ईसाई मिशनरियां दलित एवं गरीबों का धर्म परिवर्तन कराने का काम पुरजोश से कर रही हैं

ईसाई मिशनरियां दलित एवं गरीबों का धर्म परिवर्तन कराने का काम पुरजोश से कर रही हैं
जून 23, 2017
विश्रामपुर
(झारखंड) : भूत प्रेत से शांति दिलाने के नाम पर ईसाई मिशनरियां दलित
पिछड़े वर्ग एवं गरीबों का धर्म परिवर्तन कराने का जोरशोर से काम कर रही हैं
। पिछले दिनों राज्यस्तरीय पार्टी कार्यकर्ता की बैठक में धर्मांतरण पर
सक्त कानून बनाने की बात मुख्यमंत्री #रघुवर दास की ओर से कही गई थी। परंतु
इसका कोई प्रभाव लोगों पर नहीं पड़ा । धर्मांतरण का खेल चरम सीमा पर है।
कुछ बिचौलिये भोले भाले गरीब परिवार को लालच देकर अपने लक्ष्य में सफल हो
रहे हैं। इसमें विश्रामपुर व नावा बाजार थाना क्षेत्र भी इसमें पीछे नहीं
है।
conversion
थाना
क्षेत्र के #उमेश चौधरी, #सुगेंद्र उरांव, #विजय राम व तोलरा गांव से
#गणेश उरांव, #चतुगुण उरांव जैसे दर्जनों लोगों ने बातचीत के क्रम में
स्वीकार किया है कि धर्मांतरण के बाद उन्हें भूत प्रेत से शांति मिली है।
नावाबाजार थाना क्षेत्र के तुकबेरा गांव निवासी बिशुनदेव भुइयां ने बताया
कि, उनकी पत्नी का दो बार गर्भपात हो गया था। पुत्र प्राप्ति के मोह में
ईसाई धर्म स्वीकार करने को कहा गया है और वे धर्मांतरित भी हो गए ।
#धर्मांतरण
करने वाले कुछ लोग शहर में किराए के मकान में रहते हैं। साथ हीं अपने आप
को ऊंची जाति का हवाला देकर कहते हैं कि, हमने ईसाई धर्म अपना लिया है तो
तुम दलित पिछड़े लोग अपनाने से क्यों परहेज कर रहे हो..??
इसमें कोई पाप नहीं। लोगों को बताया जाता है कि प्रभु यीशु
से तुम्हारा सम्पर्क होगा । घर में सुख शांति आएगी। सभी प्रकार के दर्द
पीड़ाएँ दूर होंगी । इसके साथ साथ लोगों को कहा जाता है कि ईसाई धर्म ही बड़ा
धर्म है।
तुकबेरा
गांव के एक भुईयां परिवार ने सोशल मीडिया पर उपलब्ध एक विडियो में स्वीकार
किया है कि ईसाई धर्म अपनाने से दर्द पीड़ाएं भूत- प्रेतो से शांति मिलती
है। चर्च में गरीबों को मुर्गा भात खिलाकर उन्हे धर्म परिवर्तन कराया जा
रहा है। राजहारा कोठी निवासी सुमंत साव के पूरा परिवार ने इसलिए हिन्दू
धर्म त्याग कर दिया कि भूत प्रेत से शांति चाहिए थी। जो ईसाई धर्म अपनाने
से मिली। जब ईसाई धर्मांतरण से दर्द पीड़ा व भूत-प्रेत से शांति मिलती है तो
सरकार द्वारा स्वास्थ्य पर किया जा रहा करोडो़ का खर्चा बेमानी है।
इस
क्षेत्र में #धर्मांतरण कर ईसाई बनाने का खेल वर्षों से चल रहा है। परंतु
तीन वर्षों से क्षेत्रों में धर्मांतरण का कार्य हावी है। इससे पूर्व ईसाई
बने लोग मेदिनीनगर जाकर रविवार को प्रार्थना करते थे। बढ़ती संख्या को देखते
हुए धर्म के दलाल स्थानीय पंचायत प्रतिनिधि से संपर्क स्थापित किए। जिसने
लालच में आकर प्रत्येक रविवार को सार्वजनिक जगहों पर प्रार्थना की अनुमति
दे दी। पिछले साल 2015 में गांव में एक विशाल गिरजाघर बना दिया गया। जहां
प्रत्येक रविवार को प्रार्थना कराई जाती है। साथ ही बाहर से आने वाले फादर
या पास्टर अंधविश्वास से जकडे़ लोगों को धर्म अपनाने के बाद मुक्त होने की
बात कहते हैं। जिसके बहकावे में लोग आ रहे हैं।
#धर्मांतरण के विरुद्ध #कार्रवाई की मांग
प्रखंड
के #अनुसूचित जाति, जन जाति व पिछड़ी जाति के लगभग तीन सौ लोगों ने
धर्मातरण कर लिया है। इसके विरुद्ध कार्रवाई की मांग स्थानीय लोगों ने की
है। इनका कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में ईसाई मिशनरियों ने आदिम
जनजाति,अनुसूचित जाति-जनजाति और समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों
को विदेशी धन के बल पर प्रलोभन देकर धर्मांतरित करने का अभियान चलाया है।
नावाबाजार थाना क्षेत्र के राजहारा कोठी, तुकबेरा, छतवा इसका प्रत्यक्ष
प्रमाण है।
उन्होंने
कहा कि राज्य के कई जिलों में एक रणनीति के तहत भोले-भाले लोगों को
#शिक्षा एवं #स्वास्थ्य सेवा की आड़ में चंगाई करिश्मा दिखाकर #धर्मातरित
किया जा रहा है। इसके कारण गांवों का समीकरण बदल गया है। राजहारा जैसे
हिन्दू बहुल गांव में चर्च बन गए। प्रशासन अनभिज्ञ बना हुआ है। धर्मातरण से
संबंधित संस्था या व्यक्ति पर कड़ी कार्रवाई किए जाने की बात कही।
नावा
बाजार के प्रखंड विकास पदाधिकारी अशोक चौपडा ने कहा कि, भूत प्रेत जैसे
अंधविश्वास के नाम पर झूठे भ्रम फैलानेवाले लोगों पर कानूनी कार्रवाई की
जाएगी। क्षेत्र में धर्मांतरण की जानकारी नहीं मिली है। संज्ञान में आने पर
कानूनी कार्रवाई की जायेगी। स्थानीय लोगों से इसकी समुचित जानकारी ली जा
रही है।
 स्त्रोत : जागरण
विदेश
के फिलॉसफर #नित्शे ने बताया कि मैं ईसाई धर्म को एक अभिशाप मानता हूँ,
उसमें आंतरिक #विकृति की पराकाष्ठा है । वह द्वेषभाव से भरपूर वृत्ति है ।
इस भयंकर विष का कोई मारण नहीं । #ईसाईत गुलाम, क्षुद्र और #चांडाल का पंथ
है ।
 #एच.जी.वेल्स ने भी लिखा था कि दुनिया की सबसे बड़ी बुराई है रोमन #कैथोलिक चर्च ।
#डॉ.
एनी बेसेन्ट लिखते हैं कि मैंने 40 वर्षों तक विश्व के सभी बड़े धर्मो का
अध्ययन करके पाया कि हिन्दू धर्म के समान पूर्ण, महान और वैज्ञानिक धर्म
कोई नहीं है ।
2017
साल पुराना, गौ मांस खाने वाला, शराब पीने वाला, छोटे-छोटे बच्चों के साथ
कुकर्म करने वाला ईसाई धर्म बड़ा है या सबको सुखी स्वस्थ और सम्मानित जीवन
जीने देने वाला सनातन धर्म बड़ा???
आपको
बता दें कि अक्टूबर 2016 को #झारखंड के मुख्यमंत्री #रघुवर दास ने कहा था
कि कुछ लोग हमारी हिन्दू संस्कृति और परंपरा को नष्ट करने का प्रयास कर रहे
हैं । लालच या प्रलोभन देकर धर्म परिवर्तन कराना अपराध है ।
मुख्यमंत्री
ने लोगों को कहा कि हिन्दू धर्म और #सनातन #संस्कृति पर चोट या आंच
पहुंचाने की कोशिश करने वालों को पकड़ कर पुलिस के हवाले करो ।
पूरी
दुनिया मानती है कि #हिन्दू #धर्म सबसे श्रेष्ठ है और जो उनको ही लालच
देकर धर्मान्तरण करवा रहे हैं उनकी तो जेल में ही जगह होनी चाहिये ।
ये मुख्यमंत्री जी ने बिलकुल सही कहा है ।
जैसा
कि हमने पहले भी बताया है कि रोमन #केथोलिक चर्च का एक छोटा राज्य है जिसे
वेटिकन सिटी बोलते हैं । अपने धर्म (ईसाई) के प्रचार के लिए वे हर साल
करीब​ 17 हजार करोड़ डॉलर खर्च करते हैं ।
वेटिकन के किसी भी व्यक्ति को पता नहीं है कि उनके कितने व्यापार चलते हैं ।
रोम शहर में 33% #इलेक्ट्रॉनिक , प्लास्टिक, #एयर लाइन, #केमिकल और इंजीनियरिंग बिजनेस वेटिकन के हाथ में हैं ।
दुनिया में सबसे बड़े #Shares​ वेटिकन के पास हैं ।
इटालियन #बैंकिंग में उनकी बड़ी संपत्ति है और अमेरिका एवं स्विस बैंकों में उनकी बड़ी भारी deposit है ।
ज्यादा जानकारी के लिए पुस्तक #VATICANEMPIRE पढ़े !!
आपको
बता दें कि ईसाई पादरी छोटे #बच्चे- बच्चियों के साथ #दुष्कर्म करते हैं
लेकिन उनके खिलाफ #मीडिया कुछ नही बोलती बल्कि उनका पक्ष लेती है क्योंकि
90% मीडिया ईसाई मिशनरियों के फंड से चलती है ।
लेकिन
जब कोई हिन्दू साधु-संत या हिन्दू संगठन या सरकार भोले-भाले #हिन्दुओं को
#पैसा, #दवाई, कपड़े आदि देकर धर्मान्तरण के खिलाफ मुहिम चलाते हैं तो
देशद्रोही और बिकाऊ मीडिया उनके खिलाफ देश में एक माहौल बनाकर उनकी छवि को
धूमिल कर देते हैं ।
ईसाई
धर्मान्तरण पर रोक लगाने और हिंदुओं की घरवापसी कराने वाले #जयेन्द्र
सरस्वती, संत #आसारामजी बापू, स्वामी असीमानन्द जैसे अनेक हिन्दू संतों को
जेल भेज दिया गया और स्वामी #लक्ष्मणानन्द जी की तो हत्या करवा दी गई । ऐसे
जो भी धर्मान्तरण के खिलाफ आवाज उठाता है उनको जेल भेज दिया जाता है या तो
हत्या करवा दी जाती है ।
ये देश में बहुत बड़ा #षडयंत्र चल रहा है । हिन्दुओं का दिन-रात धर्मान्तरण करवा रहे हैं ।
#केंद्र_सरकार
को आगे आना चाहिये और #धर्मान्तरण के खिलाफ कानून पारित कर देना चाहिए और
जो भी धर्मान्तरण करता हुआ पाया जाये उसको आजीवन जेल भेज देना चाहिए जिससे
#धर्म #सुरक्षित हो, देश सुरक्षित हो ।
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मीडिया ने छुपाई खबर : 300 लोगों का ईसाई मिशनरियां करवा रही थी धर्मपरिवर्तन

मीडिया ने छुपाई खबर : 300 लोगों का ईसाई मिशनरियां करवा रही थी धर्मपरिवर्तन
12 मई 2017
ईसाई
मिशनरियां प्रलोभन देकर भोले-भाले हिन्दुओं का धर्मपरिवर्तन करवा लेते हैं
लेकिन जब उनको वास्तविकता पता चलती है कि दुनिया में हिन्दू धर्म ही
सर्वश्रेष्ठ है तो वो पश्चाताप करके घरवापसी करते हैं । आज ईसाई मिशनरियां
देश मे खुलेआम धर्म परिवर्तन करवा रहे है पर उनके विरुद्ध क्यों मौन है
भारत की मीडिया ??
Media-hidden-news-300-Christian-missionaries-were-doing-Dharmapirvantan
सिर्फ अपना नाम बदल लेने से , सिर्फ अपना आराध्य बदल लेने से कोई कुछ भी करे वो पाप और बीमारी से कैसे बच सकता है?
ये
थ्योरी फिलहाल समझ के बाहर की बात है पर ऐसा कर के भोले भाले ग्रामीणों को
धर्म त्यागने पर मजबूर किया जा रहा है,वो भी बिना किसी डर के ।
मामला
है गुरुवार का उत्तर प्रदेश के मऊ जिले में जहाँ दक्षिण टोला थाने के गाँव
सलेम पुर में अचानक ही सूचना मिली कि ईसाई मिशनरी से जुड़े कुछ लोग लगभग
300 लोगों को विभिन्न प्रलोभन आदि देकर हिन्दू धर्म त्याग करवा अपना पंथ
अपनाने के लिए पहुंचे हैं ।
विश्व
हिन्दू परिषद् के लिए ये खबर बहुत अप्रत्याशित थी और वो सीधे वहां पहुंच
गए जहाँ हिन्दुओं का धर्म-परिवर्तन करवाया जा रहा था ।
मौके
पर भीड़ लगी मिली और धर्मांतरण के प्रमाण भी थे । वहां लोगों को बताया जा
रहा था कि ईसा मसीह की शरण में आने से सारे दुःख दूर होते हैं और हर बीमारी
खत्म हो जाती है और भी उसके अलावा बहुत कुछ समझाया जा रहा था ।
विश्व
हिन्दू परिषद् के वहां पहुंचने की सूचना पुलिस को मिली तो हड़कंप मच गया ।
तत्काल किसी अनहोनी की घटना को रोकने के लिए मौके पर पुलिस बल पंहुचा और
धर्मांतरण करा रहे 6 मिशनरी प्रतिनिधियों को गिरफ्तार करके थाने ले आये
जहाँ उन से गहन पूछताछ की गई ।
विश्व
हिन्दू परिषद् आक्रोशित हो उठी थी जिसके बाद पुलिस ने उनसे तहरीर देने की
बात कही । तत्पश्चात विश्व हिन्दू परिषद् के शैलेन्द्र सिंह की दी गयी
तहरीर पर मुकदमा पंजीकृत कर के कार्यवाही शुरू कर दी गई।
मामले
की गंभीरता बढ़ते देख कर जिलाधिकारी ने भी विषय का संज्ञान लिया और अधीनस्थ
SDM को तत्काल कार्यवाही के निर्देश जारी किये । SDM ने पूरे प्रकरण की
बारीकी देखना शुरू कर दिया है और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्यवाही करने का
आश्वासन दिया है । धर्म त्यागने के लिए उन्हें भी लाइन में बैठाया गया था
जिनकी उम्र अभी इतनी कम है कि वो अपना नाम भी ठीक से बता नहीं पा रहे थे ।
इतनी बड़ी खबर है लेकिन किसी मीडिया ने नहीं दिखाई, केवल एकमात्र राष्ट्रवादी चैनल सुदर्शन न्यूज चैनल ने ही इसका पर्दाफाश किया ।
सरकार बदलने और नोटबन्दी के बाद आज भी ईसाई मिशनरियां हिन्दुओं का धड़ल्ले से धर्म परिवर्तन करवा रही हैं, कब रोक लगेगी?
हिन्दू
गलती से किसी अन्य धर्म में चला गया और उस हिन्दू को घरवापसी करवाते है तो
मीडिया खूब हल्ला करने लगती है लेकिन जब हिंदुओं का खुल्ले आम
धर्मपरिवर्तन करवाया जा रहा है वहाँ पर क्यों चुप्पी साधी है मीडिया ने ??
क्या मीडिया को वेटिकन सिटी से फंड मिल रहा है? जिससे वो उनके खिलाफ नहीं बोलती !!
ईसाई
मिशनरियां द्वारा हमारे देश में खुल्ले आम भोली-भाली जनता को नौकरी, पैसा,
दवाई की लालच देकर धर्म परिवर्तन करवाया जा रहा है। उनका उद्देश्य है कि
हिन्दुस्तान को फिर से गुलाम बनाया जाये । इसलिए वो दिन-रात धर्मपरिवर्तन
करवाने में लगे हैं उनको वेटिकन सिटी से पैसा मिलता है धर्मपरिवर्तन करवाने
का ।
जो
पादरी छोटे बच्चों के साथ कुकर्म करते हैं, बच्चियों के साथ बलात्कर करते
हैं, गौ-मांस खाते हैं, मदिरापान करते हैं, वो दूसरों को कैसे पाप से मुक्त
कर सकते हैं ?
 जो खुद पापकर्म में लिप्त हैं ।
अतः देश की भोली-भाली जनता को सतर्क रहने की जरूरत है ऐसे धर्म में जाना अच्छा नही है जो खुद ही पतित हो ।
मीडिया
केवल हिन्दू धर्म के साधु-संतों को ही बदनाम करती है लेकिन कुकर्मी
पादरियों या मौलवी के लिए एक शब्द भी नही बोलती है इससे सिद्ध होता है कि
वेटिकन सिटी और मुस्लिम देश से इनकी फंडिंग होती है जिससे उनके खिलाफ नही
बोलकर पवित्र साधु-संतों के ऊपर कीचड़ उछालती है ।
वेटिकन
सिटी का दुनिया भर में खरबों में बिजनेस चलता है, उनका एक ही उद्देश्य है
कि भारत में भी धर्मपरिवर्तन के जरिये लोगों को गुमराह करके ईसाई धर्म को
बढ़ावा देकर देश को गुलाम बनाया जाये।
अतः कुकर्म करने वाले पादरियों और उनके फंड से चलने वाली मीडिया से सावधान रहें ।
सरकार और न्यायालय को भी धर्मपरिवर्तन करने वालों के खिलाफ कड़क कानून बनाना चाहिए और बिकाऊ मीडिया पर लगाम कसनी चाहिए ।

मुस्लिम धर्म से परेशान होकर मुस्लिम परिवारों ने अपनाया हिन्दू धर्म

🚩मुस्लिम धर्म से परेशान होकर #मुस्लिम परिवारों ने अपनाया #हिन्दू धर्म
🚩उत्तर
प्रदेश के फैजाबाद में अपने ही #धर्म के लोगों से परेशान होकर दो दर्जन से
भी ज्यादा मुस्लिम लोगों ने #हिंदूधर्म को अपना लिया है और साथ ही सभी
#वैदिक हिंदू धर्म अपनाने की #धार्मिक प्रक्रिया पूरी की । घर वापसी करने
वाले मुस्लिमों को आर्य समाज और संघ के नेता द्वारा आयोजित विशेष पूजन के
बाद #हिंदूधर्म में वापिस शामिल किया गया है।
ghar vapsi
🚩#आर्य समाज और संघ के नेता का दावा है कि सभी लोगों ने अपनी मर्जी से हिंदू धर्म अपनाया है।
आपको
बता दें कि यह मामला रविवार को अम्बेडकरनगर जिले के #आलापुर क्षेत्र का है
जहां दर्जन भर से ज्यादा मुस्लिम समुदाय के लोगों ने #हिंदू धर्म अपना
लिया है और साथ में इन लोगों ने मुस्लिम नाम को छोड़कर #हिंदू नाम भी रख
दिया है। हालांकि, सुरक्षा कारणों से इन लोगों के नामों को उजागर नहीं किया
गया है।
🚩आर्य
समाज के प्रधान #हिमांशु त्रिपाठी ने कहा कि आर्य समाज के संस्थापक
#महर्षि दयानंद सरस्वती के पदचिन्हों पर चलते हुए परम पिता #परमेश्वर की
प्रेरणा से बिना किसी लोभ, भय अथवा दबाव के एक दर्जन से अधिक लोगों ने
पूर्ण #वैदिक विधि-विधान के साथ विशेष का कार्यक्रम #आचार्य शर्ममित्र
शर्मा द्वारा सम्पन्न कराया ।
 विश्व
हिन्दू परिषद के #प्रवीण तोगड़िया ने भी कुछ समय पहले बताया था कि हमने
करीब 5 लाख #मुस्लिमों को हिन्दू धर्म में वापसी करवाई है ।
🚩क्या
आप जानते हैं कि अखण्ड भारत में मुस्लिम #धर्म था ही नही लेकिन विदेशी
आक्रमणकारी मुगलों ने भारत में आकर लूट-पाट की और हिन्दुओं को क्रूर मुगलों
ने #तलवार की नोक पर जबरदस्ती मुस्लिम धर्म में परिवर्तन करवाया लेकिन अब
जिन मुस्लिमों को पता चल रहा है कि हमारे पूर्वज #हिन्दू थे हमें जबरदस्ती
मुस्लिम धर्म परिवर्तन करवाया था तो अब  #मुस्लिम धर्म छोड़कर फिर से
#हिन्दूधर्म अपना रहे हैं ।
🚩शरिया एक्ट से कई मुस्लिम लोग #परेशान हैं ।
जानिये क्या है शरिया लॉ एक्ट ??
भारत में कैसे आया ??
🚩भारत
में अलग-अलग समाज के लोग रहते हैं । भारतीय #संविधान के अनुच्छेद 14 के
अनुसार भारत में रहने वाले सभी लोगों को एक समान संरक्षण का अधिकार है,
लेकिन जहाँ मुसलमानों के व्यक्तिगत मुद्दों की बात आती है वहाँ कई अहम
मुद्दों पर मुसलमान #शरिया के अनुसार उन मुद्दों का निराकरण करते हैं। ये
मुद्दे है निकाह, तलाक, विरासत, बच्चों का उत्तराधिकार आदि।
अधिकतर शरिया या शारियत सुनने व पढ़ने में आता है।
 आखिर ये है क्या और कब से ये लागू हुआ ?
🚩 जिसका हवाला देते हुए तमाम मौलाना कहते हैं कि उनके मामलों में दखल ना दे #सरकार ..
🚩इस्लामिक
समाज शरीयत के अनुसार चलता है। शरीयत में #मोहम्मद पैगंबर द्वारा किए हुए
काम के शब्द शामिल हैं । #मोहम्मद पैगंबर के बाद कई संस्थाओं ने अपने
अनुसार इस्लामिक कानूनों की व्याख्या की और इन्हें प्रसारित व प्रचारित
किया। इस्लामिक लॉ की #चार संस्थायें हैं जो कुरान में लिखे शब्दों की
व्याख्या करती हैं। ये संस्थाएं हैं हनफिय्या , मलिकिय्या, शफिय्या और
हनबलिय्या । जो अलग-अलग सदी में विकसित हुई थी। मुस्लिम देश अपने अपने
मुताबिक इन संस्थाओं के #कानूनों का पालन करते हैं ।
शरीयत आखिर भारत में कैसे आया ?
🚩भारत
में मुस्लिम पर्सनल लॉ एप्लिकेशन एक्ट ब्रिटिशों की देन है। #ब्रिटिश
सरकार का #भारतीयों पर जब राज करना मुश्किल होने लगा तब #ब्रिटिश सरकार ने
भारतीयों पर उनके सांस्कृतिक नियमों के आधार पर राज करने की प्रक्रिया
निकाली। #ब्रिटिश सरकार ने मुसलमानों के व्यक्तिगत मुद्दे पर हस्तक्षेप
करने से इन्कार कर दिया। उन्होंने मुसलमानों के व्यक्तिगत मुद्दों के लिए
मुस्लिम लॉ एक्ट लाकर उन्हें उनके व्यक्तिगत मुद्दों पर उठे विवादों को
शरीयत के अनुसार ही सुलझाने की छूट दे दी।   #ब्रिटिश सरकार ने 1937
मुस्लिम लॉ एक्ट लाकर जो विभाजन करवाने का कार्य किया वैसा ही कार्य कुछ
#पूर्ववर्ती सरकारों ने किया ।
🚩सन्
1985 में एक 62 वर्ष की मुस्लिम महिला शाह बानो ने #सुप्रीम कोर्ट में एक
याचिका दाखिल की जिसमें उसने अपने पूर्व पति से गुजारे #भत्ते की मांग की
थी। #सुप्रीम कोर्ट ने उनकी इस मांग से सहमत होकर इस मुद्दे को सही बताया
और अपनी मुहर लगाई। इस फैसले का मुस्लिम समाज में काफी #विरोध देखने को
मिला व इसे कुरान के खिलाफ बताया। इस मामले ने काफी तूल पकड़ लिया था। तब
तत्कालीन  #प्रधानमन्त्री  ने वोट बैंक के #लालच में ऐसा फैसला लिया जिससे
देश आज भी प्रभावित है। तत्कालीन #प्रधानमन्त्री  राजीव गांधी ने मुस्लिम
महिला संरक्षण तलाक अधिकार अधिनियम को पास कर दिया।
🚩जिसके
अनुसार पति के लिए #तलाकशुदा पत्नी को गुजारा #भत्ता देना तो जरूरी हो गया
था लेकिन साथ ही ये प्रावधान भी था कि यह #भत्ता केवल #इद्दत की अवधि के
दौरान ही देना होगा। #इद्दत तलाक के 90 दिनों बाद तक ही होती है ।
🚩उपरोक्त
#कानून की पूरी विवेचना आदि वर्तमान में #सुप्रीम कोर्ट और केंद्र सरकार
के लिए आवश्यक है जिससे समान नागरिक #आचार संहिता का पालन हो कर सबके लिए
समान कानून बन सके । फिलहाल 3 #तलाक के विषय में 3 #तलाक के तमाम समर्थक
शरीयत एक्ट पर चल कर 3 #तलाक को कायम रखने की मांग कर रहे हैं ।
🚩अब #न्यायालय और #सरकार को भारतीय संविधान से अलग चलने वाले #शरिया कानून को तुरन्त #खत्म कर देना चाहिए ।
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उच्च न्यायालय आदेश देने के पश्चात भी मस्जिद पर प्रसारित किए जानेवाले अवैध भोंपूओं पर कार्रवाई नहीं !!

क्या मस्जिदों पर दिन में पांच बार बजने वाले भोंपू देश के अधिनियमों से भी श्रेष्ठ हैं ?
मुम्बई
के उच्च #न्यायालय ने ध्वनिप्रदूषण करनेवाले अवैध भोंपूओं के विरोध में
स्पष्ट आदेश देने के पश्चात भी विश्व में श्रेष्ठ कहलाने वाली मुंबई की
#पुलिस यंत्रणा ने किसी भी मस्जिद पर प्रसारित किए जानेवाले अवैध भोंपूओं
पर कार्रवाई नहीं की है ।
Add caption
इस
संदर्भ में सूचना अधिकार के अंतर्गत प्रश्न पूछने के पश्चात कुर्ला,
#मुंबई पुलिस अधिकारियों ने 28 जनवरी 2017 को इस अर्जी का लिखित स्वरूप में
उत्तर दिया है। उसमें यह प्रस्तुत किया गया है कि, ‘कायदा-सुव्यवस्था का
प्रश्न निर्माण होने की संभावना होने के कारण (अवैध भोंपूओं पर)कार्रवाई
नहीं की गई है !’ इस का अर्थ यह होता है कि, क्या न्यायालय के आदेश देने के
पश्चात भी अवैध #भोंपूओं पर कार्यवाई करने से पुलिस डरती हैं ?
वर्ष
के 365 दिन #ध्वनिप्रदूषण करने वाले मस्जिदों के भोंपूओं की ओर अनदेखा
करने वाली यही पुलिस गणेशोत्सव तथा नवरात्रोत्सव में हिन्दुओं के त्यौहारों
के समय लाठी के बल पर हिन्दुओं पर त्वरित याचिका प्रविष्ट करती है।
क्या
पुलिस को यह बात स्वीकार है कि, मा. उच्च न्यायालय का आदेश तथा भारत के
अधिनियम की अपेक्षा #मस्जिदों पर से बजनेवाले अवैध भोंपू अधिक श्रेष्ठ है ?
अतः ‘मस्जिदों पर भोंपूओं द्वारा प्रसारित की जाने वाली तथा जनता की नींद
उड़ाने वाली ‘अजान’ एक #गुंडागर्दी ही है’ ।
यह
सुविख्यात प्रसिध्द #गायक #सोनू_निगम द्वारा व्यक्त की गई भावना वास्तविक
ही है । देश के करोड़ो #हिन्दू नागरिकों की सहनशीलता का अंत शासन अधिक समय
तक न देखे’, ऐसी प्रतिक्रिया हिन्दू जनजागृति समिति द्वारा प्रसारित किए गए
प्रसिद्ध पत्रक में कही गई है।
प्रसिद्ध
पत्रक में हिन्दू जनजागृति समिति ने यह आवाहन किया है कि, ‘ #तीन तलाक’ के
संदर्भ में इस्लाम की स्थापना से शरीयत में होने के कारण उसमें परिवर्तन
करने के लिए विरोध करनेवाले मुल्ला मौलावीं को सरकार यह प्रश्न पूछें कि,
यदि #इस्लाम की स्थापना के समय ये भोंपुं अस्तित्व में ही नहीं थे, तो उसका
आग्रह क्यों किया जाता है ? #मुल्लाओं के मतानुसार इस्लाम यदि अन्य धर्मों
के प्रति संवेदना व्यक्त करनेवाला पंथ है, तो देश के अधिनियम की ओर अनदेखा
कर रुग्ण, वृद्ध तथा सर्वसाधारण जनता को कष्ट देनेवाले भोंपुओं द्वारा
अजान किस लिए दी जाती है ? इससे पूर्व सत्ता में होने वाले कांग्रेस सरकार
ने मस्जिदों पर भोंपुओं द्वारा अजान प्रसारित करने के लिए अनुमती देकर यह
समस्या का निर्माण किया है !
अब
देश में तथा राज्य मे शासन परिवर्तित हुआ है। अतः नए #भाजपा सरकार ने इस
लांगूलचालन पर प्रतिबंध डालना चाहिए। यदि चीन की साम्यवादी सरकार इस संदर्भ
में कडी भूमिका अपनाती है, तो भाजपा सरकार ने भी अवैध रूप से की जानेवाली
यह गुंडागर्दी को प्रतिबंधित करना चाहिए !’ स्त्रोत : दैनिक सनातन प्रभात
आपको
बता दे कि चीन ने पहले मस्जिदों पर से #लाऊड_स्पीकर हटा दिया गया था बाद
में नमाज पढ़ने और रोजा रखने पर प्रतिबंध लगाया।  अब #दाढ़ी रखने और
महिलाओँ के नकाब पहनने पर प्रतिबंध लगा दिया है। यह नियम न मानने वालो पर
देशद्रोह का केस चलाया जाता है ।
बता
दे की मुस्लिम बाहुल देश इसरायल में लाऊड स्पीकर पर बेन लग रही है और यहाँ
#न्यायालय के आदेश होने के बाद भी सरकार रोक नही लगा रही है?
हिंदुओं
के लिये तुरन्त कार्यवाही करने वाली #सरकार मुसलमानों द्वारा रास्ते में
नमाज पढ़ने पर कई इलाकों में ट्रैफिक जाम होने की समस्या से आम जनता की
परेशानी को देखते हुए भी उस पर रोक नही लगा रही, बड़ा आश्चर्य है ।
आपको
बता दें कि फ्रांस के #पेरिस में #ISI के हमले के बाद फ्रांस में कई
मस्जिदों को ताला लगा दिया था और कई मस्जिदों तोड़ दी गई थी ।
 इन
मस्जिदों में #धार्मिक विचारों के प्रचार के नाम पर कट्टरवादी(देश
विरोधी)#शिक्षा दी जाती है। कई मस्जिदों पर छापे के दौरान जेहादी #दस्तावेज
बरामद किए गए है। जेहादी प्रचार सामग्री मिली ।
फ़्रांस
ने तो समझ लिया कि देश को तोड़ने के लिये विदेशी फण्ड से चलने वाली
मस्जिदों में आतंकवादी बनने की ट्रेंनिग दी जाती है और देश विरोधी बातें
सिखाई जाती है ।
 #देश
में #हिंदुओं पर #मुस्लिमों के बढ़ते आतंक की हालत देखकर #भारत_सरकार को
फ्रांस चीन, इजरायल से सीख लेनी चाहिए और मुस्लिमों की बढ़ती संख्या पर
नियंत्रण करना चाहिये ।
आज लव जिहाद के लिए विदेश से पैसा आता है और #ISIS में जो मुस्लिम #युवक- #युवतियाँ भर्ती होने जाते है उस पर रोक लगनी चाहिए ।
देश
को बाहरी #आतंकवादियो से इतना खतरा नही जितना इन जिहादियों से है इसलिए
सरकार को जाँच करवानी चाहिए कि विदेशी फंड से जितनी भी मस्जिदें चल रही है
उसमें जो देश विरोधी बातें सिखाई जाती है ऐसे  मदरसों और मस्जिदों को बंद
कर देना चाहिए जिससे देश सुरक्षित रहें और सुख शांति बनी रहें ।
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टी राजा सिंह द्वारा राम मंदिर बनाने और गौरक्षा के लिए बोलने पर मीडिया में आया भूचाल..

टी राजा सिंह द्वारा राम मंदिर बनाने और गौरक्षा के लिए बोलने पर मीडिया में आया भूचाल..
हिंदुस्तानियों
को एक बात गौर करने जैसी है कि जब भी देश के हित के लिए,कोई भी #हिंदुत्व
का कार्य करने आगे बढ़ते हैं तब मीडिया उनके पीछे पड़ जाती है और उनको किसी
भी तरह गिराने का काम करती है ।
आपने
देखा होगा कि जब से #उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार आने वाली
थी तब से लेकर आज तक कुछ मीडिया और खासकर #बीबीसी न्यूज कैसी मंगढ़तन बातें
योगी जी के खिलाफ लिख रही है।
T Raja Singh – Media Hindu
क्या भारत में शान्ति लाना नही चाहती बीबीसी..? क्यों इतना घबरा गई है #हिंदुत्वनिष्ठों से ???
अगर
आप बीबीसी न्यूज को थोड़ा ध्यान देकर देखेंगे और पढ़ेंगे तो आपको पता चलेगा
कि ये पूरा #मुस्लिम समुदाय के पक्ष में है और हिंदुत्वनिष्ठों के खिलाफ
खड़ा हैं ।
जब-जब मुस्लिम
समुदाय के कुछ असामाजिक लोगों द्वारा आतंक फैलाया गया तब तब बीबीसी न्यूज
मौन रहा पर जैसे ही देश की शांति के लिए हिंदुत्वनिष्ठ उनको जवाब देते हैं
तब वो उनके खिलाफ बोलना शुरू कर देता है ।
भारत
में अल्पसंख्यक #मुस्लिमों की चिंता करने वाले बीबीसी न्यूज ने पाकिस्तान
और बंग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहा अत्याचार पर क्यों चुप्पी साध ली है !!
जिस भारत ने विश्व को शांति और भाईचारे का पाठ पढ़ाया, वहां #अशान्ति का वातावरण बनाने में मीडिया का बड़ा हाथ है ।
क्यों योगी जी सत्ता पर आते ही मीडिया की आँख की किकरी बन गए ?
तेलंगाना,
भारतीय जनता पार्टी विधायक टी राजा सिंह ने भी (भारत लुटेरे #बाबर ने
रामजी का मंदिर तोड़कर मस्जिद बनवाया था ) जब फिर से #राम मंदिर बनाने के
लिए आवाज उठायी तो मीडिया को परेशानी क्यों हुई ?
टी.
राजा सिंह ने #बीबीसी न्यूज के सवांदाता को करारा जवाब देते हुए कहा कि,
“राम मंदिर बनाना हर हिंदू का संकल्प है और मेरा भी संकल्प है । #हिंदू हो
या मुस्लिम सिख हो या ईसाई अगर कोई भी राम मंदिर के बीच में आता है तो हम
हमारे #प्राण दे भी सकते हैं और हम अगले के प्राण ले भी सकते हैं” ।
उन्होंने
आगे कहा कि “अगर कोई बात से नहीं मानता है तो हम हर प्रकार से तैयार हैं ।
बस हमारा लक्ष्य #अयोध्या में राम मंदिर बनाना है । उसके लिए हम हर तरह से
तैयार हैं । “विधायक से पहले मैं एक #हिंदू हूँ । मैं अपना कर्तव्य निभा
रहा हूँ ।”
टी राजा सिंह ने 1999 में #श्रीराम युवा सेना व गोरक्षा दल का निर्माण किया और तभी से गौहत्या का विरोध शुरु किया ।
गोरक्षा
के मुद्दे पर टी राजा $सिंह राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रमुख मोहन
भागवत के हॉल में कहते हैं कि “मैं मोहन #भागवत के उस बयान का समर्थन करता
हूँ कि जो गोरक्षा के लिए है।
वो किसी के ऊपर हमला न
करें । लेकिन जब हम गोरक्षा को जाते हैं । #ट्रक पकड़ते हैं, तब अगर उनकी
ओर से हमला होता है तो सेल्फ डिफेंस तो करना होगा । नहीं तो हम मारे जाएंगे
।”
गाय का महत्व अगर कोई
व्यक्ति जान लेता है तो गाय की हत्या पर वो आपा खो बैठता है । उन्होंने कहा
कि,” #गाय से बढ़कर हमारे लिए कुछ नहीं है”
#गौमाता को चराने स्वयं भगवान श्री कृष्ण जाते थे उनको बचाने के लिए अगर गौ रक्षक कुछ भी करें तो कोई गलत नही हो सकता ।
अब तो उत्तरप्रदेश में शिया समुदाय के मुस्लिमों ने गोहत्या रोकने के लिए  ‘शिया गो-रक्षा दल’ भी बना लिया है ।
गुजरात
के #मुख्यमंत्री विजय रूपानी ने भी कहा है कि “गाय हमारी मां है और यह
हमारे लिए विश्वास की बात है, हमारी सरकार को ऐसे लोगों से कोई सहानुभूति
नहीं है जिनको गायों के प्रति कोई दया नहीं है।”
विजय
रूपानी ने आगे कहा कि राज्य सरकार ने गाय और उसकी संतान को मारने से रोकने
के लिए सख्त कानून बनाए हैं। गाय में प्रजनन के माध्यम से #गांवों में
कमाई का एक तरीका भी है। हम चाहते हैं कि गुजरात में एक बार फिर घी और दूध
की नदियों बहें।
गौमाता हमारे लिए कितनी उपयोगी है जानने के लिए नीचे दी गई लिंक पर क्लिक करें ।
गाय
आर्थिक रूप से तो समृद्धि देने वाली है ही साथ-साथ में गाय का होना भी
वातावरण में शुद्धि लाता है एवं गाय माता का #दूध, #दही, #छाछ, #मक्खन,
#घी, #मूत्र एवं #गोबर मनुष्य के लिए वरदानस्वरूप है इसके उपयोग से मनुष्य
स्वस्थ्य और सुखी जीवन जी सकता है ।
अतः गौ माता की रक्षा करना हितकारी है और गौ हत्या करना विनाश का संकेत है।

जानिए क्यों मनाया जाता है गुरुपूर्णिमा महोत्सव ?

🚩जानिए क्यों मनाया जाता है #गुरुपूर्णिमा महोत्सव?
🚩19 जुलाई 2016
🚩गुरुपूर्णिमा #भारत में #अनादिकाल से मनायी जाती है तथा कई #देशों – जैसे #दक्षिण_अमेरिका, #यूरोप, #मिस्र, #मेसोपोटेमिया, तिब्बत, #चीन,#जापान आदि में भी मनायी जाती थी ।
🚩परंतु वहाँ परमात्मा का साक्षात्कार किये हुए #व्यासजी जैसे महापुरुष और उनके उद्देश्य को ठीक से समझनेवाला समाज नहीं हो पाया । भारत में ही ऐसे #महापुरुषों की परम्परा बनी रही और महापुरुषों से लाभ लेकर अपनी सात पीढ़ियाँ तारनेवाले सत्पात्र भी इसी देश में होते रहे हैं, इसलिए अभी भी भारत में #व्यासपूर्णिमा का महोत्सव सुरक्षित है ।
🚩#माता-पिता की सेवा करना सन्तान का धर्म है । पर गुरु की महत्ता उनसे भी बड़ी है क्योंकि माता पिता केवल शरीर को जन्म देते हैं । शरीर का रक्षण और पोषण करते हैं पर गुरु द्वारा आत्मा का विकास, कल्याण एवं बन्धन मुक्ति का जो महान कार्य सम्पन्न किया जाता है, उसकी महत्ता शरीर पोषण की अपेक्षा असंख्यों गुनी अधिक है। इसी तथ्य को ध्यान में रखकर-मनुष्य जीवन में आध्यात्मिकता को समझने वाले ऋषियों ने गुरुपूर्णिमा का पुनीत पर्व की शुरुआत की ।
gurupurnima- jago hindustani,
🚩#हिन्दू_धर्म में प्रचलित अन्य सभी #त्यौहारों की अपेक्षा गुरु पूर्णिमा का महत्व अधिक माना गया है। क्योंकि सन्मार्ग के प्रेरक सभी व्रतों पर्वों त्यौहारों से लाभ उठाया जा सकना तभी सम्भव है जब #सद्गुरुओं द्वारा उनकी उपयोगिता एवं आवश्यकता सर्व साधारण को अनुभव कराई जा सके। यदि मार्गदर्शक एवं प्रेरक सद्गुरुओं का अभाव हो जाए, उनकी बात पर ध्यान न दें तो पर्व त्यौहारों एवं #धर्म #शास्त्रों से लाभ उठा सकना जनता के लिए सम्भव न हो पायेगा। #धर्मग्रन्थ घरों में रखे तो रहेंगे, उनके पाठ पूजन भी होते रहेंगे पर उनमें वर्णित तथ्यों में अभिरुचि तो गुरु प्रेरणा बिना कैसे उत्पन्न हो सकेगी? इसी प्रकार सारे त्यौहारों की चिन्ह पूजा होती रहेगी, लोग उन अवसरों पर मिठाई मलाई खाते रहेंगे, हँसी खुशी मनाते रहेंगे पर उनके द्वारा जो कल्याणात्मक प्रवृत्तियाँ विकसित होनी चाहिएं वे गुरु के बिना सम्भव न हो सकेंगी।
🚩#महाभारत, #ब्रह्मसूत्र, #श्रीमद् भागवत आदि के रचयिता #महापुरुष #वेदव्यासजी के #ज्ञान का मनुष्यमात्र लाभ ले, इसलिए #गुरुपूनम को देवताओं ने वरदानों से सुसज्जित कर दिया कि जो सत्शिष्य सद्गुरु के द्वार जायेगा, उनके उपदेशों के अनुसार चलेगा उसे 12 महीनों के व्रत-उपवास करने का फल इस पूनम के व्रत-उपवास मात्र से मिल जायेगा ।
🚩ब्रह्मवेत्ताओं के हम ऋणी हैं, उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए तथा उनकी शिक्षाओं का स्मरण करके उन पर चलने की प्रतिज्ञा करने के लिए हम इस पवित्र पर्व गुरुपूर्णिमा को मनाते हैं ।
🚩#राष्ट्रीय पर्व के रूप में क्यों नहीं मनाया जाय गुरुपूर्णिमा?
🚩#स्कूली #छात्रों में दिन-दिन बढ़ रही उद्दंडता, अनुशासन की हीनता और धर्म पथ के पथिकों में बढ़ रही अवज्ञा और अनास्था को देखकर देश में सभी विचार शील लोग चिन्तित हैं और इसका समाधान गुरु-शिष्य परम्परा से ही हो सकता है । राष्ट्र निर्माण के लिए आज जिस प्रकार वर्तमान में केन्द्र व राज्य सरकार विभिन्न योजना के अंतर्गत विकास का कार्य कर रही है उसी प्रकार युग निर्माण के लिए भी हमें अपनी #सांस्कृतिक परम्पराओं को पुनः सुव्यवस्थित करना होगा । इसके लिए गुरुतत्व की महिमा को अक्षुण्य रखना एवं उसकी महत्ता से जन साधारण को परिचित कराना भी एक आवश्यक कदम होगा । इससे जहाँ जनमानसमें अपने मार्ग दर्शकों के प्रति पनपने वाली अनास्था एवं कृतघ्नता घटेगी ।
🚩गुड फ्राइडे के दिन छुट्टी हो, ईद के दिन छुट्टी हो, क्रिसमस-डे के दिन छुट्टी हो, विभिन्न दिवसों पर भी सरकारी छुट्टी घोषित की जाती है । हमें मनाही नहीं लेकिन इतने बड़े पर्व जो जनमानस को अंधकार से प्रकाश की ओर प्रेरित करता है । उसके लिए छुट्टी की घोषणा नहीं होनी चाहिए ? इसे राष्ट्रीय पर्व के रूप में नहीं मनाया जाना चाहिए ? वर्तमान समाज में गुरु-शिष्य परम्परा अति ही आवश्यक है । इस परम्परा को संत-महापुरुषों पल्वित-पुष्पित करते हैं । लेकिन वर्तमान में #षड्यंत्र के तहत इन महापुरुषों पर झूठे आरोप लगाकर बदनाम व जेल में डाल दिया जा रहा है । इसका बहुत ही बड़े उदाहरण है। #शंकराचार्य जयेन्द्र सरस्वती जी, स्वामी #असीमानन्द, संत #आशारामजी बापू, साध्वी प्रज्ञा, स्वामी अमृतानन्द जी ।
🚩इस तरह के #संस्कृति पर हो रहे प्रहार से #भारतीय संस्कृति को गहरा आघात पहुँच रहा है । ऐसे षड्यंत्र को समझना होगा और जनमानस को इसके खिलाफ आवाज भी उठानी होगी । भारतवासी अब नहीं जागोगे तो कब जागोगे ?
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महंत नरेंद्रगिरिजी महाराज : संतों की छवि को धूमिल करने का प्रयास किया जा रहा है

 🚩श्री #महंत नरेंद्रगिरिजी महाराज की #मीडिया से वार्तालाप…!!!

💥मीडिया : #स्वामीजी, क्या #भारतीय #संस्कृति के #संतों की छवि को धूमिल करने का प्रयास किया जा रहा है???
💥स्वामीजी : ये तो आप आज कह रहे हैं हम तो वर्षों से कह रहे हैं कि #विदेशी #ईसाई मिशनरियाँ काम कर रही है और #सनातन धर्म के संतो को बदनाम करने के लिए ही उन्हें गलत दिखाया जा रहा है  । (झूठे आरोपों द्वारा बदनाम करने का प्रयास )
💥आप देखिये! ऐसी घटनाएँ और धर्मो में भी होती है पर उसे एक मिनट में दिखा कर बंद कर दिया जाता है। लेकिन सनातन धर्म के #हिन्दू संतो के खिलाफ दिन-रात दिखाया जाता है ।
jago hindustani – महंत नरेंद्रगिरिजी महाराज – Mahant Shri NarendraGiri ji Maharaj
💥पहली बात तो यह सत्य नहीं होता है सब मनगढ़त होता है फिर भी सालों तक दिखाया जाता है ताकि सनातन धर्म के #साधु-संतो में जो आस्था है वो खत्म हो जाये ।
💥सनातन धर्म पर #षड़यंत्र आज से नहीं, बहुत पहले से हो रहा है ।
💥मैं एक बात मानता हूँ कि संत #आसारामजी बापू पर एक आरोप लगाया गया है उसी #आरोप में दूसरे की जमानत हो रही है पर संत आसारामजी बापू की क्यों नहीं हो रही है…???
💥#सनातन #धर्म के संत #आसारामजी बापू का जो दैवी कार्य है वो बहुत अच्छा है । उनके साथ पूरा साधु-समाज है ।
💥आज जो तमाम न्यूज़ चैनल है वो अपनी #TRP बढ़ाने के लिये और विदेशी पैसे के चक्कर में सनातन धर्म के हिन्दू साधु-संतो को गलत दिखाकर बदनाम कर रहे हैं ।
💥इससे युवावर्ग को होशियार हो जाना चाहिए । जितने युवा आये हमारे पास उन्होंने कहा कि साधु-संतो की परम्परा वो कुम्भ मेले में दिख रही है और #टीवी के माध्यम की परम्परा गलत है ।
💥मै इतना कहूँगा कि संत आसारामजी बापू को परेशान किया जा रहा वो गलत है ।
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महात्मा कबीरदासजी का जीवन परिचय : २० जून कबीरदास जयंती

🚩#महात्मा #कबीर का जीवन परिचय

20 जून 2016 #जयंती
💥जन्म-काल
💥#महात्मा कबीर का जन्म ऐसे समय में हुआ, जब #भारतीय समाज और धर्म का स्वरुप अधंकारमय हो रहा था। भारत की #राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक एवं धार्मिक #अवस्थाएँ सोचनीय हो गयी थी।
💥 एक तरफ #मुसलमान #शासकों की #धर्मान्धता से #हिन्दू त्राहि- त्राहि कर रहे थे  और दूसरी तरफ कई हिंदूओं के कर्मकांडों, विधानों एवं पाखंडों से धर्म- बल का ह्रास हो रहा था।
💥जनता के भीतर भक्ति- भावनाओं का सम्यक प्रचार नहीं हो रहा था। सिद्धों के पाखंडपूर्ण वचन, समाज में वासना को प्रश्रय दे रहे थे।
💥#नाथपंथियों के अलख निरंजन में लोगों का ह्रदय रम नहीं रहा था। ज्ञान और भक्ति दोनों तत्व केवल ऊपर के कुछ धनी, पढ़े- लिखे लोगों की बपौती के रुप में दिखाई दे रहा था।
💥ऐसे नाजुक समय में एक बड़े एवं भारी समन्वयकारी महात्मा की आवश्यकता समाज को थी, जो राम और रहीम के नाम पर आज्ञानतावश लड़ने वाले लोगों को सच्चा रास्ता दिखा सकें। ऐसे ही संघर्ष के समय में, मस्तमौला कबीर जी का प्रार्दुभाव हुआ।
💥जन्म…
💥महात्मा कबीर के जन्म के विषय में भिन्न- भिन्न मत हैं। “कबीर कसौटी’ में इनका जन्म संवत् 1455 दिया गया है।
💥 “”भक्ति- #सुधा- बिंदु- स्वाद” में इनका जन्मकाल संवत् 1451 से संवत् 1552 के बीच माना गया है।
💥 “”कबीर- चरित्र- बाँध” में इसकी चर्चा कुछ इस तरह की गई है, संवत् चौदह सौ पचपन (1455) विक्रमी ज्येष्ठ सुदी पूर्णिमा सोमवार के दिन, एक प्रकाश रुप में सत्य पुरुष काशी के “लहर तारा” (लहर तालाब) में उतरे।
💥उस समय पृथ्वी और आकाश प्रकाशित हो गये। समस्त तालाब प्रकाश से जगमगा गया। हर तरफ प्रकाश ही प्रकाश दिखने लगा, फिर वह प्रकाश तालाब में ठहर गया। उस समय तालाब पर बैठे अष्टानंद वैष्णव आश्चर्यमय प्रकाश को देखकर आश्चर्य- चकित हो गये। लहर तालाब में महा- ज्योति फैल चुकी थी। #अष्टानंद जी ने यह सारी बातें #स्वामी #रामानंद जी को बतलायी, तो स्वामी जी ने कहा कि वह प्रकाश एक ऐसा प्रकाश है, जिसका फल शीघ्र ही तुमको देखने और सुनने को मिलेगा तथा देखना उसकी धूम मच जाएगी ।
💥एक दिन वह प्रकाश एक बालक के रुप में जल के ऊपर कमल- पुष्पों पर बच्चे के रुप में पाँव फेंकने लगा।
💥 इस प्रकार एक #पुस्तक कबीर के जन्म की चर्चा करती है :-
💥“”चौदह सौ पचपन गये, चंद्रवार, एक ठाट ठये।
जेठ सुदी बरसायत को पूनरमासी प्रकट भये।।”
💥जन्म स्थान
💥कबीर ने अपने को काशी का जुलाहा कहा है। कबीर #पंथी के अनुसार उनका निवास स्थान काशी था। बाद में कबीर एक समय #काशी छोड़कर मगहर चले गए थे। ऐसा वह स्वयं कहते हैं :-
💥“”सकल जनम शिवपुरी गंवाया।
मरती बार मगहर उठि आया।।”
💥कहा जाता है कि कबीर का पूरा जीवन काशी में ही गुजरा, लेकिन वह मरने के समय मगहर चले गए थे।
वह न चाहकर भी मगहर गए थे।
💥“”अबकहु राम कवन गति मोरी।
तजीले बनारस मति भई मोरी।।”
💥कहा जाता है कि निंदकों ने उनको मगहर जाने के लिए मजबूर किया था। वह चाहते थे कि आपकी मुक्ति न हो पाए, परंतु कबीर तो काशी मरन से नहीं, राम की भक्ति से मुक्ति पाना चाहते थे :-
💥“”जौ काशी तन तजै कबीरा
तो रामै कौन निहोटा।”
💥कबीर के माता- पिता
💥कुछ लोगों के अनुसार वे रामानन्द स्वामी के आशीर्वाद से काशी की एक विधवा ब्राह्मणी के गर्भ से पैदा हुए थे, जिसको भूल से रामानंद जी ने पुत्रवती होने का आशीर्वाद दे दिया था। ब्राह्मणी उस नवजात शिशु को लहरतारा ताल के पास फेंक आयी।
💥कबीर के माता- पिता के विषय में एक राय निश्चित नहीं है कि कबीर “नीमा’ और “नीरु’ की वास्तविक संतान थे या नीमा और नीरु ने केवल इनका पालन- पोषण ही किया था।  कहा जाता है कि नीरु जुलाहे को यह बच्चा लहरतारा ताल पर पड़ा पाया, जिसे वह अपने घर ले आये और उसका पालन-पोषण किया। बाद में यही बालक कबीर कहलाया।
💥कबीर ने स्वयं को जुलाहे के रुप में प्रस्तुत किया है –
💥“जाति जुलाहा नाम कबीरा
बनि बनि फिरो उदासी।’
💥#ग्रंथ साहब के एक पद से विदित होता है कि कबीर अपने वयनकार्य की उपेक्षा करके हरिनाम के रस में ही लीन रहते थे।
💥पत्नी और संतान…
💥कबीरजी की पत्नी का नाम लोई था।
💥जनश्रुति के अनुसार कबीर के एक पुत्र कमल तथा पुत्री कमाली थी। इतने लोगों की परवरिश करने के लिये उन्हें अपने घर पर काफी काम करना पड़ता था। साधु संतों का तो घर में जमावड़ा रहता ही था।
💥कबीर जी की दीक्षा
💥श्री रामानंदजी से दीक्षा लेने के लिए एक दिन कबीर #पञ्चगंगा घाट की सीढ़ियों पर सो गए थे, रामानन्द जी उसी समय गंगास्नान करने के लिये सीढ़ियाँ उतर रहे थे कि उनका पैर कबीर के शरीर पर पड़ गया। उनके मुख से तत्काल `राम-राम’ शब्द निकल पड़ा। उसी राम को कबीर ने दीक्षा-मन्त्र मान लिया और रामानन्द जी को अपना गुरु स्वीकार कर लिया। कबीर के ही शब्दों में- `हम का सही में प्रकट भये हैं, रामानन्द चेताये’।
💥उस समय हिंदु जनता पर #मुस्लिम आतंक का कहर छाया हुआ था। कबीर ने अपने पंथ को इस ढंग से सुनियोजित किया जिससे मुस्लिम मत की ओर झुकी हुई जनता सहज ही इनकी अनुयायी हो गयी। उन्होंने अपनी भाषा सरल और सुबोध रखी ताकि वह आम आदमी तक पहुँच सके। इससे दोनों सम्प्रदायों के परस्पर मिलन में सुविधा हुई। इनके पंथ मुसलमान-#संस्कृति और गोभक्षण के विरोधी थे।
💥अन्य जनश्रुतियों से ज्ञात होता है कि कबीर ने हिंदु-मुसलमान का भेद मिटा कर हिंदू-भक्तों तथा मुसलमान फक़ीरों का #सत्संग किया और दोनों की अच्छी बातों को आत्मसात कर लिया।
💥आप के समस्त विचारों में रामनाम की महिमा प्रतिध्वनित होती है। वे एक ही ईश्वर को मानते थे और कर्मकाण्ड के विरोधी थे।
💥कबीर के नाम से मिले ग्रंथों की संख्या भिन्न-भिन्न लेखों के अनुसार भिन्न-भिन्न है। एच.एच. विल्सन के अनुसार कबीर के नाम पर आठ ग्रंथ हैं। विशप जी.एच. वेस्टकॉट ने कबीर के ८४ ग्रंथों की सूची प्रस्तुत की तो रामदास गौड ने `हिंदुत्व’ में ७१ पुस्तकें गिनायी हैं।
💥कबीर की वाणी का संग्रह `बीजक’ के नाम से प्रसिद्ध है। इसके तीन भाग हैं- रमैनी, सबद और सारवी यह #पंजाबी, #राजस्थानी, खड़ी बोली, #अवधी, पूरबी, व्रजभाषा आदि कई #भाषाओं की खिचड़ी है।
💥कबीर परमात्मा को मित्र, माता, पिता और पति के रूप में देखते हैं। यही तो मनुष्य के सर्वाधिक निकट रहते हैं। वे कभी कहते हैं-
💥`हरिमोर पिउ, मैं राम की बहुरिया’ तो कभी कहते हैं, `हरि जननी मैं बालक तोरा’
💥119 वर्ष की अवस्था में मगहर में कबीर का देहांत हो गया। कबीरदास जी का व्यक्तित्व संत कवियों में अद्वितीय है। हिन्दी साहित्य के 1200 वर्षों के इतिहास में गोस्वामी तुलसीदास जी के अतिरिक्त इतना प्रतिभाशाली व्यक्तित्व किसी कवि का नहीं है।
💥कबीरजी जैसे संत का भी निंदकों ने किया था #दुष्प्रचार
💥कबीरजी को निंदक लोग कहते थे कि तुम बिगड गये । ‘बिगड गये… बिगड गये प्रचार करके कबीरजी के यहाँ #षडयंत्रकारियों ने एक वेश्या भेजी । कबीरजी उस समय सत्संग कर रहे थे । भरी सभा के बीच आकर वेश्या कहती है : “क्यों बलमा ! रात भर तो बिस्तर पर मेरे साथ थे और अभी संत होकर बैठे हो ! तुमने कहा था कि तेरा हाथ नहीं छोडूँगा और अभी भूल गये, बलमा !
💥कबीरजी समझ गये कि यह कुप्रचार करनेवालों की भेजी हुई  कठपुतली है । वे बोले : “नहीं… हम हाथ क्यों छोडेंगे ?
💥वेश्या : “तो फिर चलो न मेरे साथ ।
💥कबीरजी ने ‘चलो कहकर वेश्या का हाथ पकड लिया । आज तक तो निंदक अफवाह फैलाते थे कि ‘कबीर #मांसाहारी है… कबीर #वेश्यागामी है… कबीर शराबी है… लेकिन आज तो सचमुच में कबीरजी ने वेश्या का हाथ पकड लिया और बाजार में निकल पडे एक हाथ में बोतल है और दूसरे हाथ में #वेश्या का हाथ ।
💥निंदकों को कुप्रचार का और मौका मिल गया । उन्होंने काशीनरेश को जाकर बहकाया : “आप जिसको गुरु मानते हो, देखो जरा उसके कारनामें । आपकी बुद्धि, मति भी मलिन हो गई है । ऐसे आदमी को गुरु मानकर उसकी पूजा करने से आपके राज्य का अनिष्ट होनेवाला है । धर्म का नाश कर दिया है आपने । धर्म खतरे में है ।
💥संत कबीरजी के ऊपर लांछन लगे काशीनरेश कहता है कि “महाराज ! अभी भी सुधर जाओ तो मैं आपको माफ कर सकता हूँ । पण्डे आज तक तो आपके खिलाफ बकवास करते थे लेकिन आज तो आपके एक हाथ में वेश्या का हाथ और दूसरे हाथ में शराब की बोतल देखकर मुझे कहना पडता है कि महाराज ! आप क्यों बिगड गये ? आपकी इज्जत का सवाल है । मेरे जैसा शिष्य, मेरे जैसा काशीनरेश आपके आगे मस्तक झुकाता है और फिर आप वेश्या का हाथ पकडे हुए, शराब की बोतल हाथ में लिये हुए हैं !…
💥कबीरजी बोलते हैं :
💥सुनो मेरे भाइयो ! सुनो मेरे मितवा !
💥कबीरो बिगड गयो रे ।
💥दही संग दूध बिगड्यो, मक्खनरूप भयो रे ।
💥पारस संग भाई ! लोहा बिगड्यो,
💥कंचनरूप भयो रे । कबीरो बिगड गयो रे ।
💥संतन संग दास कबीरो बिगड्यो-२
💥संत कबीर भयो रे । कबीरो बिगड गयो रे ।
💥अपनी मान्यता का जो अहं था वह बिगड गया । अहं बिगड गया तो आदमी का चित्त परमात्मा में स्थिर हो जाता है । संत कबीरजी कह रहे हैं काशीनरेश की सभा में… इतने में कबीरजी के हाथ में जो बोतल थी दारू की, दारू तो थी नहीं दारू की जगह पानी भरा था, कबीरजी ने उसकी धार कर दी ।
💥काशीनरेश ने पूछा :”महाराज ! यह क्या किया, दारू क्यों गिरा दी ?
💥बोले :”#जगन्नाथपुरी में भगवान का प्रसाद बनानेवाले रसोइये के कपडों में आग लगी है, जरा मैं वह बुझा रहा हूँ ।
💥“जगन्नाथपुरी और यहाँ… !
💥बोले :”हाँ ।
💥आदमी भेजे गये तो देखा कि जगन्नाथपुरी में वास्तव में आग लगी थी और एकाएक कुछ गीला-गीला-सा हो गया और वह आदमी बच गया । फिर काशीनरेश को अपनी गलती महसूस हुई कि यह संत को बदनाम करने का कोई #षड्यंत्र था । उसने कबीरजी से माफी माँगी ।
💥कबीर को शांतिमय जीवन प्रिय था और वे #अहिंसा, #सत्य, #सदाचार आदि गुणों के #प्रशंसक थे। वे सरलता, #साधु स्वभाव तथा संत प्रवृत्ति के थे । लेकिन हर युग में संतों के विरोधी आ ही जाते है उस समय जब कबीर जी का चारों तरफ अपार यश हो रहा था तब दुष्टों ने उनपर चारित्रिक लांछन लगाये, जनता को उनके विरोध में कर दिया, उनकी बहुत निंदा की ।
💥 लेकिन संत हमेशा समत्व भाव में रहते है वे दुष्ट निंदक कौन से नरक में होंगे पता नही लेकिन आज भी कबीर जी सबके ह्रदय में स्थान रखते है । चारोँ तरफ अपार यश कीर्ति है आज विदेशों में भी उनका समादर हो रहा है।
💥भाग्यशाली है वो समाज जो हयात संतो के सानिंध्य में अपने जीवन को उचित दिशा दे पाया है ।
💥किसी भी सच्चे संत के जीवन चरित्र पर दृष्टि डाले तो हम देखते है कि उनके लाखों करोड़ो प्रशंसको के साथ-साथ उनके हयाती काल में उनके निंदक भी थे । जिन्होंने संत की निंदा करके उनके यश को अपयश में बदलने का प्रयास किया पर सच्चे संतो का बाल भी बांका नही कर पाये इसका प्रयत्क्ष उदहारण है संत कबीर जी का यश…!!!
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200 करोड़ विदेशी NGOs ने धर्मपरिवर्तन में खर्च किए

🚩#बिदेशी पैसों से चल रहे #NGO #धर्मपरिवर्तन और #देश को तोड़ने का कर रहें हैं घिनौना काम….
देखिये वीडियो👇
💥https://youtu.be/tZVI0aosVfw
💥#खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट ने बताया कि कई NGO #भारत देश में धर्मान्तरण के काम में लगे हुए हैं और इनमें से कई ऐसे है जो बहुत ही छोटी – मोटी घटनाओं को मजहबी रंग देने की साजिश रचते हैं ।
💥#रिपोर्ट के अनुसार 18 ऐसे विदेशी डोनर्स की पहचान हुई है जो भारत में NGO को फ़ण्डिंग करते हैं ताकि #हिंदुओं का #धर्मान्तरण करवाया जा सके । इन विदेशी डोनर्स में #अमेरिका, #दक्षिण कोरिया और #यूरोप शामिल हैं ।
💥#गृहमंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक साल 2013 – 14 में विदेशी डोनर्स ने करीब 12,980 करोड़ रुपये #NGO को दिए उसमें एक हिस्सा हिंदुओं का धर्म परिवर्तन करने में NGO ने लगाया था ।
देखिये वीडियो👇
💥बहुत सारे NGO’s धर्म परिवर्तन के काम में लगे हुए हैं लेकिन पहले ऐसी कोई रिपोर्ट अब तक तैयार नहीं की गई थी अब पहलीबार रिपोर्ट #ख़ुफ़िया एजेंसीस ने जो #गृहमंत्रालय को दी है, उसमें कई फैक्ट है जो चौंकानेवाला रिपोर्ट हैं ।
💥विदेशी पैसों से चलने वाले NGO’S धर्मपरिवर्तन ही करा रहे हैं ऐसा ही नहीं है बल्कि छोटी-छोटी घटनाओं को सांप्रदायिक बनाने की कोशिश करके भारत देश का माहोल भी खराब कर रहें हैं ।
रिपोर्ट में दो तरीके की बातें हैं, एक तो धर्म परिवर्तन करने वाले NGO’s की पहचान हुई है और भारत को बदनाम करने के लिए कैसे साजिश रची जा रही है, इसके लिए काफी ज्यादा मात्रा में विदेशों से NGO’s को पैसे मिलते हैं ।
💥उसमें से करीब-करीब 200 करोड़ रुपये मोटा-मोटा एक डेटा तैयार किया गया है, वो पैसा जो Conversion होता है । उसमें खर्च किये जा रहैं हैं ।
💥उसमें #छत्तीसगढ़, #झारखण्ड, #गुजरात, मध्यप्रदेश, #उत्तरप्रदेश आदि कई राज्यों  में गरीब आदिवासियों में धर्म परिवर्तन कराने के लिए बड़े पैमाने पर इस पैसों का उपयोग हो रहा है ।

💥“उसमे से तीस्ता #सीतलवाड़ के “सबरंग NGO’s” का #FCRA लाइसेंस गृहमंत्रालय ने रद्द कर दिया है ।” उस पर विदेशी चंदा विनियम कानून के उल्लंघन का आरोप था ।
देखिये वीडियो👇
💥https://youtu.be/q6iTJq0BY9w

💥गैर #कानूनी कामों में लिप्त विदेशी फंड से चलने वाली NGO’s की इन्क्वाइरी में पता चला की इसके पैसे विदेश से इसलिए आते थे की वो बच्चों की #शिक्षा में उपयोग करें ।
💥लेकिन ये NGO’s देश में जहग-जहग दँगा फैलाने का काम करते हैं । भारत देश को तोड़ने के लिए कई जगहों पर इन्होने दंगे भी करवाये थे ।
इसलिये गृहमंत्रायल ने इनका लाइसेंस रद्द कर दिया है ।
💥अब ये बड़ी चौंकाने वाली #रिपोर्ट है । लेकिन ये बात स्वर्गीय #VHP के श्री #अशोक सिंघल जी ने पहले ही बता दी थी । लेकिन इस बात पर कोई ध्यान नही दे रहा था । भारत को तोड़ने के लिए एक नहीं दो नहीं कई हजारों NGO’s लगे है जो आज से नहीं चल रहे हैं कई सालों से चल रहे हैं ।
देखिये वीडियो👇
💥https://youtu.be/cSeqoDaJ6qU
💥इनका उद्देश्य केवल यही है कि भारत देश को फिर से गुलाम बनाना जाये । उसके लिए ये NGO’s दिन रात काम कर रहें हैं और उनको इसके लिए विदेश से अरबों-खरबों रूपये भेजे जातें हैं ।
💥इन NGO’s के धर्मपरिवर्तन करने में आड़े जो भी आते थे, उन पर उनके ही लोगों द्वारा गुमराह कर झूठा आरोप लगवाकर (जैसे कि आम जनता अच्छी तरह भ्रमित हो जाये) जेल में अथवा तो जान से मारकर अथवा तो कैसे भी साइड करवा दिया जाता है ।
💥पहले का इतिहास आप पढोगे तो पता चलेगा कि महाराणा प्रताप, झांसी की रानी, संभाजी राजे आदि मुगल या अंग्रेजों के हाथों में नहीं आने वाले थे पर उनके ही लोगों को खरीद कर उनके ही लोगों की गद्दारी के कारण वो पकड़ाये गए । ऐसे ही संतों को बदनाम करने के लिये उनके ही लोभी, लालची, गद्दार लोगों का उपयोग करते हैं और मीडिया और राजनैतिक मिलीभगत के कारण बदनाम करके जेल धकेल दिया जाता है । जैसे की काची काम कोटि पीठ के #जयेन्द्र सरस्वती जी, #स्वामी नित्यानंद जी, #साध्वी प्रज्ञा ठाकुर, स्वामी असीमानंद, #स्वामी अवधेशानंद जी, #संत आसारामजी बापू, #नारायण साँई, धनंजय देसाई को जेल डलवाया और लक्ष्मणानंद जी की हत्या करवा दी गई थी ।
💥इन हिन्दू संतों ने, जो NGO’s के कारण #हिन्दू #धर्मपरिवर्तन कर चुके थे ऐसे लाखों हिन्दुओं को घरवापसी करवाई और देश में जहाँ-जहाँ पर धर्मपरिवर्तन कर रहे थे वहाँ-वहाँ जाकर हिन्दू संस्कृति का प्रचार प्रसार किया । जिससे हिन्दूओं का धर्मपरिवर्तन करने में रुकावट आ रही थी । तो कई संतों की हत्या करवा दी जिसे मीडिया में 1 मिनिट भी नहीं दिखाया और कई संतों को मीडिया द्वारा बदनाम करवाकर जेल भेज दिया ।
💥हिन्दू सावधान रहे आपको जो मीडिया में खबरें दिखाई जाती है वो सच नही होती ।मीडिया के मालिक विदेशी हैं और उनका सपना है कि हिन्दू संस्कृति को तोड़कर भारत को गुलाम बनाया जाये ।
💥इसलिए मीडिया हमेशा हिन्दु विरोधी ख़बरें ही दिखाती है ।
💥भारतवासी हमेशा सतर्क रहे, सावधान रहे । अपने देश को तोड़ने वाली ताकतों का सामना करे । हमेशा हिन्दू #भाई-बहनों, #साधू-संतों को सपोर्ट करे । आपसी घरेलू छोटे-मोटे मतभेदों को भुलाकर अपने इस देश के लिए एकजुट रहें ।
🙏🏻जय हिन्द
💥भारत को तोड़ने वाले NGOS की सच्चाई पहुचाने के लिए इस बात सभी #सोशल साइट्स पर #शेयर जरूर करें ।
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धर्मवीर छत्रपति संभाजी राजे जयंती 17 जून

🚩अद्भुत जीवन चरित्र…
धर्मवीर छत्रपति संभाजी राजे…
💥ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष द्वादशी विक्रम सवंत 1571 को पुरंदगढ़ में स्वराज्य के दूसरे छत्रपति शम्भुराजा का जन्म हुआ ।
💥संभाजी #राजा ने अपनी अल्पायु में जो अलौकिक कार्य किए, उससे पूरा हिंदुस्थान प्रभावित हुआ । इसलिए प्रत्येक #हिन्दू को उनके प्रति कृतज्ञ रहना चाहिए ।
💥उन्होंने साहस एवं निडरता के साथ #औरंगजेब की आठ लाख सेना का सामना किया तथा अधिकांश मुगल सरदारों को #युद्ध में पराजित कर उन्हें भागने के लिए विवश कर दिया ।
💥शम्भाजी (1657-1689) #मराठा
#सम्राट और #छत्रपति शिवाजी के उत्तराधिकारी थे ।
💥 उस समय मराठाओं के सबसे प्रबल शत्रु
💥  #मुगलबादशाह औरंगजेब
बीजापुर औरगोलकुण्डा का शासन
#हिन्दुस्तान से समाप्त करने में प्रमुख भूमिका निभा रहे थे ।
💥सम्भाजी अपनी शौर्यता के लिये काफी प्रसिद्ध थे। सम्भाजी ने अपने कम समय के शासन काल मे 120 युद्ध किये और इसमे एक प्रमुख बात ये थी कि उनकी सेना एक भी युद्ध मे पराभूत नहीं हुई।
💥 इस तरह का पराक्रम करने वाले वह शायद एकमात्र योद्धा होंगे। उनके पराक्रम की वजह से परेशान हो कर दिल्ली के बादशाह औरंगजेब ने कसम खायी थी कि जब तक छत्रपति संभाजी पकड़े नहीं जायेंगे, वो अपना किमोंश सर पर नहीं चढ़ाएगा।
💥#छत्रपति संभाजी नौ वर्ष की अवस्था में छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रसिद्ध आगरा यात्रा में साथ गये थे।
💥 औरंगजेब के बंदीगृह से निकल, छत्रपति शिवाजी महाराज के महाराष्ट्र वापस लौटने पर, मुगलों से समझौते के फलस्वरूप, संभाजी मुगल सम्राट् द्वारा राजा के पद तथा पंचहजारी मंसब से विभूषित हुए।
💥औरंगाबाद की मुगल छावनी में, मराठा सेना के साथ उनकी नियुक्ति (1668) हुई ।
💥#युगप्रवर्तक राजा के पुत्र रहते उनको यह नौकरी मान्य नहीं थी। किन्तु स्वराज्य स्थापना की शुरू के दिन होने के कारण और पिता के आदेश के पालन हेतु केवल 9 साल के उम्र में ही इतनी जिम्मेदारी का ही नही बल्कि अपमान जनक कार्य उन्होंने धीरता से किया।
💥 उन्होंने केवल 14 साल में बुधाभुषणम, नखशिख, नायिकाभेद तथा सातशातक यह #संस्कृत ग्रंथ लिखे थे।
💥#छत्रपति शिवाजी महाराज के राज्याभिषेक के बाद स्थापित अष्टप्रधान मंत्रीमंडल में से कुछ लोगों के राजकारण के वजह से यह संवेदनशील युवराज काफी क्षतिग्रस्त हुए थे। पराक्रमी होने के बावजूद उन्हें अनेक लड़ाईयों से दूर रखा गया।
💥 स्वभावत: संवेदनशील रहने वाले संभाजी अपना पराक्रम दिखाने की कोशिश में मुगल सेना से जा मिले (16 दिसम्बर 1678) । किन्तु कुछ ही समय में जब उनको अपनी गलती समझ आई तब वो वहां से पुन: स्वराज्य में आये। मगर इस प्रयास में वो अपने पुत्र शाहू, पत्नी रानी येसूबाई और बहन गोदावरी को अपने साथ लाने में असफल रहे।
💥छत्रपति शिवाजी महाराज की मृत्यु (20 जुलाई 1680) के बाद कुछ लोगों ने संभाजी के अनुज राजाराम को सिंहासनासीन करने का प्रयत्न किया। किन्तु सेनापति मोहिते के रहते यह कारस्थान नाकामयाब हुआ और 10 जनवरी 1681 को संभाजी महाराज का विधिवत्‌ राज्याभिषेक हुआ।
💥संभाजी को मुग़ल, पोर्तुगीज, अंग्रेज़ तथा अन्य शत्रुओं से लड़ने के साथ-साथ अंतर्गत शत्रुओं से भी लड़ना पड़ा।
💥1683 में उन्होंने पुर्तगालियों को पराजित किया। इसी समय वह किसी राजकीय कारण से संगमनेर में रहे थे।
💥बहनोई गणोजी शिर्के की बेईमानी एवं मुगलों द्वारा संभाजी राजा का घेराव….
💥येसुबाई के वरिष्ठ बंधु अर्थात #शम्भु राजा के बहनोई गणोजी शिर्के हिंदवी स्वराज्य से बेईमान हो गए । जुल्पिकार खान #रायगढ़ पर #आक्रमण करने आ रहा है यह समाचार मिलते ही शम्भुराजा सातारा-वाई-महाड मार्ग से होते हुए रायगढ़ लौटने वाले थे।परंतु मुकर्रबखान कोल्हापुर तक आ पहुंचा । इसलिए शम्भु राजा ने संगमेश्वर मार्ग के चिपलन-खेड मार्ग से रायगढ़ जाने का निश्चय किया ।
💥 शम्भुराजे के स्वयं संगमेश्वर आने की वार्ता आसपास के क्षेत्र में हवा समान फैल गई । शिर्के के दंगों के कारण उद्ध्वस्त लोग अपने परिवाद लेकर संभाजी राजा के पास आने लगे । जनता के परिवाद को समझकर उनका समाधान करने में उनका समय व्यय हो गया एवं उन्हें संगमेश्वर में 4-5 दिन तक निवास करना पड़ा ।
💥उधर राजा को पता चला कि कोल्हापुर से मुकर्रबखान निकलकर आ रहा है । कोल्हापुर से संगमेश्वर की दूरी 90 मील की थी तथा वह भी सह्याद्रि की घाटी से व्याप्त कठिन मार्ग था ।
💥 इसलिए न्यूनतम 8-10 दिन के अंतर वाले संगमेश्वर को बेईमान गणोजी शिर्के मुकर्रबखान को समीप के मार्ग से केवल 4-5 दिन में ही ले आया ।
💥 संभाजी से प्रतिशोध लेने के उद्देश्य से शिर्के ने बेईमानी की थी तथा अपनी जागीर प्राप्त करने हेतु यह कुकर्म किया ।
💥अतः 1 फरवरी 1689 को मुकर्रबखान ने अपनी 4 हजार सेना की सहायता से शम्भुराजा को घेर लिया ।
💥 संभाजीराजा का घेरा तोड़ने का असफल प्रयास…
💥जब संभाजीराजे को ध्यान में आया कि संगमेश्वर में जिस सरदेसाई के बाडे में वे निवास के लिए रुके थे, उस बाडे को खान ने घेर लिया, तो उनको आश्चर्य हुआ, क्योंकि उन्हें ज्ञात था कि इतने अल्प दिनों में खान का वहां आना असंभव था; परंतु यह चमत्कार केवल बेईमानी का था, यह भी उनके ध्यान में आया ।
💥संभाजीराजा ने पूर्व से ही अपनी फौज रायगढ़ के लिए रवाना की थी तथा केवल 300 सैन्य ही अपने पास रखे थे । अब खान का घेराव तोड़ कर रायगढ़ की ओर प्रयाण करना राजा के समक्ष एकमात्र यही पर्याय शेष रह गया था ।
💥 इसलिए राजा ने अपने सैनिकों को शत्रुओं पर आक्रमण करने का आदेश दिया । इस स्थिति में भी शंभुराजे, संताजी घोरपडे एवं खंडोबल्लाळ बिना डगमगाए शत्रु का घेराव तोड़कर रायगढ़ की दिशा में गति से निकले ।
💥 दुर्भाग्यवश इस घमासान युद्ध में मालोजी घोरपडे की मृत्यु हो गई; परंतु संभाजीराजे एवं कवि कलश घेराव में फंस गए । इस स्थिति में भी संभाजीराजा ने अपना घोडा घेराव के बाहर निकाला था; परंतु पीछे रहने वाले कवि कलश के दाहिने हाथ में मुकर्रबखान का बाण लगने से वे नीचे गिरे एवं उन्हें बचाने हेतु राजा पुनः पीछे मुड़े तथा घेराव में फंस गए ।
💥अपनों की बेइमानी का कारण बना राज्य के लिये घात !
💥इस अवसर पर अनेक #सैनिकों के मारे जाने के कारण उनके घोड़े इधर-उधर भाग रहे थे । सर्वत्र धूल उड़ रही थी । किसी को भी  स्पष्ट दिखाई नहीं दे रहा था । इसका लाभ उठाकर शंभूराजा ने पुनः सरदेसाई के बाडे में प्रवेश किया । वहां पर मात्र उनका घोडा था । धूल स्थिर होने पर गणोजी शिर्के ने #शंभुराजा के घोडे को पहचान लिया; क्योंकि राजाओं के घोडे के पांव में सोने का तोड़ा रहता था, यह शिर्के को ज्ञात था; इसलिए उन्होंने खान की सेना को समीप में ही संभाजी को ढूंढने की सूचना की ।
💥 अंततोगत्वा  #मुकर्रबखान के लड़के ने  अर्थात् इरवलासखान ने शम्भुराजा को नियंत्रण में ले लिया ।
💥अपनों की बेईमानी के कारण अंत में सिंह का शावक #शत्रु के हाथ लग ही गया ।
💥जंग-जंग पछाड़कर भी निरंतर 9 वर्षों तक जो सात लाख सेना के हाथ नहीं लगा, जिसने बादशाह को कभी स्वस्थ नहीं बैठने दिया, ऐसा पराक्रमी योद्धा अपने लोगों की बेईमानी के कारण मुगलों के जाल में फंस गया ।
💥दोनों को #मुसलमान बनाने के लिए औरंगजेब ने कई कोशिशें की। किन्तु धर्मवीर छत्रपति संभाजी महाराज और कवि कलश ने धर्म परिवर्तन से इन्कार कर दिया।
💥औरंगजेब ने दोनों की जुबान कटवा दी, आँखें निकाल दी किन्तु अंत तक धर्म का साथ नहीं छोड़ा।
💥11 मार्च 1689 हिन्दू नववर्ष दिन को दोनों के शरीर के टुकड़े-टुकड़े कर औरंगजेब ने हत्या कर दी।
💥किन्तु ऐसा कहते है कि हत्या पूर्व औरंगजेब ने छत्रपति संभाजी महाराज से कहा कि मेरे 4 पुत्रों में से एक भी तुम्हारे जैसा होता तो सारा हिन्दुस्थान कब का मुग़ल सल्तनत में समाया होता।
💥जब छत्रपति संभाजी महाराज के टुकड़े तुलापुर की नदी में फेंकें गए तो उस किनारे रहने वाले लोगों ने वो इकठ्ठा कर के सिला के जोड़ दिए (इन लोगों को आज ” शिवले ” नाम से जाना जाता है) जिस के उपरांत उनका विधिपूर्वक अंतिम संस्कार किया।
💥औरंगजेब ने सोचा था कि मराठी साम्राज्य छत्रपति संभाजी महाराज के मृत्यु पश्चात ख़त्म हो जाएगा। छत्रपति संभाजी महाराज के हत्या की वजह से मराठा एक साथ आकर लड़ने लगे ।
💥सेना की संख्या दो लाख तक पहुंच गई । सभी ओर प्रत्येक स्तर पर मुगलों का घोर विरोध होने लगा ।
💥 अंत में 27 वर्ष के निष्फल युद्ध के उपरांत औरंगजेब को दक्खन में ही प्राणत्याग करना पड़ा।
💥उसका दक्खन जीतने का सपना इसी भूमि में दफन हो गया और मुगलों की सत्ता शक्ति क्षीण होने लगी एवं हिंदुओं के शक्तिशाली साम्राज्य का उदय हुआ ।
💥कैसे कैसे महान वीर हुए भारत की इस धरा पर…
🙏🏻शत-शत नमन उनके चरणों में…
🙏🏻जय माँ भारती!!!
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