पाकिस्तान से आए हिंदुओं का दर्द : न तो नौकरी है, ना घर, ना पैसा और ना खाना, पशु की तरह हैं

 अगस्त 4, 2017

🚩कश्मीर, बंगाल, असम में #मुस्लिम समुदाय वाले #अवैध #घुसपैठी करके #हिन्दुस्तान को #तोड़ रहे हैं फिर भी सरकार वोट बैंक के लिये सारी सुविधाएं दे रही है दूसरी ओर पाकिस्तान और बांग्लादेश में नर्क से बत्तर जिंदगी जीने वाले हिन्दू जब हिंदुस्तान में आते हैं तभी भी उनको सरकार की ओर से कोई सुविधा उपलब्ध नही करवाई जाती है ।
पाकिस्तान से आए हिंदुओं का दर्द
🚩बंटवारे के दौरान पाकिस्तान में अत्याचार सह रहे लाखों लोगों ने भारत जाने का सपना देखा था। इन्हीं में एक है पाकिस्तान से भारत आए #जोगदास, परंतु सीमा के इस पार भी हकीकत उनके लिए किसी दर्द भरे सपने से कम नहीं है। #बंटवारे के दौरान मानव इतिहास का सबसे बड़ा #स्थानांतर हुआ जो 70 वर्ष बाद भी जारी है और बेहतर जीवन की चाहत लेकर पाकिस्तान से लोग अभी भारत आ रहे हैं। उस समय कई हजार लोगों को सीमा के पास स्थित कैंपों में बसाया गया पंरतु उन्हें काम करने का अधिकार नहीं दिया गया। उन्हीं में 81 वर्ष के #जोगदास भी शामिल हैं।
🚩#जोगदास का कहना है कि, यहां भारत में उनके पास न तो नौकरी है, ना घर, ना पैसा और ना खाना। वहां (पाकिस्तान) हम खेतों में काम करते थे। हम सब किसान थे। पंरतु यहाँ हम जिंदगी जीने के लिए पत्थर तोड़ने को मजूबर हैं । #जोधपुर कैंप में रह रहे जोगदास ने न्यूज #एजेंसी एएफपी से कहा कि, हमारे के लिए बंटवारा अभी भी समाप्त नहीं हुआ। पाकिस्तान में रह रहे हिन्दू अपने देश (भारत) लौटने का प्रयास कर रहे हैं और यहां हमारे लिए कुछ भी नहीं है।
🚩वर्ष #1947 में ब्रिटेन की गुलामी से #स्वतंत्रता मिलने के बाद #15 मिलियन (डेढ करोड) से ज्यादा लोग भारत आए और महीनों तक चली हिंसा में कम से कम #10 लाख लोगों की #मृत्यु हुई। #खूनी विवाद के बाद बने पाकिस्तान से #हिन्दू और #सिखों ने #पलायन किया जबकि मुसलमान पाकिस्तान में जाकर बसे। पलायन के बावजूद भी हिन्दू पाकिस्तान में सबसे बड़ा अल्पसंख्यक समुदाय है। #पाकिस्तान में रह रहे #हिंदुओं का कहना है कि, उन्हें आए दिन #भेदभाव यहां तक कि #अगवा, #बलात्कार और #बलपूर्वक विवाह जैसी घटनाओं का सामना करना पड़ता है।
🚩जोगदास बताते हैं कि, विभाजन के बाद से अत्याचार शुरू हो गया था। वहां पर एक दिन भी ऐसा नहीं जाता था जब हम शांति की जिंदगी गुजारे हो। मैं वापस आकर अपने हिन्दू भाइयों के साथ रहना चाहता था।
🚩ज्यादा प्रवासी पाकिस्तान के सिंध प्रांत से आए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, हकीकत में वह लोग अलग शिविरों में स्थानीय लोगों से दूर रहते हैं और #प्रशासन द्वारा उन्हें संदेह की नजरों से देखा जाता है और व्यवहार किया जाता है। #प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने भारत में शरण पाने के लिए आए लोगों के लिए प्रक्रिया को आसान बनाने का #विश्वास दिलाया। पिछले वर्ष उन्होंने नियमों में परिवर्तन करते हुए केंद्र सरकार के माध्यम से जाने के बजाय आप्रवासियों को उस राज्य में नागरिकता के लिए आवेदन करने की अनुमति दी थी, जहां वह रह रहे हैं। पाकिस्तान से आए हिंदुओं ने 7 वर्षों के बाद #नागरिकता प्राप्त करने की #प्रक्रिया में तेजी देखी। पंरतु #नौकरशाही की ओर से #विलंब का कारण है कि इसे प्राप्त करने की प्रक्रिया को पूरा करने में अधिक समय लग सकता है।
🚩#64 वर्ष के खनारामजी वर्ष 1997 में पाकिस्तान से भारत आए और वर्ष #2005 में उन्हें भारतीय #नागरिकता मिली। उन्होंने कहा कि, भारत में जीवन से मोहभंग होने के बहुत से लोगों ने #सदस्यता की आशा छोड़ दी और #पाकिस्तान #वापस चले गए। उन्होंने कहा, “सरकार की ओर से हमें कोई #सहायता #नहीं मिली। हम केवल पशु की तरह हैं, जिसका कोई मालिक नहीं है। हम खुद से जीवित हैं। हमारे के लिए गरीबी से भी बदतर अधिकारियों द्वारा हम पर किया जाने वाला संदेह है।
🚩स्त्रोत : जनसत्ता
🚩#पाकिस्तान और #बांग्लादेश सरकार उनको कोई भी सुविधा नही देती है और हररोज उनको #प्रताड़ित किया जाता है, वहाँ हिन्दू #बहु-बेटियां #सुरक्षित नही हैं, #बलात्कार किया जाता है, #अगवा कर दिया जाता है, हिंदुओं की #हत्या कर दी जाती है, #न्यायालय से कोई न्याय नही मिल पाता है तब हिन्दू हिन्दुस्तान की ओर देखते हैं उनको बड़ी आस होती है कि भारत #सरकार हमारी #सहायता करेगी लेकिन उनकी सारी उम्मीदों पर पानी फिर जाता है, उनको सरकार की ओर से कोई #सुविधा उपलब्ध #नही करवाई जाती है और #संदिग्ध नजरों से देखा जाता है
🚩ये कैसा न्याय..???
🚩हिंदुस्तान में हिंदुओं के लिए कब कुछ करेगी हिन्दुत्वादी सरकार..???
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