बड़ा खुलासा : रेप केस में गायत्री प्रजापति को जमानत देने के लिए हुई थी 10 करोड़ की डील

बड़ा खुलासा : रेप केस में गायत्री प्रजापति को जमानत देने के लिए हुई थी 10 करोड़ की डील
जून,19,2017
उत्तर
प्रदेश #समाजवादी पार्टी के पूर्व मंत्री #गायत्री प्रजापति को रेप के एक
मामले में मिली जमानत साजिश रचकर दी गई थी, जिसमें एक वरिष्ठ जज भी शामिल
थे। #प्रजापति को #जमानत देने के लिए #10 करोड़ रुपये का लेन-देन हुआ था।
यह चौंकाने वाला खुलासा #इलाहाबाद हाई कोर्ट की एक जांच में हुआ है।
gayatri-prasad-prajapati
#इलाहाबाद
हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस #दिलीप बी भोसले ने प्रजापति को जमानत मिलने की
जांच के आदेश दिए थे। इस जांच में संवेदनशील मामलों की सुनवाई करने वाली
अदालतों में जजों की पोस्टिंग में हाई लेवल करप्शन की बात सामने आई है। इस
तरह की अदालतें रेप और हत्या जैसे जघन्य अपराधों के मामलों की सुनाई करती
हैं।
अपनी
रिपोर्ट में जस्टिस भोसले ने कहा कि अतिरिक्त जिला और सेशन जज #ओपी मिश्रा
को 7 अप्रैल को उनके रिटायर होने से ठीक तीन सप्ताह पहले ही पोक्सो
(प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंस) जज के रूप में तैनात किया
गया था। जज #ओपी मिश्रा ने ही #गायत्री प्रजापति को 25 अप्रैल को रेप के
मामले में जमानत दी थी। ओपी मिश्रा की नियुक्ति नियमों की अनदेखी करते हुए
और अपने काम को बीते एक साल से ‘उचित रूप से करने वाले’ एक जज को हटाकर हुई
थी।
#इंटेलिजेंस
ब्यूरो ने जज की पोक्सो पोस्टिंग में घूसखोरी की बात कही है। रिपोर्ट के
मुताबिक गायत्री प्रजापति को #10 करोड़ रुपये के ऐवज में जमानत दी गई थी।
इस रकम से पांच करोड़ रुपये उन तीन वकीलों को दिए गए जो मामले में बिचौलिए
की भूमिका निभा रहे थे बाकि के पांच करोड़ रुपये पोक्सो जज (ओपी मिश्रा) और
उनकी पोस्टिंग संवेदनशील मामलों की सुनवाई करने वाली कोर्ट में करने वाले
जिला जज राजेंद्र सिंह को दिए गए थे।
अपनी
गोपनीय रिपोर्ट में जस्टिस #भोसले ने कहा, ’18 जुलाई 2016 को पोक्सो जज के
रूप में #लक्ष्मी कांत राठौर की तैनाती की गई थी और वह बेहतरीन काम कर रहे
थे। उन्हें अचानक से हटाने और उनके स्थान 7 अप्रैल 2017 को ओपी मिश्रा की
पॉक्सो जज के रूप में तैनाती के पीछे कोई औचित्य या उपयुक्त कारण नहीं था।
मिश्रा की तैनाती तब की गई जब उनके रिटायर होने में मुश्किल से तीन सप्ताह
का समय था।’
#गायत्री
प्रजापित के खिलाफ रेप के एक मामले में #सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद
उत्तर प्रदेश पुलिस ने 17 फरवरी को #एफआईआर दर्ज की थी। उन्हें 15 मार्च को
गिरफ्तार कर लिया गया था। 24 अप्रैल को उन्होंने जज ओपी मिश्रा की अदालत
में जमानत की अर्जी दी और उन्हें मामले की जांच जारी रहने के बावजूद #जमानत
दे दी गई।
#आईबी
ने अपनी एक रिपोर्ट में ओपी मिश्रा की पोक्सो कोर्ट में #पोस्टिंग में
#भ्रष्टाचार की बात कही है। इस रिपोर्ट के बाद उत्तर प्रदेश में
न्यायपालिका में ट्रांसफर और पोस्टिंग को लेकर सवाल उठने शुरू हो गए हैं।
आईबी की रिपोर्ट के मुताबिक, ‘ओपी मिश्रा की ईमानदारी संदेह के घेरे में है
और उनकी छवि भी अच्छी नहीं है।’
इस
जांच में सामने आया है कि कैसे बार असोसिएशन के पदाधिकारी तीन वकीलों ने
मिश्रा की पोक्सो कोर्ट में तैनाती की डील फिक्स कराई। प्रजापति को जमानत
मिलने के तीन-चार सप्ताह पहले मिश्रा के चैंबर में जिला जज और तीनों वकीलों
के बीच कई बार बैठकें हुई। इनके बीच आखिरी बैठक 24 अप्रैल को हुई और इसी
दिन प्रजापति ने मिश्रा की कोर्ट में जमानत अर्जी दी थी।
पाठक समझ गये होंगे कि कानून तो अँधा है पर #भ्रष्ट जज उसका फायदा उठाते हैं तो कैसे मिल सकता है निर्दोषों को न्याय..???
आपने
देखा था कि जिला अदालत में #अपराध सिद्ध होने पर भी #सलमान खान को 2 घण्टे
में ही #जमानत मिल गई थी, #संजय दत्त सजा होने के बाद भी पैरोल पर बाहर
मजे से घूम रहा था जबकि कई #निर्दोष बिना अपराध सिद्ध हुए कई सालों से #जेल
में बंद हैं ।
#न्यायालय में #भ्रष्टाचार के कारण ही आज भी बड़े-बड़े #अपराधी बाहर घूम रहे हैं और निर्दोष जेल में बंद हैं।
आपको
बता दें कि ये कोई पहला मामला नही है जो रिश्वत लेते जज पकड़ा गया हो
#आंध्र प्रदेश में भी एक #कोर्ट का #न्यायधीश 2012 में जनार्दन रेड्डी को
जमानत देने के लिए #100 करोड़ की #रिश्व्त लेते पकड़ा गया था ।
हिमाचल प्रदेश के सुंदरनगर #न्यायालय में कार्यरत सीनियर जज भी रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़े गये थे  ।
ऐसे
ही हाल ही में #सीबीआई ने दिल्ली तीस हजारी कोर्ट में सीनियर सिविल #महिला
जज रचना तिवारी के घर पर छापेमारी की थी जहाँ करीब 94 लाख #रुपये #कैश
मिले थे ।
महिला
जज रचना तिवारी ने अपनी #कोर्ट में लगे एक सिविल केस में विवादित
#प्रॉपर्टी मामले में शिकायतकर्ता से उसके पक्ष में फैसले के लिए 20 लाख
रुपये की रिश्वत माँगी थी । महिला जज को सीबीआई ने जेल भेजा था ।
ये
तो दो-तीन जज रिश्वत लेते पकड़े गए इसलिये उनको गिरफ्तार कर लिया गया लेकिन
ऐसे मामले तो कई हैं । देश के जजों में रिश्वतखोरी और #भ्रष्टाचार इतना बढ़
गया है कि अपराधियों को सजा और निर्दोषों को न्याय मिलना ही मुश्किल हो
गया है ।
इसकी पुष्टि भी कई जज कर चुके हैं :
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायधीश काटजू ने कहा था कि #भारतीय न्याय प्रणाली में 50% जज भ्रष्ट है ।
सुप्रीम
कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश संतोष हेगड़े भी सवाल उठा चुके है कि ‘धनी और
प्रभावशाली’ तुरंत जमानत हासिल कर सकते हैं । #गरीबों के लिए कोई न्याय की
व्यवस्था नही है ।
कर्नाटक
हाईकोर्ट के पूर्व वरिष्ठ #न्यायाधीश जस्टिस के एल मंजूनाथ ने कहा कि यहाँ
सत्यनिष्ठा और ईमानदारी के लिए कोई स्थान नहीं है और इस देश में न्याय के
लिए कोई जगह नहीं ।
इसलिये आज न्याय प्रणाली से देश की जनता का भरोसा उठ गया है ।
देश में 2.78 लाख विचाराधीन कैदी है । इनमें से कई ऐसे हैं जो उस अपराध के लिए मुकर्रर सजा से ज्यादा समय जेलों में बिता चुके हैं ।
देश भर की जिला न्यायालयों में 2.8 करोड़ मामले लंबित हैं ।
आरोप साबित होने पर भी कई बड़ी हस्तियाँ बाहर घूम रही हैं और अभी तक जिन पर आरोप साबित नही हुआ है वो जेल में है ।
क्योंकि या तो न्याय पाने वाले गरीब है या तो कट्टर हिंदुत्ववादी हैं इसलिए उनको न्याय नही मिल पा रहा है ।
लालू,
तरुण तेजपाल, विजय माल्या, कन्हैया, बाबू लाल नागर आदि कई हैं जिनके
विरुद्ध पुख्ता सबूत होने पर भी आज बड़े मजे से बाहर घूम रहे हैं ।
लेकिन
9 साल से शंकराचार्य अमृतानन्द जी , हिन्दू संत #आसारामजी #बापू, 4 साल
से, कर्नल पुरोहित 7 साल से, श्री नारायण साई 3.5 साल से और 3 साल से धनंजय
देसाई आदि #बिना सबूत जेल में  हैं । इन सब पर अभी तक एक भी आरोप सिद्ध
नही होते हुए भी वो आज जेल के अंदर हैं ।
आखिर इनका ऐसा क्या अपराध है कि आतंकवादी के साथ भी उदारता का व्यवहार करने वाला हमारा न्यायालय इनको जमानत तक नही दे रहा है??
क्या ये हिन्दू संत है इसलिए..???
या इन्होंने रिश्वत नही दी इसलिए..???
या इन्होंने धर्मान्तरण पर रोक लगाई इसलिए..???
या इन्होंने पूरे विश्व में भारतीय संस्कृति का प्रचार-प्रसार किया इसलिए..???
या फिर इन्होंने विदेशी कंपनियों से लोहा लिया इसलिए…???
या इन्होंने हिन्दू संस्कृति के प्रति जनता में जागृति लायी इसलिए..???
आखिर क्या कारण है हिन्दू संतों को जमानत तक न देने का..???
जनता
के मन में ऐसे कई सवाल उठ रहे हैं इसलिए #न्याय प्रणाली को #भ्रष्ट मुक्त
होकर निर्णय लेना होगा जिससे #निर्दोष बेवजह सजा भुगतने को मजबूर न हो ।
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