने हेतु यह कुकर्म किया ।
💥अतः 1 फरवरी 1689 को मुकर्रबखान ने अपनी 4 हजार सेना की सहायता से शम्भुराजा को घेर लिया ।
💥 संभाजीराजा का घेरा तोड़ने का असफल प्रयास…
💥जब संभाजीराजे को ध्यान में आया कि संगमेश्वर में जिस सरदेसाई के बाडे में वे निवास के लिए रुके थे, उस बाडे को खान ने घेर लिया, तो उनको आश्चर्य हुआ, क्योंकि उन्हें ज्ञात था कि इतने अल्प दिनों में खान का वहां आना असंभव था; परंतु यह चमत्कार केवल बेईमानी का था, यह भी उनके ध्यान में आया ।
💥संभाजीराजा ने पूर्व से ही अपनी फौज रायगढ़ के लिए रवाना की थी तथा केवल 300 सैन्य ही अपने पास रखे थे । अब खान का घेराव तोड़ कर रायगढ़ की ओर प्रयाण करना राजा के समक्ष एकमात्र यही पर्याय शेष रह गया था ।
💥 इसलिए राजा ने अपने सैनिकों को शत्रुओं पर आक्रमण करने का आदेश दिया । इस स्थिति में भी शंभुराजे, संताजी घोरपडे एवं खंडोबल्लाळ बिना डगमगाए शत्रु का घेराव तोड़कर रायगढ़ की दिशा में गति से निकले ।
💥 दुर्भाग्यवश इस घमासान युद्ध में मालोजी घोरपडे की मृत्यु हो गई; परंतु संभाजीराजे एवं कवि कलश घेराव में फंस गए । इस स्थिति में भी संभाजीराजा ने अपना घोडा घेराव के बाहर निकाला था; परंतु पीछे रहने वाले कवि कलश के दाहिने हाथ में मुकर्रबखान का बाण लगने से वे नीचे गिरे एवं उन्हें बचाने हेतु राजा पुनः पीछे मुड़े तथा घेराव में फंस गए ।
💥अपनों की बेइमानी का कारण बना राज्य के लिये घात !
💥इस अवसर पर अनेक #सैनिकों के मारे जाने के कारण उनके घोड़े इधर-उधर भाग रहे थे । सर्वत्र धूल उड़ रही थी । किसी को भी  स्पष्ट दिखाई नहीं दे रहा था । इसका लाभ उठाकर शंभूराजा ने पुनः सरदेसाई के बाडे में प्रवेश किया । वहां पर मात्र उनका घोडा था । धूल स्थिर होने पर गणोजी शिर्के ने #शंभुराजा के घोडे को पहचान लिया; क्योंकि राजाओं के घोडे के पांव में सोने का तोड़ा रहता था, यह शिर्के को ज्ञात था; इसलिए उन्होंने खान की सेना को समीप में ही संभाजी को ढूंढने की सूचना की ।
💥 अंततोगत्वा  #मुकर्रबखान के लड़के ने  अर्थात् इरवलासखान ने शम्भुराजा को नियंत्रण में ले लिया ।
💥अपनों की बेईमानी के कारण अंत में सिंह का शावक #शत्रु के हाथ लग ही गया ।
💥जंग-जंग पछाड़कर भी निरंतर 9 वर्षों तक जो सात लाख सेना के हाथ नहीं लगा, जिसने बादशाह को कभी स्वस्थ नहीं बैठने दिया, ऐसा पराक्रमी योद्धा अपने लोगों की बेईमानी के कारण मुगलों के जाल में फंस गया ।
💥दोनों को #मुसलमान बनाने के लिए औरंगजेब ने कई कोशिशें की। किन्तु धर्मवीर छत्रपति संभाजी महाराज और कवि कलश ने धर्म परिवर्तन से इन्कार कर दिया।
💥औरंगजेब ने दोनों की जुबान कटवा दी, आँखें निकाल दी किन्तु अंत तक धर्म का साथ नहीं छोड़ा।
💥11 मार्च 1689 हिन्दू नववर्ष दिन को दोनों के शरीर के टुकड़े-टुकड़े कर औरंगजेब ने हत्या कर दी।
💥किन्तु ऐसा कहते है कि हत्या पूर्व औरंगजेब ने छत्रपति संभाजी महाराज से कहा कि मेरे 4 पुत्रों में से एक भी तुम्हारे जैसा होता तो सारा हिन्दुस्थान कब का मुग़ल सल्तनत में समाया होता।
💥जब छत्रपति संभाजी महाराज के टुकड़े तुलापुर की नदी में फेंकें गए तो उस किनारे रहने वाले लोगों ने वो इकठ्ठा कर के सिला के जोड़ दिए (इन लोगों को आज ” शिवले ” नाम से जाना जाता है) जिस के उपरांत उनका विधिपूर्वक अंतिम संस्कार किया।
💥औरंगजेब ने सोचा था कि मराठी साम्राज्य छत्रपति संभाजी महाराज के मृत्यु पश्चात ख़त्म हो जाएगा। छत्रपति संभाजी महाराज के हत्या की वजह से मराठा एक साथ आकर लड़ने लगे ।
💥सेना की संख्या दो लाख तक पहुंच गई । सभी ओर प्रत्येक स्तर पर मुगलों का घोर विरोध होने लगा ।
💥 अंत में 27 वर्ष के निष्फल युद्ध के उपरांत औरंगजेब को दक्खन में ही प्राणत्याग करना पड़ा।
💥उसका दक्खन जीतने का सपना इसी भूमि में दफन हो गया और मुगलों की सत्ता शक्ति क्षीण होने लगी एवं हिंदुओं के शक्तिशाली साम्राज्य का उदय हुआ ।
💥कैसे कैसे महान वीर हुए भारत की इस धरा पर…
🙏🏻शत-शत नमन उनके चरणों में…
🙏🏻जय माँ भारती!!!
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