।।हिन्दू ही भूल गये, नया साल कब आता है।।

��क्या विडम्भना है भारत की,देख चित घबराता है।
हिन्दू ही भूल गये, नया साल कब आता है।।
शराब, माँस का भोग लगाता एक त्यौहार आ गया।
यह अंग्रेजी नववर्ष हमारे संस्कारों को खा गया।।
��अपनी संस्कृति से अपरिचित भ्रमित हिंदुओं द्वारा ही 31 दिसंबर की रात्रि में एक-दूसरे को “हैपी न्यू ईयर” कहते हुए नववर्ष की शुभकामनाएं दी जाती है।Jago Hindustani -dear 2016
��वास्तविकता में भारतीय संस्कृति के अनुसार चैत्र-प्रतिपदा ही हिंदुओं का नववर्ष का दिन है । लेकिन भारतीय वर्षारंभ के दिन चैत्र प्रतिपदा पर एक-दूसरे को शुभकामनायें देने वाले हिंदुओं के दर्शन अब दुर्लभ हो गए हैं ।
��ऋषि मुनियों के देश भारत में 31 दिसम्बर को त्यौहार के नाम पर शराब और कबाब उड़ाना, डांस पार्टी आयोजित करके बेशर्मी का प्रदर्शन करना क्या हम हिंदुओं को शोभा देता है???
��S.O Chem की रिपोर्ट के अनुसार-
14 से 19 वर्ष के बच्चें इन दिनों में शराब का जमकर सेवन करते है । जिससे शराब की खपत तीन गुना बढ़ जाती है |
��आँकड़े बताते हैं कि अमेरिका व यूरोप में भारत से 10 गुणा ज्यादा दवाईयां खर्च होती हैं ।
��वहाँ मानसिक रोग इतने बढ़ गए हैं कि हर दस अमेरिकन में से एक को मानसिक रोग होता है । दुर्वासनाएँ इतनी बढ़ी है कि हर छः सेकण्ड में एक बलात्कार होता है और हर वर्ष लगभग 20 लाख से अधिक कन्याएँ विवाह के पूर्व ही गर्भवती हो जाती हैं । वहाँ पर 65% शादियाँ तलाक में बदल जाती हैं । AIDS की बीमारी दिन दुगनी रात चौगुनी फैलती जा रही है | वहाँ के पारिवारिक व सामाजिक जीवन में क्रोध, कलह, असंतोष,संताप, उच्छृंखता, उद्यंडता और शत्रुता का महा भयानक वातावरण छाया रहता है |
��विश्व की लगभग 4% जनसंख्या अमेरिका में है | उसके उपभोग के लिये विश्व की लगभग 40% साधन-सामग्री (जैसे कि कार, टी वी, वातानुकूलित मकान आदि) मौजूद हैं फिर भी वहाँ अपराधवृति इतनी बढ़ी है क़ि हर 10 सेकण्ड में एक सेंधमारी होती है, 1 लाख व्यक्तियों में से 425 व्यक्ति कारागार में सजा भोग रहे हैं।
��31 दिसम्बर की रात नए साल के स्वागत के लिए लोग जमकर दारू पीते है। हंगामा करते है ,रात को दारू पीकर गाड़ी चलाने से दुर्घटना की सम्भावना, रेप जैसी वारदात, पुलिस वप्रशासन बेहाल और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों का विनाश होता है और 1 जनवरी से आरंभ हुई ये घटनाएं सालभर में बढ़ती ही रहती हैं ।
��जबकि भारतीय नववर्ष नवरात्रों के व्रत से शुरू होता है घर घर में माता रानी की पूजा होती है।शुद्ध सात्विक वातावरण बनता है।
चैत्र प्रतिपदा के दिन से महाराज विक्रमादित्य द्वारा विक्रमी संवत् की शुरुवात, भगवान झूलेलाल का जन्म,
नवरात्रे प्रारंम्भ, ब्रह्मा जी द्वारा सृष्टि की रचना इत्यादि का संबंध है।
⛳ऐसे भोगी देश का अन्धानुकरण न करके युवा पीढ़ी अपने देश की महान संस्कृति को पहचाने।
��1जनवरी में नया कलैण्डर आता है। लेकिन
चैत्र में नया पंचांग आता है उसी से सभी भारतीय पर्व ,विवाह और अन्य महूर्त देखे जाते हैं । इसके बिना हिन्दू समाज जीवन की कल्पना भी नही कर सकता इतना महत्वपूर्ण है ये कैलेंडर यानि पंचांग।
��स्वयं सोचे क़ि क्यों मनाये हम एक जनवरी को नया वर्ष..???
केवल कैलेंडर बदलें अपनी संस्कृति नही…!!!��रावण रूपी पाश्‍चात्य संस्कृति के आक्रमणों को नष्ट कर, चैत्र प्रतिपदा के दिन नववर्ष का विजयध्वज अपने घरों व मंदिरों पर फहराएं।
��अंग्रेजी गुलामी तजकर ,अमर स्वाभिमान भर ले हम।
हिन्दू नववर्ष मनाकर खुद में आत्मसम्मान भरले हम।।
��जयहिंद��
��देखिये वीडियो����

��
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����जागो हिन्दुस्तानी����
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