श्रीकृष्णजन्माष्टमी : 15 अगस्त 2017

स्वार्थी, तामसी, आसुरी प्रकृति के कुकर्मी लोग बढ़ जाते हैं तब भगवान का प्रागट्य होता है #पृथ्वी आक्रान्त होकर श्रीहरि से अपने त्राण के लिए #प्रार्थना करती है। जो पृथ्वी इन आँखों से दिखती है वह पृथ्वी का #आधिभौतिक स्वरूप … Continue reading

4 साल से बापू आशारामजी को बेल नही मिलने के पीछे राजनैतिक दलों का हाथ: माँ चेतनानंद

अगस्त 12, 2017
🚩गोवा : सनातन संस्था द्वारा हुए एक कार्यक्रम के दौरान उत्तरप्रदेश, डासना, चंडीदेवी मंदिर सिद्धपीठ
की महंत यति माँ #चेतनानंद सरस्वती ने एक चैनल में इंटरव्यू देते हुए कई सवाल उठाते हुए कहा कि #सनातन संस्था बहुत ही #पवित्र कार्य कर रही है, इसके माध्यम से अलग-अलग क्षेत्रों में लोग सक्रीय हैं सनातन के लिए, उनको एक मंच पर आने का मौका मिल रहा है ।
Political-parties-hand-over-Bapu-Ashramji-not-receiving-Bell-for-4-years-Mother-Chetanand

 

🚩ये साधु-संतों का कर्तव्य है, ये समाज का कर्तव्य है कि वो #साधु-संतों #पर होनेवाले इस #कुचक्र को समझे ।
🚩आज पूजनीय आसारामजी बापू को फंसाया गया है, कल मुझे यति (माँ चेतनानंद ) और परसों किसी और को फंसाया जा सकता है ।
ये कुचक्र है उस आध्यात्मिक शक्ति के खिलाफ जो सनातन धर्म को जीवित रखे हुए हैं ।
🚩कोई भी कार्य तभी संभव होगा जब संत समाज आगे आएगा, जब धर्माचार्य आगे आएंगे । तब सरकार को मजबूर होना पड़ेगा और सरकार जब इस बात को मानेगी कि कुचक्र जो चला रहे हैं,सहयोग नहीं कर रहें हैं सनातन धर्म को । उसको सहयोग करने के लिए ही #BJP हिंदूवादी विचार से सत्ता पर पहुँची तो #हिन्दू संतों का #रक्षण करना उनका #कर्तव्य बनता है । लेकिन वो इस कर्तव्य को #नहीं निभा रहे हैं ।
 🚩जिस तरीके से पूजनीय #आसारामजी बापू को #प्रताड़ित किया जा रहा है, उनको जेल में रखा गया है, अभी तक कोई #आरोप सिद्ध नहीं कर पा रहे हैं कोर्ट में ।
मेरा सभी धर्माचार्यो से निवेदन है कि वो उठ कर सामने आए क्योंकि आज अगर पूजनीय आसारामजी बापू हैं तो कल हम में से कोई और होगा..।
 जो RSS है या बजरंग दल है या कोई और है, ये किसी एक संगठन का कार्य नहीं है। हिन्दू संगठनों का जो कार्य है वो बिना संतों के आशीर्वाद के संभव नहीं है.. सत्ता में अगर कोई भी हिंदूवादी पार्टी पहुँचती है तो उसमें सबसे  पहले संत शंखनाद करते हैं इसलिए पहुंचती है ।
 🚩मेरा एक निवेदन है सारे #संगठनों से अगर आप #मौन साक्षी बन रहे हैं तो इसका मतलब आपकी मौन #सहमति है कि उनको (बापू आसारामजी) #प्रताड़ित किया जाएँ । इसका पाप आपको भी अपने सिर पर ढोना पड़ेगा और ये बहुत जल्द होगा ।
🚩इसको हमें बहुत सरल रूप से समझ लेना चाहिए कि ये #अन्याय संतों पर, हिन्दू समाज पर, सनातन संस्कृति पर, ये तब तक होनेवाला है जब तक हम धर्माचार्य अपने मठों को छोड़ कर हर संत के साथ,जिस भी संत पर आपदा आई है उस संत के साथ खड़े नहीं होंगे ।
 🚩ये #अन्याय लगातार होनेवाला है क्योंकि कोई भी #पोलिटिकल वील आज संतों के साथ खड़ी नहीं हुई है । किसी निजी राजनैतिक पार्टी की इच्छा शक्ति ऐसी नहीं है कि वो संतों को #संरक्षण दें ।
🚩जो #लोगों को और #समाज को #गंदा कार्य करने की #प्रेरणा देते हैं उनको #बेल #मिल जाती है आसानी से !!
जबकि गंभीर #आरोपों में उनके ऊपर #FIR हुई हो लेकिन #बेल मिल गई ।
🚩लेकिन आज पूजनीय #आसारामजी बापू को 4 साल से अभी तक #बेल #नहीं मिल रही है । उसमें कहीं न कहीं #दोहरी #न्यायव्यवस्था है और कहीं न कहीं #राजनैतिक दलों का मैं हाथ मानती हूँ ।
 🚩क्योंकि बहुत सारी चीजें #राजनैतिक दबाव में हैं, बहुत सारी चीजें सामाजिक दबाव में संभव हो पाती हैं ।
#राजनैतिक दबाव में #कोर्ट को #2:30 बजे खोला जा सकता है रात को तो क्या बापूजी को नहीं छोड़ा जा सकता ?
#बेल तो एक #अधिकार है ।
जब तक अपराध #सिद्ध #न हो जाये । #न्यायप्रणाली की ये व्यवस्था है कि बेल पर छोड़ा जा सकता है । अभी तक अपराध सिद्ध नहीं हुआ तो मैं ये मानती हूँ उनको बेल देनी चाहिए और #दोहरी #न्यायव्यवस्था को बंद करना चाहिए ।
 🚩एक बात मुझे समझ नहीं आई । वयवृद्ध सन्यासी जिनकी आयु 80 वर्ष है उनपर बलात्कार का आरोप ही कैसे लगाया गया ?
 🚩लेकिन वो बहुत #स्पष्ट है कि जो भी #हिंदूवादी #कार्य करेगा, जो भी #सनातन संस्कृति को #जीवित रखने का कार्य करेगा उसको ये #आरोप #झेलने पड़ेंगे ।
🚩उनको प्रताड़ित कर कहीं इलाज नहीं दिया जा रहा है । मैं इसे प्रताड़ने का एक भाग मानती हूँ ।
शारीरिक व मानसिक प्रताड़ने का एक भाग है कि न्यायव्यवस्था तो ये कहती है कि कोई #बीमार है तो उसका #प्रोपर इलाज कराना कारागार के #अधिकारियों का ये #कर्तव्य है कि उनकी  ट्रीटमेंट हो ।
पर ये प्रताड़ने का भाग बना लिया है । दवाइयां न मिले बीमारी से वो ग्रसित हो जाये,ऐसी उन्हें यातनाएं दी जा रही हैं ।
🚩मैं सिर्फ ये बापूजी के भक्तों को संदेश नहीं देना चाहती, पूरे सनातन को संदेश देना चाहती हूँ… जो हिन्दू धर्म में विश्वास रखते हैं, जो इस धर्म को जीवित रखना चाहते हैं,मैं उनको ये संदेश देना चाहती हूँ कि किसी भी परिस्थिति में अपने मनोबल को न गिरने दें । क्योंकि आगे का समय बहुत विकट आनेवाला है, बहुत भयानक आनेवाला है अगर किसी भी क्षण मनोबल गिरा तो हमारे बच्चों की बहुत दुर्गति होगी ।
 🚩निश्चित ही मेरा ये विश्वास है कि बहुत जल्द बापूजी हमारे बीच में होंगे ।
🚩देखिये ये सरकार को भी करना चाहिए जितने भी संत हैं,दादाजी हैं, #धनंजय भाई देसाई हैं, #बापूजी हैं, अभी #साध्वी प्रज्ञाजी को छोड़ा गया है 9 साल के बाद ।
आप किसी व्यक्ति को #मानसिक #प्रताड़ना देकर कह दें कि ये दोषी नहीं माने जाते.. तो मैं मानती हूँ कि सरकार को  #BJP को ये मानना चाहिए कि संतों के आशीर्वाद के बिना दोबारा उनका सत्ता में आना संभव नहीं होगा….
🚩साधु-संतों व समाज का कर्तव्य है कि वे हिन्दू संतों पर हो रहे कुचक्र को समझें।
🚩#Rss जैसे बड़े-बड़े #संगठन अगर आज भी #मौन साक्षी बने रहे तो संत आसारामजी बापू के साथ हो रहे #अन्याय में आप भी #भागीदार होंगे और इस पाप को आपको भी अपने सिर पर ढोना पड़ेगा ।
🚩#राजनैतिक दबाव में कोर्ट को अगर रात 2:30 बजे खोला जा सकता है तो क्यों #80 वर्षीय बापूजी को #जमानत तक #नहीं दी जा सकती ?
🚩BJP को ये मान लेना चाहिए कि संतों के आशीर्वाद के बिना दोबारा उनका सत्ता पर आना संभव नहीं होगा ।
🚩-यति माँ चेतनानंद सरस्वती महंत सिद्धपीठ, चंडीदेवी मंदिर, डासना(उ.प्र.)
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मुलमानों के ल‍िए भारत से बेहतर देश कोई नहीं : शाहनवाज हुसैन

 अगस्त 11, 2017
🚩उपराष्ट्रपति #हामिद अंसारीद्वारा दिए गए अल्पसंख्यकों के वक्तव्य पर भाजपा नेता शाहनवाज हुसैन का उत्तर
🚩देश
के निवर्तमान उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी को भारतीय जनता पार्टी के मुस्लिम
नेता #शाहनवाज हुसैन ने जवाब देते हुए कहा है कि इस दुनिया में मुसलमानों
के रहने के लिए भारत से बेहतर कोई देश नहीं है और ना ही एक हिन्दू से अच्छा
मित्र उन्हें मिल सकता है !
मुलमानों के ल‍िए भारत से बेहतर देश कोई नहीं : शाहनवाज हुसैन
🚩शाहनवाज
हुसैन ने ये टिप्पणी निवर्तमान उपराष्ट्रपति के उस बयान में की है जिसमें
उन्होंने कहा था कि ‘इस वक्त देश के मुसलमानों में बेचैनी का अहसास और
असुरक्षा की भावना है !’ हामिद अंसारी ने राज्यसभा टीवी को दिये गये अपने
आखिरी इंटरव्यू में कहा था कि उन्होंने असहनशीलता का मुद्दा प्रधानमंत्री
#नरेंद्र मोदी और उनके #कैबिनेट सहयोगियों के सामने उठाया है। उन्होंने इसे
‘परेशान करनेवाला विचार’ करार दिया कि नागरिकों की भारतीयता पर सवाल उठाए
जा रहे हैं !
🚩हामिद
अंसारी ने राज्यसभा में भी अपने आखिरी संबोधन में कहा कि लोकतंत्र में
अल्पसंख्यकों की सुरक्षा जरूरी है। भारतीय #जनता पार्टी ने हामिद अंसारी के
इस बयान को #खारिज कर दिया है। भाजपा नेता शाहनवाज हुसैन ने कहा कि
‘हिन्दुस्तान मुसलमानों के लिए दुनिया का सबसे बढ़िया देश है, जहां वे अपनी
पूरी धार्मिक आजादी के साथ रहते आए हैं !’
🚩बीजेपी नेता #प्रीति गांधी ने भी हामिद अंसारी के इस बयान पर #सवाल उठाया है।
🚩प्रीति
गांधी ने कहा है कि ‘जिस हिन्दू बहुल देश में आप सत्ता के सर्वोच्च बिन्दू
तक पहुंचे वहां आपको असुरक्षा की भावना महसूस हो रही है, आखिर आपका एजेंडा
क्या है ?’ प्रीति गांधी ने ट्वीट किया, ‘10 सालों तक मेरे #हिन्दू बहुल
देश ने बाहें फैलाकर आपको #स्वीकार किया, आपको सत्ता के शिखर पर बैठाया, और
अब भी आप असहज महसूस करते है ? ’
🚩हामिद अंसारी जी को यह भी बताना चाहिए था कि
🚩1. क्या आज बेचैनी और असुरक्षा की भावना सिर्फ़ मुसलमानों में है या हिन्दुओं में भी है?
🚩2. क्या आम हिन्दू या मुसलमान इतने बेचैन होते, अगर मुस्लिम #तुष्टीकरण और हिन्दू #तुष्टीकरण की राजनीति का ऐसा टकराव नहीं होता?
🚩3.
देश के दूसरे सर्वोच्च संवैधानिक पद पर रहते हुए इस राजनीतिक टकराव को
टालने के लिए उन्होंने क्या पहल की? या वे महज किसी के रबड़-स्टाम्प बनकर
ही कार्य करते रह गए?
🚩4. उनके #राष्ट्रध्वज को सलामी नहीं देने और योग दिवस के कार्यक्रमों से दूर रहने से यह #टकराव बढ़ा कि घटा?
🚩5. उनके व्यवहार से मुसलमानों की छवि उदारवादियों जैसी बनी या कट्टरपंथियों जैसी बनी?
🚩6.
दस साल उपराष्ट्रपति रहने के बावजूद उन्होंने मुसलमानों की बेचैनी और
असुरक्षा दूर करने के लिए क्या किया, जो आज कुर्सी छोड़ते समय उन्हें उनका
ख्याल सताने लगा?
🚩सभी पक्षों की बातें न सुनें और उन्हें समझने का प्रयास नहीं करें.
🚩1.
आज हिन्दुओं को भी लगता है कि #इस्लामिक #आतंकवादी कहीं भी कभी भी
बेगुनाहों पर हमला करके उनकी जान ले सकते हैं और #सेकुलर लोग कहते रह
जाएंगे कि आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता। हर हमले के बाद #आतंकवाद फैलाने
के आरोपियों के मानवाधिकार का डंका पीटा जाएगा, किसी के #एनकाउंटर को
फ़र्ज़ी ठहराने की कोशिश होगी, किसी को देश का बेटा-बेटी बताया जाएगा, किसी
की बरसी मनाई जाएगी, तो किसी के जनाजे में जुलूस निकाला जाएगा।
🚩2.
हिन्दुओं के भीतर इस बात की भी बेचैनी है कि धर्म के नाम पर देश का एक
विभाजन हो चुका है, इसके बावजूद #अलगाववादी सोच खत्म नहीं हुई है। #कश्मीर,
#असम, #पश्चिम बंगाल इत्यादि राज्यों के जिन हिस्सों में #मुसलमान
#बहुसंख्यक हैं, वहां #हिन्दुओं के जीने के #हालात बद से #बदतर हैं। उतने
बदतर, जितने कि हिन्दू-बहुल इलाकों में मुसलमानों के हालात न कभी हुए, न
कभी हो सकते हैं।
🚩3.
भारत में मुस्लिम तुष्टीकरण की राजनीति हिन्दुओं की इस बेचैनी और असुरक्षा
को और बढ़ाती है, क्योंकि उन्हें लगता है कि अन्य धर्मों के दुनिया में
अनेकों देश हैं, पर उनके लिए समूची दुनिया में यही एक देश है। अगर यहां की
डेमोग्राफी बिगड़ी, तो उनकी अगली पीढ़ियों का हाल कश्मीरी पंडितों जैसा हो
सकता है।
🚩बहरहाल,
अगर #हामिद अंसारी इस बात की तरफ़ #इशारा करना चाहते हैं कि देश के
#मुसलमानों में #असुरक्षा और #बेचैनी का आलम मोदी की वजह से है, तो मोदी को
इतना ताकतवर भी उन्हीं लोगों ने बनाया है, जिन्होंने उन्हें
मुस्लिम-विरोधी साबित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी और हिन्दू-हृदय-हार बना
दिया. इसलिए मुझे तो लगता है कि सबसे बड़े मोदी-भक्त वे नहीं हैं, जो तीन
साल से उनका गुणगान कर रहे हैं, बल्कि वे थे, जो 2002 से 2014 तक मोदी से
शत्रुता निभाते दिखाई दिए.
🚩ज़रा इस बात पर भी गौर करें कि वे मुद्दे कितने बचकाने हैं, जिनके चलते देश में बेचैनी महसूस की जा रही है-
🚩1.
‘वन्दे मातरम’ का मुद्दा : जबकि वे भी #कट्टरपंथी हैं, जो कहते हैं कि
#वन्दे मातरम बोलना ही होगा और वे भी कट्टरपंथी हैं, जो कहते हैं कि किसी
कीमत पर नहीं बोलेंगे, हमारा धर्म इसकी इजाज़त नहीं देता. कोई दो शब्द
बोलने से न देशभक्ति साबित होती है, न धर्म ख़तरे में पड़ता है।
🚩2.
योग का मुद्दा  : #योग का #अंध-विरोध करने वाले भी उतने ही ग़लत हैं,
जितने कि इसे अनिवार्य बनाने की वकालत करने वाले। योग #स्वास्थ्य के लिए
है। इसे धर्म से जोड़कर देखना #मानसिक #दिवालियापन है।
🚩3.
गाय का मुद्दा :  खाने की आज़ादी के नाम पर #गोमांस #खाने की #ज़िद रखना
भी उतना ही ग़लत है, जितना #गोरक्षा के नाम पर किसी #इंसान के साथ #हिंसा
करना।
🚩4.
लव जेहाद का मुद्दा: दो #बालिग लोगों को प्रेम करने या #शादी करने से
#रोकना अगर गलत है, तो इसकी आड़ में लड़के या लड़की का #धर्म-परिवर्तन
कराना भी #गलत है। प्रेम है, तो धर्म-परिवर्तन की ज़रूरत क्यों? अगर
धर्म-परिवर्तन की ज़रूरत है, तो प्रेम का ढोंग क्यों?
🚩5.
आतंकवाद का मुद्दा :  #हिंसा करने वालों के प्रति #समर्थन या #सहानुभूति
रखना भी उतना ही #गलत है, जितना कि हर मुसलमान को आतंकवादी समझ लेना।
🚩लेकिन
जब तक इस देश में दो गलत के बीच में से एक को सही ठहराने का चलन समाप्त
नहीं होगा, तब तक बेचैनी और असुरक्षा का यह दौर भी ख़त्म नहीं हो सकता। आज
सभी को सत्ता चाहिए। सत्य किसी को नहीं चाहिए। अगर हामिद अंसारी जैसे हमारे
अभिभावक भी आधा-अधूरा-काना-कुतरा सच ही बोलेंगे, तो सोचिए कि देश किस दिशा
में जाएगा !
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कश्मीर के एेतिहासिक हिन्दू वास्तुआें के हो रहे इस्लामीकरण पर कब तक सोता रहेगा हिन्दू?

🚩 जम्मू-कश्मीर में हिन्दुआें के ऐतिहासिक स्थानों के नाम परिवर्तित किए जा रहे हैं । यहां पहले ऐसी स्थिति नहीं थी; परंतु कुछ महीनों से बहुत कुछ हो रहा है ।

 

🚩आइये जाने कि #कश्मीर में क्या-क्या #परिवर्तित हुआ और क्या-क्या #परिवर्तित होनेवाला है!!
🚩1. #श्रीनगर में #गोपाद्री पहाड़ी है । #कश्मीर #यात्रा के #समय आदि #शंकराचार्यजी ने इस पहाड़ी पर अनेक वर्ष #तपस्या की थी । इसलिए सैकड़ों वर्ष पहले ही लोगों ने इस पहाड़ी का नाम #शंकराचार्य पहाड़ी रखा था । ऐसी जानकारी #सरकारी #दस्तावेजों में भी
है; परंतु अब इसका नाम ‘#सुलेमान टापू’ रखा गया है । विशेष बात तो यह है कि #भारत सरकार के पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने भी यहां सुलेमान टापू नाम का फलक लगाया है ।
🚩2. #श्रीनगर में #हरि पर्वत है । अब उसका नाम परिवर्तित कर #कोह महारन अर्थात #दुष्टों का पर्वत रखा गया है ।
🚩3. #कश्मीर के अनंतनाग को वहां के लोग #इस्लामाबाद कहने लगे हैं । #अनंतनाग का नाम हटाने के लिए लोगों ने आंदोलन आरंभ किया है।
🚩4. #अनंतनाग में उमानगरी नामक विख्यात #तीर्थस्थान है। इसका नाम भी परिवर्तित कर शेखपुरा किया गया है ।
🚩5. यहां की #सरकार अब #श्रीनगर नाम भी नहीं चाहती है । इस नगर का नाम शहर-ए-खास रखने के लिए #राज्य सरकार ने कई बार चर्चा भी की है ।
🚩6. #श्रीनगर के जिस चौराहे में जामा मस्जिद है, उस चौराहे का #हिन्दू नाम परिवर्तित कर मदिना चौराहा रखा गया है ।
🚩7. #कश्मीर घाटी में बहनेवाली #किशनगंगा नदी को अब #दरिया-ए-नीलम कहा जा रहा है ।
🚩#मीडिया यह सब दिखाने के लिए तैयार नहीं है । केवल #कश्मीरी पंडित (हिन्दू) ही यह लड़ाई लड़ रहे हैं ।
🚩अनेक वर्षों से यहां विद्यमान हिन्दू #संस्कृति नष्ट की जा रही है । यदि #देशवासी अब जागृत नहीं हुए, तो #भविष्य में उन्हें माता रानी के दर्शन के लिए अनुज्ञप्तिपत्र और पारपत्र (पासपोर्ट) लेकर आना )पड़ेगा
🚩क्या #वैष्णोदेवी का नाम #परिवर्तित होने पर ही आप #जागृत होनेवाले हैं..???
🚩पहले भी #भारत में #मुगल शासन काल में #शहरों, #गांव आदि के नाम बदले गये उसके बाद #अंग्रेज आये उन्होंने भी कई शहरों, गाँव आदि के #नाम बदले ।
🚩जब तक #भारत गुलाम था तब तक तो ठीक था लेकिन बड़ी विडंबना तो यह है कि #भारत आजाद होने के बाद भी हमारे पुराने नाम वापिस नही बदले गये । #आजादी को 70 साल हो गए लेकिन आज भी वही नाम चल रहे हैं,बदले नही जा रहे । जिन क्रूर #मुगलों ने हमारी बहनों-बेटियों का बलात्कार किया । तलवार की नोंक पर #धर्मपरिवर्तन करवाया उन्हीं के नाम से #शहरों के नाम रखे गए।
🚩आज #कश्मीर में भी वही चल रहा है हमारे प्राचीन नाम बदले जा रहे है और #हिन्दू चुप चाप बैठा है ।
🚩पहले भी ऐसा हुआ और आज भी वही हो रहा है #हिन्दू सहनशीलता के नाम से पलायनवादी हो गया है सोचता है कि बाजू  के घर में आग लगी है मुझे क्या?
अरे भाई बाजू के घर की आग नहीं बुझाएगा तो वो आग तेरे घर को भी जला सकती है।
🚩पहले #कश्मीर #पंडित #पलायन हुए, #आज #उत्तर प्रदेश के कई इलाकों से #हिन्दू पलायन हो रहे है, #हिन्दू #संतों को #जेल में भेजा जा रहा है, #हिन्दुओं का #ईसाई मिशनरियों द्वारा लालच देकर और मुसलमानों द्वारा दहशत फैलाकर #धर्म परिवर्तन किया जा रहा है।
🚩क्या हिन्दू इसी तरह से #अन्याय को चुप-चाप देखता रहेगा..???
🚩ऐसे ही अगर देखता रहा तो फिर #हिन्दू को #मिटने में देर नही लगेगी और #हिन्दू मिटा तो सनातन #संस्कृति मिटी और सनातन संस्कृति मिटी तो फिर #पृथ्वी पर हा-हा कार मच सकता है ।
🚩क्योंकि सनातन संस्कृति ही एक ऐसी संस्कृति है जो पूरी #दुनिया में सुख-शांति भाईचारा का संदेश देती ही नही है बल्कि चरितार्थ करके भी दिखा देती है ।
🚩आज #दुनिया में जो सुख शांति है वो केवल सनातन #संस्कृति का कुछ अंश लेकर ही है अतः हिन्दू संस्कृति को बचाना अत्यंत जरूरी है ।
🚩आशा है कि #भारतवासी जागृत होंगे ।
🚩इस स्थिति में समस्त #हिन्दू बंधु जागृत होकर वैध मार्ग अपना मिलकर विरोध करें ।
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देश के सैनिक अब पैकेटवाला दूध पीएंगे, केंद्र सरकार बंद कर रही है सैन्य की 39 गोशालाएं

*अगस्त 8, 2017*
🚩देश
में गोमाताआें की संख्या दिन-प्रतिदिन घटती जा रही है तथा उनके अस्तित्व
पर ही प्रश्न निर्माण हुआ है, एेसी स्थिति में उनका रक्षण कर उनकी संख्या
बढाने की अपेक्षा एेसा निर्णय लेना यानी आत्मघात कर लेने जैसा है ।
🚩#रक्षा
मंत्रालय ने देश में #39 सैन्य फार्म बंद करने का #आदेश दिया है, जिसके
बाद इस निर्णय पर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। कहा जा रहा है कि सरकार ने
जिन फार्म को बंद करने का आदेश दिया है उसमें देश की सबसे अच्छी नस्ल की
गाय उपलब्ध हैं ।
🚩इन
39 फार्म में लगभग #20 हजार गाय हैं, वहीं लगभग #2500 कर्मचारी यहां पर
काम करते हैं। सरकार के इस निर्णय के बाद इनकी नौकरी पर भी सीधे तौर पर असर
पड़ेगा।
The-soldiers-of-the-country-will-now-drink-packet-milk-The-central-government-is-shutting-down-39-cow-shelters
🚩आपको बता दें कि, पिछले माह ही #कैबिनेट की #कमेटी ने सेना को आदेश जारी कर 3 माह के अंदर इन गोशालाओं को बंद करने को कहा था।
🚩
टेलीग्राफ के अनुसार, सरकार का मानना है कि, चूंकि देश में अब निजी डेयरी
या दूध का कारोबार इतना बड़ा हो गया है कि सेना को खुद की फार्म की
आवश्यकता नहीं है। सेना को अब उन निजी डेयरी के जरिए दूध मुहैया कराया जा
सकता है। यानी भारतीय सेना के सैनिक अब पैकेटवाला दूध पीयेंगे ।
🚩#हालिया
दौर में सेना में #गोशाला के #भ्रष्टाचार को लेकर कई मामले सामने आए थे।
इस निर्णय को उससे भी जोड़ा जा रहा है। सरकार के इस निर्णय से जिन 39 फर्मों
पर फर्क पड़ेगा उनमें मेरठ, झांसी, कानपुर, अंबाला समेत कई बड़े शहरों के
फार्म हैं ।
🚩सरकार
के इस निर्णय पर #Indian Council of Agricultural Research (ICAR) के
वैज्ञानिकों का कहना है कि, वह इस बात को लेकर असमंजस में हैं कि, फार्म
बंद होने के बाद इन #20 हजार गायों का क्या होगा ? वैज्ञानिकों का कहना है
कि, देश में किसी और फार्म के पास इतनी क्षमता नहीं है कि वह 20000 गायों
का पालन-पोषण कर सके ।
🚩 स्त्रोत : हिन्दूजागृति
🚩अमेरिका
को जब एड्स जैसी बीमारी के उपाय ढूंढने में कोई कामयाबी नही मिली तब
उन्होंने गाय पर रिसर्च किया तब पता चला कि #गाय से #एड्स जैसी घातक बीमारी
भी मिट सकती है, उन्होंने पहले भी रिसर्च करके पाया है कि #गाय के #मूत्र
से #कैंसर जैसी जीवलेवा बीमारी से #छुटकारा पा सकते हैं, बड़े-बड़े रोग भी
गाय से मिट सकते हैं ऐसी परम् उपयोगी गाय का दूध पीये तो कोई बीमारी होगी
नही है, गाय के #दूध को #पृथ्वी पर का #अमृत कहा गया है, आज उसका दूध
सैनिकों के लिए सरकार बंद करवा रही है ।
🚩लन्दन
आदि में तो #बीमारियां #मिटाने के लिए भारत से #गौअर्क #500 से 1000 तक
ऑनलाइन खरीदते है, #गाय के #मूत्र और #दूध में #सुवर्णक्षार पाया गया है
जिससे मनुष्य का तन #तन्दुरुस्त और मन #प्रसन्न रहता है, गाय के दूध पीने
से कोई रोग नही आता है, #रोगप्रतिकारक शक्ति बढ़ जाती है यही हमारे जवान अगर
दूध पीयेंगे तो देश की अच्छी रक्षा कर पायेंगे लेकिन दुर्भाग्य है कि उनको
जहाँ से दूध मिलता है वही गौशालाये बन्द हो रही हैं ।
🚩भारत तो #मीट भेजने में #नंबर वन बना है, अब सरकार देशी गाय का दूध भेजने में नंबर वन कब बनेगी ??
🚩#देवहरा बाबा ने कहा था कि जबतक #गौ हत्या नही #रुकेगी तब तक देश में #सुख-शांति नहीं रहेगी और देश तरक्की नही करेगा ।
🚩देवहरा
बाबा और देश की जनता की बात को मान कर #केंद्र सरकार को #गौ-हत्या पर #रोक
लगानी चाहिए और मीट नही #देशी गाय का #दूध भेजने में #नंबर वन बनना चाहिए ।
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झारखंड में जबरन धर्मंपरिवर्तन कराया तो होगी 4 साल कैद और 1 लाख जुर्माना

अगस्त 7, 2017
🚩रांची : झारखंड धर्म स्वतंत्र विधेयक 2017 के प्रारूप को मंत्रिमंडल की मंजूरी मिल गयी है । अब सरकार इस बिल को विधानसभा में पेश करेगी। सरकार इसे सदन में पास करवाना चाहती है। जबकि विपक्ष ने बिल का विरोध किया है। हालांकि सरकार का सदन में बहुमत है ऐसे में बिल पास करवाने में ज्‍यादा कसरत नहीं करनी पड़ेगी  ।
jharkhand-me-jabran-dhrmparivartan-karwaya-to-hogi-4-saal-ki-kaid-aur-1lakh-ka-jurmana
🚩विधेयक के धारा – 3 में #बलपूर्वक #धर्मांतरण को #गैरकानूनी बताया गया है और धारा-3 के उपबंध का उल्लंघन करनेवाले आरोपी को 3 साल तक जेल या 50 हजार रुपये का जुर्माना या दोनों से दंडनीय किया जा सकता हैं ! यदि यह अपराध नाबालिग, महिला, अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजातीय के लोगों के साथ किया गया तो 4 साल जेल और 1 लाख जुर्माना तक होगा ।
🚩मर्जी से धर्म परिवर्तन किया तो प्रशासन को सूचित करें…
🚩अगर कोई अपनी मर्जी से धर्म परिवर्तन करता है, तो उस स्थिति में उसे स्थानीय प्रशासन को सूचित करना होगा। संबंधित व्यक्ति को इसकी सूचना उपायुक्त को देनी होगी। उपायुक्त को बताना होगा कि, उसने कहां, किस समारोह में और किन लोगों के समक्ष धर्म परिवर्तन किया है । स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन की सूचना सरकार को नहीं देने पर कठोर कार्रवाई का प्रावधान भी किया गया है ।
🚩आपको बता दें कि #झारखंड सरकार #अंधविश्वास को बढ़ावा देनेवाले कार्यक्रमों पर भी रोक लगाने की तैयारी में है।
 🚩 कुछ समय पहले झारखंड के मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा था कि कुछ लोग हमारी हिन्दू संस्कृति और परंपरा को नष्ट करने का प्रयास कर रहे हैं । लालच या प्रलोभन देकर धर्म परिवर्तन कराना अपराध है ।  हिन्दू धर्म और #सनातन #संस्कृति पर चोट या आंच पहुंचाने की कोशिश करने वालों को पकड़ कर पुलिस के हवाले करने को कहा ।
🚩इससे पहले #मुख्यमंत्री जी ने प्रदेश बीजेपी कार्य समिति के उद्घाटन समारोह में कहा था कि धर्म परिवर्तन कराने वाले पादरियों का स्थान #जेल में है और वे उन्हें जेल भेजेंगे ।
🚩बीते कुछ दिनों से मुख्यमंत्री रघुवर दास जी लगातार आदिवासियों का धर्म परिवर्तन कराने वाले ईसाई पादरियों को जेल भेजने की बात कह रहे हैं ।
🚩मुख्यमंत्री जी ने बिलकुल सही कहा है क्योंकि पूरी दुनिया मानती है कि #हिन्दू #धर्म सबसे श्रेष्ठ है और जो उनको ही लालच देकर धर्मान्तरण करवा रहे हैं उनकी तो जेल में ही जगह होनी चाहिये ।
🚩आपको बता दें कि रोमन #केथोलिक चर्च का एक छोटा राज्य है जिसे वेटिकन सिटी बोलते हैं । अपने धर्म (ईसाई) के प्रचार के लिए वे हर साल​ 17 हजार करोड़ डॉलर खर्च करते हैं ।
 🚩#वेटिकन के किसी भी व्यक्ति को पता नहीं है कि उनके कितने व्यापार चलते हैं ।
🚩रोम शहर में 33% #इलेक्ट्रॉनिक , प्लास्टिक, #एयर लाइन, #केमिकल और इंजीनियरिंग बिजनेस वेटिकन के हाथ में हैं ।
🚩दुनिया में सबसे बड़े #Shares​ वेटिकन के पास हैं ।
🚩इटालियन #बैंकिंग में उनकी बड़ी संपत्ति है और अमेरिका एवं स्विस बैंकों में उनकी बड़ी भारी deposite है ।
🚩ज्यादा जानकारी के लिए पुस्तक #VATICANEMPIRE पढ़े !!
🚩ईसाई पादरी छोटे #बच्चे- बच्चियों के साथ #दुष्कर्म करते हैं लेकिन उनके खिलाफ #मीडिया कुछ नही बोलती बल्कि उनका पक्ष लेती है क्योंकि 90% मीडिया ईसाई मिशनरियों के फंड से चलती है ।
🚩लेकिन जब कोई हिन्दू साधु-संत या हिन्दू संगठन या सरकार भोले-भाले #हिन्दुओं को #पैसा, #दवाई, कपड़े आदि देकर धर्मान्तरण के खिलाफ मुहिम चलाते हैं तो देशद्रोही और बिकाऊ मीडिया उनके खिलाफ देश में एक माहौल बनाकर उनकी छवि को धूमिल कर देते हैं ।
🚩ईसाई धर्मान्तरण पर रोक लगाने और हिंदुओं की घरवापसी कराने वाले #जयेन्द्र सरस्वती, संत #आसारामजी बापू, स्वामी असीमानन्द जैसे अनेक हिन्दू संतों को जेल भेज दिया गया और स्वामी #लक्ष्मणानन्द जी की तो हत्या करवा दी गई । ऐसे जो भी धर्मान्तरण के खिलाफ आवाज उठाता है उनको जेल भेज दिया जाता है या तो हत्या करवा दी जाती है ।
ये देश में बहुत बड़ा #षडयंत्र चल रहा है और हिन्दुओं का दिन-रात धर्मान्तरण करवा रहे हैं ।
🚩#झारखंड के #मुख्यमंत्री #रघुवर_दास जी खूब-खूब धन्यवाद के पात्र हैं जो #ईसाई #पादरी धर्मान्तरण करवा रहे हैं उन्होंने उनके खिलाफ अपनी मुहीम चलाई है ।
🚩ऐसे में #केंद्र_सरकार को आगे आना चाहिये और देशभर में #धर्मान्तरण के खिलाफ कानून पारित कर देना चाहिए और जो भी धर्मान्तरण करता हुआ पाया जाये उसको आजीवन जेल भेज देना चाहिए जिससे #धर्म #सुरक्षित हो, देश सुरक्षित हो ।
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गोवंश प्रतिबंध के बाद भी केवल नागपुर में सालाना 28 करोड से अधिक ‘गोमांस’ कारोबार

अगस्त 5, 2017

🚩नागपुर : #नागपुर के #अवैध #कत्लखानों से रोजाना एक ट्रक #गोमांस बाहर भेजा जा रहा है। सुकृष्ट निर्माण चैरिटेबल ट्रस्ट के प्रबंध संचालक #कनकराय उर्फ #कनूभाई सावड़िया के अनुसार, एक गाड़ी में #8 हजार किलोग्राम मांस होता है। 100 रुपए प्रति किलोग्राम के हिसाब से एक दिन में 8 लाख रुपए का माल भेजा जाता है। एक वर्ष में यह #आंकड़ा #28 करोड़ 80 लाख रुपए हो जाता है। यहां के #कामठी, #गड्डीगोदाम, #टेका नाका, #यशोधरा नगर आदि स्थानों पर #अवैध कत्लखानों का संचालन हो रहा है। यहां से गोमांस #हैदराबाद और #औरंगाबाद के कारखानों तक भेजा जाता है। इन कारखानों से सर्टिफाइड होकर और प्रोसेसिंग से गुजरने के बाद यह माल विदेशों में तक पहुंचाया जाता है।
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🚩हाल ही में नागपुर के जलालखेड़ा तहसील के हत्थीखाना गांव के रहने वाले #सलीम इस्माइल शाह को गोमांस ले जाने के आरोप में गोरक्षकों ने जमकर पीटा था। यह राष्ट्रीय बहस का मुद्दा बना। पूरे मामले में खास बात यह है कि जब महाराष्ट्र में मार्च #2015 में गोवंश काटने पर #प्रतिबंध लग गया तो यह मांस कहां से आया ?
🚩इस सवाल के जवाब में भास्कर ने नागपुर और इसके आस-पास के क्षेत्र में गोमांस पर पड़ताल की तो चौंकाने वाली जानकारी सामने आई। केवल नागपुर में ही प्रतिबंध के बाद 28 करोड़ 80 लाख का सालाना अवैध गोमांस का कारोबार होता है। इसके बाद #विदर्भ में #अमरावती इस कारोबार का दूसरा #बड़ा सेंटर है। दोनों ही जगह समय-समय पर इस कारोबार से जुड़े लोग व गोमांस पकड़ा भी गया। इस अवैध कारोबार की पुष्टि के लिए ये मामले काफी हैं। मगर अधिकांश बार इस #मामले में #प्रशासन और #पुलिस कार्रवाई करने से #बचते नजर आते हैं।
🚩3 वर्ष में #435 आरोपियों के विरोध में कार्रवाई
🚩पिछले तीन वर्ष में नागपुर, गोंदिया, गडचिरोली व अन्य जिले में पुलिस ने 435 #आरोपियों के विरोध में प्रकरण #दर्ज किया गया है। इन आरोपियों से इन तीन वर्षों (2014 से जुलाई के दूसरे सप्ताह 2017 तक) में लगभग #35 हजार किलोग्राम गोमांस बरामद किया गया है। इसे न्यायालय के आदेश पर नष्ट किया गया। इस साल गोमांस के #40 से अधिक #मामले नागपुर शहर और ग्रामीण थानों में दर्ज हो चुके हैं।
🚩नियमों का होता है कत्ल
🚩जानकारों की मानें तो किसी भी कत्लखाने में नियमों का पालन नहीं होता है। देश में गोमांस के बढ़ते कारोबार के लिए #प्रशासन की #लाचार नीति को गोरक्षक संगठन जिम्मेदार मानता है। गाेरक्षक संगठनों का कहना है कि जब तक सरकार गोमांस के मामले में गंभीर नहीं बनेगी। यह कारोबार इसी तरह फलता-फूलता रहेगा। इन सब के लिए कहीं न कहीं #प्रशासन के संबंधित विभाग की जिम्मेदारी बनती है। परंतु वे अपनी इस जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेते हैं।
🚩आसान काम नहीं संचालन
🚩#लाइसेंस लेकर कत्लखाना चलाना आसान काम नहीं है। इसके लिए कई औपचारकिताएं पूरी करनी पड़ती है। #पशु संवर्धन विभाग, #महानगरपालिका, #पुलिस, #फूड एंड ड्रग विभाग, #पर्यावरण विभाग, #आरटीओ सहित 8 से 10 विभागों की एनओसी लेनी पड़ती है। दावा यह भी किया जा रहा है कि सारी औपचारकिता पूरी करके भी नियमों का ख्याल नहीं रखा जाता। सरकारी विभाग इसको लेकर गंभीर भी नहीं रहते। भैंस के नाम पर गोमांस का कारोबार हो रहा है। #फूड एंड सेफ्टी स्टैंडर्ड एक्ट 2006 व #एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया के नियम व शर्तों को ताक पर रखकर यह कार्य किया जा रहा है।
🚩एक हजार में बिक रहीं गायें
🚩गायों के साथ उनके बछड़ों के चोरी होने के मामले बढ़ रहे हैं। इसके लिए बाकायदा पूरा गिरोह काम कर रहा है। एक हजार रुपए में एक गाय बिक रही है। पशु तस्कर इन गायों को कत्लखाने तक पहुंचाते हैं। जानकार बताते हैं कि, ऐसी गायें जो अब दूध नहीं दे रहीं वह 15-20 हजार रुपए में बिक रही हैं।
🚩एक सप्ताह में मिलती है रिपोर्ट
🚩#गोवंश को #बचाने का कार्य करने वाली शहर की सुकृत निर्माण चैरिटेबल ट्रस्ट के प्रबंध संचालक कनकराय उर्फ #कनूभाई सावड़िया का कहना है कि मांस की जांच रहाटे कॉलोनी चौक की फारेंसकी लैब में होती है। पहले जांच के लिए तीन महीने का समय लगता था, अब एक सप्ताह में रिपोर्ट मिल जाती है। उधर, सेवानिवृत्त #पशु चिकित्सक #श्याम काले का कहना है कि, एक हेल्दी जानवर से करीब सवा दो सौ किलो मांस निकलता है। #अवैध कत्लखाने सेहत के लिए भी #हानिकारक हैं। #जानवरों के शरीर से निकलने वाला अनुपयोगी #मटेरियल पर्यावरण के लिए भी #खतरा है।
🚩खुलेआम हो रहा है अवैध कारोबार
🚩नागपुर जिले में 20 गोरक्षण संस्थाएं हैं। इन संस्थाओं के लिए कार्य करने वाले गोरक्षक गाय और बछड़ों की तस्करी करने वालों पर नजर रखते हैं। खुलेआम रोज विदर्भ में एक करोड़ से अधिक का गोमांस का अवैध कारोबार हो रहा है। इससे जुड़ी जानकारियां समय-समय पर हमारे पास आती हैं। हम #प्रशासन को बता-बता कर #परेशान हैं, मगर #कोई कार्रवाई नहीं होती। पिछले कुछ महीने में #नागपुर, #मौदा, #कामठी, #यशोधरा नगर और वणी में बडी संख्या में गायों और बछड़ों को पुलिस की मदद से #मुक्त कराया गया है।
🚩3 वर्ष में 1 करोड 1 लाख का गोमांस जब्त
🚩अमरावती शहर में विगत 2015 से जुलाई 2017 के बीच पुलिस ने मवेशियों की ढुलाई तथा गौमांस के #62 मामले पकड़े। इसमें #1 करोड़ 9 लाख 13 हजार 960 रुपए का #गोमांस #जब्त कर 686 मवेशियों को जीवनदान दिया है। बावजूद इसके आज भी अवैध मवेशियों की ढुलाई व  कटाई खुलेआम चल रही है। पुलिस के आंकड़े बताते हैं कि, 2015 में गोहत्या व मवेशी ढुलाई के #18 मामले दर्ज हुए थे। #37 आरोपियों को गिरफ्तार कर #13 वाहन जब्त किए गए। इसी तरह #2016 में #25 मामले सामने आए। इसमें 217 मवेशियों को मुक्त कराया गया। #9 लाख 35 हजार का गोमांस पुलिस ने जब्त कर #57 आरोपियों को गिरफ्तार किया। इसमें #26 वाहन आज भी जब्त हैं। इन दो वर्षों में दाखिल हुए मामलों में पुलिस द्वारा 36 मामलों में चार्जशीट न्यायालय में पेश की गई है।
🚩स्त्रोत : दैनिक भास्कर
🚩एक तरफ #गौ हत्या पर #सरकार #प्रतिबन्द लगाने का बोल रही है दूसरी ओर  #भारत मीट के #निकास में #नंबर एक बन रहा है, कबतक ऐसा चलता रहेगा?
🚩अमेरिका जैसे देश #गौ माता पर रिसर्च करके जीवलेवा #कैंसर, #एड्स आदि #बीमारियों को मिटाने के लिए #गौ-मूत्र से #दवाइयां बनवा रहे हैं और #भारत में उसकी #हत्या हो रही है।
🚩कब रुकेगी गौ हत्या..???
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संस्कृत भाषा की महानता एवं उपयोगिता

संस्कृत दिवस : 7 अगस्त
🚩#संस्कृत में #1700 धातुएं, #70 प्रत्यय और #80 उपसर्ग हैं, इनके योग से जो शब्द बनते हैं, उनकी #संख्या #27 लाख 20 हजार होती है। यदि दो शब्दों से बने सामासिक शब्दों को जोड़ते हैं तो उनकी संख्या लगभग 769 करोड़ हो जाती है। #संस्कृत #इंडो-यूरोपियन लैंग्वेज की सबसे #प्राचीन भाषा है और सबसे वैज्ञानिक भाषा भी है। इसके सकारात्मक तरंगों के कारण ही ज्यादातर श्लोक संस्कृत में हैं। भारत में संस्कृत से लोगों का जुड़ाव खत्म हो रहा है लेकिन विदेशों में इसके प्रति रुझाान बढ़ रहा है।
greatness of Sanskrit
🚩ब्रह्मांड में सर्वत्र गति है। गति के होने से ध्वनि प्रकट होती है । ध्वनि से शब्द परिलक्षित होते हैं और शब्दों से भाषा का निर्माण होता है। आज अनेकों भाषायें प्रचलित हैं । किन्तु इनका काल निश्चित है कोई सौ वर्ष, कोई पाँच सौ तो कोई हजार वर्ष पहले जन्मी। साथ ही इन भिन्न भिन्न भाषाओं का जब भी जन्म हुआ, उस समय अन्य भाषाओं का अस्तित्व था। अतः पूर्व से ही भाषा का ज्ञान होने के कारण एक नयी भाषा को जन्म देना अधिक कठिन कार्य नहीं है। किन्तु फिर भी साधारण मनुष्यों द्वारा साधारण रीति से बिना किसी वैज्ञानिक आधार के निर्माण की गयी सभी भाषाओं मे भाषागत दोष दिखते हैं । ये सभी भाषाए पूर्ण शुद्धता,स्पष्टता एवं वैज्ञानिकता की कसौटी पर खरी नहीं उतरती। क्योंकि ये सिर्फ और सिर्फ एक दूसरे की बातों को समझने के साधन मात्र के उद्देश्य से बिना किसी सूक्ष्म वैज्ञानिकीय चिंतन के बनाई गयी। किन्तु मनुष्य उत्पत्ति के आरंभिक काल में, धरती पर किसी भी भाषा का अस्तित्व न था।
🚩 तो सोचिए किस प्रकार भाषा का निर्माण संभव हुआ होगा?
शब्दों का आधार ध्वनि है, तब ध्वनि थी तो स्वाभाविक है शब्द भी थे। किन्तु व्यक्त नहीं हुये थे, अर्थात उनका ज्ञान नहीं था ।
उदाहरणार्थ कुछ लोग कहते है कि अग्नि का आविष्कार फलाने समय में हुआ।
 🚩तो क्या उससे पहले अग्नि न थी महानुभावों? अग्नि तो धरती के जन्म से ही है किन्तु उसका ज्ञान निश्चित समय पर हुआ। इसी प्रकार शब्द व ध्वनि थे किन्तु उनका ज्ञान न था । तब उन प्राचीन ऋषियों ने मनुष्य जीवन की आत्मिक एवं लौकिक उन्नति व विकास में शब्दो के महत्व और शब्दों की अमरता का गंभीर आकलन किया । उन्होने एकाग्रचित्त हो ध्वानपूर्वक, बार बार मुख से अलग प्रकार की ध्वनियाँ उच्चारित की और ये जानने में प्रयासरत रहे कि मुख-विवर के किस सूक्ष्म अंग से ,कैसे और कहाँ से ध्वनि जन्म ले रही है। तत्पश्चात निरंतर अथक प्रयासों के फलस्वरूप उन्होने परिपूर्ण, पूर्ण शुद्ध,स्पष्ट एवं अनुनाद क्षमता से युक्त ध्वनियों को ही भाषा के रूप में चुना । सूर्य के एक ओर से 9 रश्मिया निकलती हैं और सूर्य के चारो ओर से 9 भिन्न भिन्न रश्मियों के निकलने से कुल निकली 36 रश्मियों की ध्वनियों पर संस्कृत के 36 स्वर बने और इन 36 रश्मियो के पृथ्वी के आठ वसुओ से टकराने से 72 प्रकार की ध्वनि उत्पन्न होती हैं । जिनसे संस्कृत के 72 व्यंजन बने। इस प्रकार ब्रह्माण्ड से निकलने वाली कुल #108 ध्वनियों पर #संस्कृत की #वर्णमाला आधारित है। ब्रह्मांड की इन ध्वनियों के रहस्य का ज्ञान वेदों से मिलता है। इन ध्वनियों को नासा ने भी स्वीकार किया है जिससे स्पष्ट हो जाता है कि प्राचीन ऋषि मुनियों को उन ध्वनियों का ज्ञान था और उन्ही ध्वनियों के आधार पर उन्होने पूर्णशुद्ध भाषा को अभिव्यक्त किया। अतः #प्राचीनतम #आर्य भाषा जो ब्रह्मांडीय संगीत थी उसका नाम “#संस्कृत” पड़ा। संस्कृत – संस् + कृत् अर्थात श्वासों से निर्मित अथवा साँसो से बनी एवं स्वयं से कृत , जो कि ऋषियों के ध्यान लगाने व परस्पर-संप्रक से अभिव्यक्त हुयी।
🚩कालांतर में पाणिनी ने नियमित व्याकरण के द्वारा संस्कृत को परिष्कृत एवं सर्वम्य प्रयोग में आने योग्य रूप प्रदान किया। #पाणिनीय व्याकरण ही #संस्कृत का #प्राचीनतम व सर्वश्रेष्ठ #व्याकरण है। दिव्य व दैवीय गुणों से युक्त, अतिपरिष्कृत, परमार्जित, सर्वाधिक व्यवस्थित, अलंकृत सौन्दर्य से युक्त , पूर्ण समृद्ध व सम्पन्न , पूर्णवैज्ञानिक देववाणी संस्कृत – मनुष्य की आत्मचेतना को जागृत करने वाली, सात्विकता में वृद्धि , बुद्धि व आत्मबलप्रदान करने वाली सम्पूर्ण विश्व की सर्वश्रेष्ठ भाषा है। अन्य सभी भाषाओ में त्रुटि होती है पर इस भाषा में कोई त्रुटि नहीं है। इसके उच्चारण की शुद्धता को इतना सुरक्षित रखा गया कि सहस्त्रों वर्षो से लेकर आज तक वैदिक मन्त्रों की ध्वनियों व मात्राओं में कोई पाठभेद नहीं हुआ और ऐसा सिर्फ हम ही नहीं कह रहे बल्कि विश्व के आधुनिक विद्वानों और भाषाविदों ने भी एक स्वर में संस्कृत को पूर्णवैज्ञानिक एवं सर्वश्रेष्ठ माना है।
🚩संस्कृत की सर्वोत्तम शब्द-विन्यास युक्ति के, गणित के, कंप्यूटर आदि के स्तर पर नासा व अन्य वैज्ञानिक व भाषाविद संस्थाओं ने भी इस भाषा को एकमात्र वैज्ञानिक भाषा मानते हुये इसका अध्ययन आरंभ कराया है और भविष्य में भाषा-क्रांति के माध्यम से आने वाला समय संस्कृत का बताया है। अतः अंग्रेजी बोलने में बड़ा गौरव अनुभव करने वाले, अंग्रेजी में गिटपिट करके गुब्बारे की तरह फूल जाने वाले कुछ महाशय जो संस्कृत में दोष गिनाते हैं उन्हें कुँए से निकलकर संस्कृत की वैज्ञानिकता का एवं संस्कृत के विषय में विश्व के सभी विद्वानों का मत जानना चाहिए।
 🚩नासा को हमने खड़ा नहीं किया है अपनी तारीफ करवाने के लिए…नासा की वेबसाईट पर जाकर संस्कृत का महत्व क्या है पढ़ लो ।
🚩काफी शर्म की बात है कि भारत की भूमि पर ऐसे खरपतवार पैदा हो रहे हैं जिन्हें अमृतमयी वाणी संस्कृत में दोष व विदेशी भाषाओं में गुण ही गुण नजर आते हैं वो भी तब जब विदेशी भाषा वाले संस्कृत को सर्वश्रेष्ठ मान रहे हैं ।
🚩अतः जब हम अपने बच्चों को कई विषय पढ़ा सकते हैं तो संस्कृत पढ़ाने में संकोच नहीं करना चाहिए। देश विदेश में हुये कई शोधो के अनुसार संस्कृत मस्तिष्क को काफी तीव्र करती है जिससे अन्य भाषाओं व विषयों को समझने में काफी सरलता होती है , साथ ही यह सत्वगुण में वृद्धि करते हुये नैतिक बल व चरित्र को भी सात्विक बनाती है। अतः सभी को यथायोग्य संस्कृत का अध्ययन करना चाहिए।
🚩आज दुनिया भर में लगभग #6900 भाषाओं का प्रयोग किया जाता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इन भाषाओं की जननी कौन है?
 नहीं?
🚩कोई बात नहीं आज हम आपको दुनिया की सबसे #पुरानी भाषा के बारे में विस्तृत जानकारी देने जा रहे हैं।
 दुनिया की सबसे पुरानी भाषा है :- #संस्कृत भाषा ।
🚩आइये जाने संस्कृत भाषा का महत्व :
संस्कृत भाषा के विभिन्न स्वरों एवं व्यंजनों के विशिष्ट उच्चारण स्थान होने के साथ प्रत्येक स्वर एवं व्यंजन का उच्चारण व्यक्ति के सात ऊर्जा चक्रों में से एक या एक से अधिक चक्रों को निम्न प्रकार से प्रभावित करके उन्हें क्रियाशील – उर्जीकृत करता है :-
🚩मूलाधार चक्र – स्वर ‘अ’ एवं क वर्ग का उच्चारण मूलाधार चक्र पर प्रभाव डाल कर उसे क्रियाशील एवं सक्रिय करता है।
        स्वर ‘इ’ तथा च वर्ग का उच्चारण स्वाधिष्ठान चक्र को उर्जीकृत  करता है।
        स्वर  ‘ऋ’ तथा ट वर्ग का उच्चारण मणिपूरक चक्र को सक्रिय एवं उर्जीकृत करता है।
       स्वर  ‘लृ’ तथा त वर्ग का उच्चारण अनाहत चक्र को प्रभावित करके उसे उर्जीकृत एवं सक्रिय करता है।
        स्वर ‘उ’ तथा प वर्ग का उच्चारण विशुद्धि चक्र को प्रभावित करके उसे सक्रिय करता है।
    ईषत्  स्पृष्ट  वर्ग का उच्चारण मुख्य रूप से आज्ञा चक्र एवं अन्य चक्रों को सक्रियता प्रदान करता  है।
     ईषत् विवृत वर्ग का उच्चारण मुख्य रूप से
🚩सहस्त्राधार चक्र एवं अन्य चक्रों को सक्रिय करता है।
इस प्रकार देवनागरी लिपि के  प्रत्येक स्वर एवं व्यंजन का उच्चारण व्यक्ति के किसी न किसी उर्जा चक्र को सक्रिय करके व्यक्ति की चेतना के स्तर में अभिवृद्धि करता है। वस्तुतः संस्कृत भाषा का प्रत्येक शब्द इस प्रकार से संरचित (design) किया गया है कि उसके स्वर एवं व्यंजनों के मिश्रण (combination) का उच्चारण करने पर वह हमारे विशिष्ट ऊर्जा चक्रों को प्रभावित करे। प्रत्येक शब्द स्वर एवं व्यंजनों की विशिष्ट संरचना है जिसका प्रभाव व्यक्ति की चेतना पर स्पष्ट परिलक्षित होता है। इसीलिये कहा गया है कि व्यक्ति को शुद्ध उच्चारण के साथ-साथ बहुत सोच-समझ कर बोलना चाहिए। शब्दों में शक्ति होती है जिसका दुरूपयोग एवं सदुपयोग स्वयं पर एवं दूसरे पर प्रभाव डालता है। शब्दों के प्रयोग से ही व्यक्ति का स्वभाव, आचरण, व्यवहार एवं व्यक्तित्व निर्धारित होता है।
🚩उदाहरणार्थ जब ‘राम’ शब्द का उच्चारण किया जाता है है तो हमारा अनाहत चक्र जिसे ह्रदय चक्र भी कहते है सक्रिय होकर उर्जीकृत होता है। ‘कृष्ण’ का उच्चारण मणिपूरक चक्र – नाभि चक्र को सक्रिय करता है। ‘सोह्म’ का उच्चारण दोनों ‘अनाहत’ एवं ‘मणिपूरक’ चक्रों को सक्रिय करता है।
🚩वैदिक मंत्रो को हमारे मनीषियों ने इसी आधार पर विकसित किया है। प्रत्येक मन्त्र स्वर एवं व्यंजनों की एक विशिष्ट संरचना है। इनका निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार शुद्ध उच्चारण ऊर्जा चक्रों को सक्रिय करने के साथ साथ मष्तिष्क की चेतना को उच्चीकृत करता है। उच्चीकृत चेतना के साथ व्यक्ति विशिष्टता प्राप्त कर लेता है और उसका कहा हुआ अटल होने के साथ-साथ अवश्यम्भावी होता है। शायद आशीर्वाद एवं श्राप देने का आधार भी यही है। संस्कृत भाषा की वैज्ञानिकता एवं सार्थकता इस तरह स्वयं सिद्ध है।
🚩भारतीय #शास्त्रीय #संगीत के #सातों स्वर हमारे शरीर के सातों उर्जा चक्रों से जुड़े हुए हैं । प्रत्येक का उच्चारण सम्बंधित उर्जा चक्र को क्रियाशील करता है। शास्त्रीय राग इस प्रकार से विकसित किये गए हैं जिससे उनका उच्चारण / गायन विशिष्ट उर्जा चक्रों को सक्रिय करके चेतना के स्तर को उच्चीकृत करे। प्रत्येक राग मनुष्य की चेतना को विशिष्ट प्रकार से उच्चीकृत करने का सूत्र (formula) है। इनका सही अभ्यास व्यक्ति को असीमित ऊर्जावान बना देता है।
🚩संस्कृत केवल #स्वविकसित भाषा नहीं बल्कि संस्कारित भाषा है इसीलिए इसका नाम संस्कृत है। संस्कृत को संस्कारित करने वाले भी कोई साधारण भाषाविद् नहीं बल्कि महर्षि पाणिनि; महर्षि कात्यायिनि और योग शास्त्र के प्रणेता महर्षि पतंजलि हैं। इन तीनों महर्षियों ने बड़ी ही कुशलता से योग की क्रियाओं को भाषा में समाविष्ट किया है। यही इस भाषा का रहस्य है । जिस प्रकार साधारण पकी हुई दाल को शुध्द घी में जीरा; मैथी; लहसुन; और हींग का तड़का लगाया जाता है;तो उसे संस्कारित दाल कहते हैं। घी ; जीरा; लहसुन, मैथी ; हींग आदि सभी महत्वपूर्ण औषधियाँ हैं। ये शरीर के तमाम विकारों को दूर करके पाचन संस्थान को दुरुस्त करती है।दाल खाने वाले व्यक्ति को यह पता ही नहीं चलता कि वह कोई कटु औषधि भी खा रहा है; और अनायास ही आनन्द के साथ दाल खाते-खाते इन औषधियों का लाभ ले लेता है। ठीक यही बात संस्कारित भाषा संस्कृत के साथ सटीक बैठती है। जो भेद साधारण दाल और संस्कारित दाल में होता है ;वैसा ही भेद अन्य भाषाओं और संस्कृत भाषा के बीच है।
🚩संस्कृत भाषा में वे औषधीय तत्व क्या है ? यह विश्व की तमाम भाषाओं से संस्कृत भाषा का तुलनात्मक अध्ययन करने से स्पष्ट हो जाता है। चार महत्वपूर्ण विशेषताएँ:- 1. अनुस्वार (अं ) और विसर्ग (अ:): संस्कृत भाषा की सबसे महत्वपूर्ण और लाभदायक व्यवस्था है, अनुस्वार और विसर्ग। पुल्लिंग के अधिकांश शब्द विसर्गान्त होते हैं -यथा- राम: बालक: हरि: भानु: आदि। नपुंसक लिंग के अधिकांश शब्द अनुस्वारान्त होते हैं-यथा- जलं वनं फलं पुष्पं आदि।
🚩विसर्ग का उच्चारण और कपालभाति प्राणायाम दोनों में श्वास को बाहर फेंका जाता है। अर्थात् जितनी बार विसर्ग का उच्चारण करेंगे उतनी बार कपालभाति प्रणायाम अनायास ही हो जाता है। जो लाभ कपालभाति प्रणायाम से होते हैं, वे केवल संस्कृत के विसर्ग उच्चारण से प्राप्त हो जाते हैं।उसी प्रकार अनुस्वार का उच्चारण और भ्रामरी प्राणायाम एक ही क्रिया है । भ्रामरी प्राणायाम में श्वास को नासिका के द्वारा छोड़ते हुए भवरे की तरह गुंजन करना होता है और अनुस्वार के उच्चारण में भी यही क्रिया होती है। अत: जितनी बार अनुस्वार का उच्चारण होगा , उतनी बार भ्रामरी प्राणायाम स्वत: हो जायेगा । जैसे हिन्दी का एक वाक्य लें- ” राम फल खाता है”इसको संस्कृत में बोला जायेगा- ” राम: फलं खादति”=राम फल खाता है ,यह कहने से काम तो चल जायेगा ,किन्तु राम: फलं खादति कहने से अनुस्वार और विसर्ग रूपी दो प्राणायाम हो रहे हैं। यही संस्कृत भाषा का रहस्य है। संस्कृत भाषा में एक भी वाक्य ऐसा नहीं होता जिसमें अनुस्वार और विसर्ग न हों। अत: कहा जा सकता है कि संस्कृत बोलना अर्थात् चलते फिरते योग साधना करना होता है ।
🚩2.शब्द-रूप:-संस्कृत की दूसरी विशेषता है शब्द रूप। विश्व की सभी भाषाओं में एक शब्द का एक ही रूप होता है,जबकि संस्कृत में प्रत्येक शब्द के 25 रूप होते हैं। जैसे राम शब्द के निम्नानुसार 25 रूप बनते हैं- यथा:- रम् (मूल धातु)-राम: रामौ रामा:;रामं रामौ रामान् ;रामेण रामाभ्यां रामै:; रामाय रामाभ्यां रामेभ्य: ;रामत् रामाभ्यां रामेभ्य:; रामस्य रामयो: रामाणां; रामे रामयो: रामेषु ;हे राम ! हेरामौ ! हे रामा : ।ये 25 रूप सांख्य दर्शन के 25 तत्वों का प्रतिनिधित्व करते हैं।
🚩जिस प्रकार पच्चीस तत्वों के ज्ञान से समस्त सृष्टि का ज्ञान प्राप्त हो जाता है, वैसे ही संस्कृत के पच्चीस रूपों का प्रयोग करने से आत्म साक्षात्कार हो जाता है और इन 25 तत्वों की शक्तियाँ संस्कृतज्ञ को प्राप्त होने लगती है। सांख्य दर्शन के 25 तत्व निम्नानुसार हैं -आत्मा (पुरुष), (अंत:करण 4 ) मन बुद्धि चित्त अहंकार, (ज्ञानेन्द्रियाँ 5) नासिका जिह्वा नेत्र त्वचा कर्ण, (कर्मेन्द्रियाँ 5) पाद हस्त उपस्थ पायु वाक्, (तन्मात्रायें 5) गन्ध रस रूप स्पर्श शब्द,( महाभूत 5) पृथ्वी जल अग्नि वायु आकाश।
🚩3.द्विवचन:-संस्कृत भाषा की तीसरी विशेषता है द्विवचन। सभी भाषाओं में एक वचन और बहुवचन होते हैं जबकि संस्कृत में द्विवचन अतिरिक्त होता है। इस द्विवचन पर ध्यान दें तो पायेंगे कि यह द्विवचन बहुत ही उपयोगी और लाभप्रद है। जैसे :- राम शब्द के द्विवचन में निम्न रूप बनते हैं:- रामौ , रामाभ्यां और रामयो:। इन तीनों शब्दों के उच्चारण करने से योग के क्रमश: मूलबन्ध ,उड्डियान बन्ध और जालन्धर बन्ध लगते हैं, जो योग की बहुत ही महत्वपूर्ण क्रियायें हैं।
🚩4. सन्धि:-संस्कृत भाषा की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता है सन्धि। ये संस्कृत में जब दो शब्द पास में आते हैं तो वहाँ सन्धि होने से स्वरूप और उच्चारण बदल जाता है। उस बदले हुए उच्चारण में जिह्वा आदि को कुछ विशेष प्रयत्न करना पड़ता है।ऐसे सभी प्रयत्न एक्यूप्रेशर चिकित्सा पद्धति के प्रयोग हैं।”इति अहं जानामि” इस वाक्य को चार प्रकार से बोला जा सकता है, और हर प्रकार के उच्चारण में वाक् इन्द्रिय को विशेष प्रयत्न करना होता है।
🚩यथा:- 1 इत्यहं जानामि। 2 अहमिति जानामि। 3 जानाम्यहमिति । 4 जानामीत्यहम्। इन सभी उच्चारणों में विशेष आभ्यंतर प्रयत्न होने से एक्यूप्रेशर चिकित्सा पद्धति का सीधा प्रयोग अनायास ही हो जाता है। जिसके फल स्वरूप मन बुद्धि सहित समस्त शरीर पूर्ण स्वस्थ एवं नीरोग हो जाता है। इन समस्त तथ्यों से सिद्ध होता है कि संस्कृत भाषा केवल विचारों के आदान-प्रदान की भाषा ही नहीं ,अपितु मनुष्य के सम्पूर्ण विकास की कुंजी है। यह वह भाषा है, जिसके उच्चारण करने मात्र से व्यक्ति का कल्याण हो सकता है। इसीलिए इसे देवभाषा और अमृतवाणी कहते हैं।
🚩#अमरभाषा है संस्कृत
संस्कृत भाषा का व्याकरण अत्यंत #परिमार्जित एवं #वैज्ञानिक है।
🚩#संस्कृत के एक #वैज्ञानिक भाषा होने का पता उसके किसी वस्तु को संबोधन करने वाले शब्दों से भी पता चलता है। इसका हर शब्द उस वस्तु के बारे में, जिसका नाम रखा गया है, के सामान्य लक्षण और गुण को प्रकट करता है। ऐसा अन्य भाषाओं में बहुत कम है। पदार्थों के नामकरण ऋषियों ने वेदों से किया है और वेदों में यौगिक शब्द हैं और हर शब्द गुण आधारित हैं ।
इस कारण #संस्कृत में #वस्तुओं के नाम उसका #गुण आदि प्रकट करते हैं। जैसे हृदय शब्द। हृदय को अंगेजी में हार्ट कहते हैं और संस्कृत में हृदय कहते हैं।
🚩अंग्रेजी वाला शब्द इसके लक्षण प्रकट नहीं कर रहा, लेकिन संस्कृत शब्द इसके लक्षण को प्रकट कर इसे परिभाषित करता है। बृहदारण्यकोपनिषद 5.3.1 में हृदय शब्द का अक्षरार्थ इस प्रकार किया है- तदेतत् र्त्यक्षर हृदयमिति, हृ इत्येकमक्षरमभिहरित, द इत्येकमक्षर ददाति, य इत्येकमक्षरमिति।
अर्थात हृदय शब्द हृ, हरणे द दाने तथा इण् गतौ इन तीन धातुओं से निष्पन्न होता है। हृ से हरित अर्थात शिराओं से अशुद्ध रक्त लेता है, द से ददाति अर्थात शुद्ध करने के लिए फेफड़ों को देता है और य से याति अर्थात सारे शरीर में रक्त को गति प्रदान करता है। इस सिद्धांत की खोज हार्वे ने 1922 में की थी, जिसे हृदय शब्द स्वयं लाखों वर्षों से उजागर कर रहा था ।
🚩संस्कृत में #संज्ञा, #सर्वनाम,# विशेषण और #क्रिया के कई तरह से शब्द रूप बनाए जाते, जो उन्हें व्याकरणीय अर्थ प्रदान करते हैं। अधिकांश शब्द-रूप मूल शब्द के अंत में प्रत्यय लगाकर बनाए जाते हैं। इस तरह यह कहा जा सकता है कि संस्कृत एक बहिर्मुखी-अंतःश्लिष्टयोगात्मक भाषा है। संस्कृत के व्याकरण को महापुरुषों ने वैज्ञानिक स्वरूप प्रदान किया है। संस्कृत भारत की कई लिपियों में लिखी जाती रही है, लेकिन आधुनिक युग में देवनागरी लिपि के साथ इसका विशेष संबंध है। देवनागरी लिपि वास्तव में संस्कृत के लिए ही बनी है, इसलिए इसमें हरेक चिन्ह के लिए एक और केवल एक ही ध्वनि है।
🚩#देवनागरी में 13 स्वर और 34 व्यंजन हैं। #संस्कृत केवल स्वविकसित भाषा नहीं, बल्कि #संस्कारित भाषा भी है, अतः इसका नाम संस्कृत है। केवल संस्कृत ही एकमात्र भाषा है, जिसका नामकरण उसके बोलने वालों के नाम पर नहीं किया गया है। #संस्कृत को संस्कारित करने वाले भी कोई साधारण भाषाविद नहीं, बल्कि #महर्षि पाणिनि, #महर्षि कात्यायन और योगशास्त्र के प्रणेता #महर्षि पतंजलि हैं।
🚩विश्व की सभी भाषाओं में एक शब्द का प्रायः एक ही रूप होता है, जबकि #संस्कृत में #प्रत्येक शब्द के #27 रूप होते हैं। सभी भाषाओं में एकवचन और बहुवचन होते हैं, जबकि संस्कृत में द्विवचन अतिरिक्त होता है। संस्कृत भाषा की सबसे महत्त्वपूर्ण विशेषता है संधि। संस्कृत में जब दो अक्षर निकट आते हैं, तो वहां संधि होने से स्वरूप और उच्चारण बदल जाता है। इसे कम्प्यूटर अर्थात कृत्रिम बुद्धि के लिए सबसे उपयुक्त भाषा माना जाता है। शोध से ऐसा पाया गया है कि #संस्कृत पढ़ने से #स्मरण शक्ति बढ़ती है।
🚩संस्कृत ही एक मात्र साधन हैं, जो क्रमशः अंगुलियों एवं जीभ को लचीला बनाते हैं।  इसके अध्ययन करने वाले छात्रों को गणित, विज्ञान एवं अन्य भाषाएं ग्रहण करने में सहायता मिलती है। वैदिक ग्रंथों की बात छोड़ भी दी जाए, तो भी #संस्कृत भाषा में #साहित्य की रचना कम से कम #छह हजार वर्षों से निरंतर होती आ रही है। संस्कृत केवल एक भाषा मात्र नहीं है, अपितु एक विचार भी है। #संस्कृत एक #भाषा मात्र नहीं, बल्कि एक #संस्कृति है और #संस्कार भी है। #संस्कृत में विश्व का #कल्याण है, #शांति है, #सहयोग है और #वसुधैव कुटुंबकम की भावना भी है ।
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पाकिस्तान से आए हिंदुओं का दर्द : न तो नौकरी है, ना घर, ना पैसा और ना खाना, पशु की तरह हैं

 अगस्त 4, 2017

🚩कश्मीर, बंगाल, असम में #मुस्लिम समुदाय वाले #अवैध #घुसपैठी करके #हिन्दुस्तान को #तोड़ रहे हैं फिर भी सरकार वोट बैंक के लिये सारी सुविधाएं दे रही है दूसरी ओर पाकिस्तान और बांग्लादेश में नर्क से बत्तर जिंदगी जीने वाले हिन्दू जब हिंदुस्तान में आते हैं तभी भी उनको सरकार की ओर से कोई सुविधा उपलब्ध नही करवाई जाती है ।
पाकिस्तान से आए हिंदुओं का दर्द
🚩बंटवारे के दौरान पाकिस्तान में अत्याचार सह रहे लाखों लोगों ने भारत जाने का सपना देखा था। इन्हीं में एक है पाकिस्तान से भारत आए #जोगदास, परंतु सीमा के इस पार भी हकीकत उनके लिए किसी दर्द भरे सपने से कम नहीं है। #बंटवारे के दौरान मानव इतिहास का सबसे बड़ा #स्थानांतर हुआ जो 70 वर्ष बाद भी जारी है और बेहतर जीवन की चाहत लेकर पाकिस्तान से लोग अभी भारत आ रहे हैं। उस समय कई हजार लोगों को सीमा के पास स्थित कैंपों में बसाया गया पंरतु उन्हें काम करने का अधिकार नहीं दिया गया। उन्हीं में 81 वर्ष के #जोगदास भी शामिल हैं।
🚩#जोगदास का कहना है कि, यहां भारत में उनके पास न तो नौकरी है, ना घर, ना पैसा और ना खाना। वहां (पाकिस्तान) हम खेतों में काम करते थे। हम सब किसान थे। पंरतु यहाँ हम जिंदगी जीने के लिए पत्थर तोड़ने को मजूबर हैं । #जोधपुर कैंप में रह रहे जोगदास ने न्यूज #एजेंसी एएफपी से कहा कि, हमारे के लिए बंटवारा अभी भी समाप्त नहीं हुआ। पाकिस्तान में रह रहे हिन्दू अपने देश (भारत) लौटने का प्रयास कर रहे हैं और यहां हमारे लिए कुछ भी नहीं है।
🚩वर्ष #1947 में ब्रिटेन की गुलामी से #स्वतंत्रता मिलने के बाद #15 मिलियन (डेढ करोड) से ज्यादा लोग भारत आए और महीनों तक चली हिंसा में कम से कम #10 लाख लोगों की #मृत्यु हुई। #खूनी विवाद के बाद बने पाकिस्तान से #हिन्दू और #सिखों ने #पलायन किया जबकि मुसलमान पाकिस्तान में जाकर बसे। पलायन के बावजूद भी हिन्दू पाकिस्तान में सबसे बड़ा अल्पसंख्यक समुदाय है। #पाकिस्तान में रह रहे #हिंदुओं का कहना है कि, उन्हें आए दिन #भेदभाव यहां तक कि #अगवा, #बलात्कार और #बलपूर्वक विवाह जैसी घटनाओं का सामना करना पड़ता है।
🚩जोगदास बताते हैं कि, विभाजन के बाद से अत्याचार शुरू हो गया था। वहां पर एक दिन भी ऐसा नहीं जाता था जब हम शांति की जिंदगी गुजारे हो। मैं वापस आकर अपने हिन्दू भाइयों के साथ रहना चाहता था।
🚩ज्यादा प्रवासी पाकिस्तान के सिंध प्रांत से आए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, हकीकत में वह लोग अलग शिविरों में स्थानीय लोगों से दूर रहते हैं और #प्रशासन द्वारा उन्हें संदेह की नजरों से देखा जाता है और व्यवहार किया जाता है। #प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने भारत में शरण पाने के लिए आए लोगों के लिए प्रक्रिया को आसान बनाने का #विश्वास दिलाया। पिछले वर्ष उन्होंने नियमों में परिवर्तन करते हुए केंद्र सरकार के माध्यम से जाने के बजाय आप्रवासियों को उस राज्य में नागरिकता के लिए आवेदन करने की अनुमति दी थी, जहां वह रह रहे हैं। पाकिस्तान से आए हिंदुओं ने 7 वर्षों के बाद #नागरिकता प्राप्त करने की #प्रक्रिया में तेजी देखी। पंरतु #नौकरशाही की ओर से #विलंब का कारण है कि इसे प्राप्त करने की प्रक्रिया को पूरा करने में अधिक समय लग सकता है।
🚩#64 वर्ष के खनारामजी वर्ष 1997 में पाकिस्तान से भारत आए और वर्ष #2005 में उन्हें भारतीय #नागरिकता मिली। उन्होंने कहा कि, भारत में जीवन से मोहभंग होने के बहुत से लोगों ने #सदस्यता की आशा छोड़ दी और #पाकिस्तान #वापस चले गए। उन्होंने कहा, “सरकार की ओर से हमें कोई #सहायता #नहीं मिली। हम केवल पशु की तरह हैं, जिसका कोई मालिक नहीं है। हम खुद से जीवित हैं। हमारे के लिए गरीबी से भी बदतर अधिकारियों द्वारा हम पर किया जाने वाला संदेह है।
🚩स्त्रोत : जनसत्ता
🚩#पाकिस्तान और #बांग्लादेश सरकार उनको कोई भी सुविधा नही देती है और हररोज उनको #प्रताड़ित किया जाता है, वहाँ हिन्दू #बहु-बेटियां #सुरक्षित नही हैं, #बलात्कार किया जाता है, #अगवा कर दिया जाता है, हिंदुओं की #हत्या कर दी जाती है, #न्यायालय से कोई न्याय नही मिल पाता है तब हिन्दू हिन्दुस्तान की ओर देखते हैं उनको बड़ी आस होती है कि भारत #सरकार हमारी #सहायता करेगी लेकिन उनकी सारी उम्मीदों पर पानी फिर जाता है, उनको सरकार की ओर से कोई #सुविधा उपलब्ध #नही करवाई जाती है और #संदिग्ध नजरों से देखा जाता है
🚩ये कैसा न्याय..???
🚩हिंदुस्तान में हिंदुओं के लिए कब कुछ करेगी हिन्दुत्वादी सरकार..???
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दक्षिण भारत में हो रही हिंदुओं की हत्याओं के पीछे सऊदी अरब हाथ, भेज रहा है अरबों रुपये

अगस्त 3, 2017
🚩केरल, तमिलनाडु आदि में जो भी #हिंदुत्वनिष्ठ नेता #लव जिहाद, #धर्मान्तरण आदि का #विरोध करता है उसको वहाँ से भाग जाने की धमकी मिलती है या उसकी #हत्या करवा दी जाती है ।
🚩केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक आदि में हिंदुओं पर लगातार अत्याचार बढ़ता ही जा रहा है। आए दिन हिंदुओं पर हमले होते हैं जिस वजह से उन्हें पलायन करना पड़ता है। अगर हिन्दू उस हमले का सामना करते हैं तो उनकी हत्या कर दी जाती है।
hand of arabia behind genocide in kerela  in india
🚩केरल में हररोज लगभग किसी न किसी हिंदू की #बर्बरता से #हत्या हो रही है, हर रोज एक हिंदू की मां अपने बेटे के शव पर रोती है।  केवल अकेले केरल में ही पिछले 1 साल में #294 हिंदुओं की #हत्या हुई है ।
🚩दक्षिण भारत में #हिंदुओं को #खत्म करने की #अहम भूमिका निभा रहा है #सउदी अरब
🚩आइये जानते हैं क्या हुए खुलासे…
🚩तुर्की में पकड़े गए पीएफआय के सदस्य #शाहजहां कैंडी ने कई अहम खुलासे किए हैं। जिससे साफ पता चलता है कि, दक्षिण भारत में सक्रीय #पॉपुलर फ्रंट आॅफ इंडिया के सदस्य जिहाद की राह पकड़ चुके हैं। पूछताछ में उसने खुलासा किया कि, दक्षिण भारत में पीएफआय के सैकडों सदस्य #इस्लामिक कट्टरवाद की राह पर हैं और उनके #निशाने पर हिंदुत्वनिष्ठ #आरएसएस, #विहिप और #भाजपा के नेता हैं।
🚩बीते वर्ष 2016 के दिसंबर माह में एनआयए और देहली पुलिस की स्पेशल सेल ने एक साझा ऑपरेशन में केरल और तमिलनाडु से 6 लोगों को गिरफ्तार किया था, तभी आयएस के एक बड़े माड्यूल का खुलासा हुआ था। उस समय पकड़े गए लोगों ने पूछताछ में खुलासा किया था कि, वे सभी #पापुलर फ्रंट ऑफ इंडिया के सक्रीय सदस्य हैं और उनके निशाने पर #विहिंप-भाजपा-#आरएसएस के नेता थे, जिनका गला काटना था और गला काटते हुए वीडियो भी बनाना था। साथ ही पता चला था कि, उनका मकसद विदेशी नागरिकों को बडे पैमाने पर मौत के घाट उतारना था। उस दौरान #शाहजहां कैंडी फरार होने में सफल हो गया था। जो अब टर्की बार्डर पर फर्जी पासपोर्ट के साथ धरा गया है।
🚩सऊदी अरब में बैठा #मनशीद उर्फ #उमर अल हिंदी फेसबुक समेत तमाम #सोशल साइट्स पर अपने बयान जारी करता था और उसके जरिए लगातार केरल और तमिलनाडू के युवाआें को #रेडिकलाइज करता था। शाहजहां केरल और तमिलनाडू में बैठकर अपने नेटवर्क से जुड़े लोगों का उपयोग कर उमर-अल हिंदी की मदद कर रहा था। जबकि केरल में बैठे रमशाद को विहिंप नेता का गला काटने की जिम्मेदारी दी गई थी। प्लान तैयार था और हथियार भी। परंतु साजिश को तभी अंजाम दिया जाना था, जब सउदी अरब से उमर-अल-हिंदी हिंदुस्तान पहुंचता। उमर-अल-हिंदी जैसे ही केरल पहुंचा जांच एजेंसियों ने सभी को धर दबोचा।
🚩2016 में मनशीद उर्फ उमर अल हिंदी की गिरफ्तारी और पूछताछ में खुलासा हुआ कि, वो सउदी अरब काम के सिलसिले में गया था। परंतु वहाबी विचारधारा के लोगों के साथ जुड़ने के बाद उसने #जिहाद की राह पकड़ी । फेसबुक पर मौजूद मनशीद का प्रोफाइल इस बात का जिंदा सबूत है कि, कैसे गल्फ कंट्री में बडे पैमाने पर नेपाली और अफ्रीकन लोगों का #धर्म परिवर्तन कराया जा रहा है।
🚩जांच एजेंसियों की मानें तो धर्म परिवर्तन के बाद सभी को रेडीकलाइज कर जिहाद के लिए उकसाया जा रहा है।
🚩शाहजहां से पूछताछ में जांच एजेंसियों को कई अहम जानकारियां मिली हैं। दरअसल, दक्षिण भारत में फैले पापुलर फ्रंट ऑफ इंडिया को बहरीन समेत कई गल्फ कंट्रीज से अरबों रुपये मिल रहे हैं। जिसका उपयोग केरल समेत पूरे दक्षिण भारत में खून-खराबे के लिए हो रहा है।
 🚩सूत्रों की मानें तो सीरिया जाने के लिए केरल और तमिलनाडु के कई युवाआें को बहरीन से पैसों की मदद भी की गई। कमजोरों और दलितों की लड़ाई लड़नेवाला संगठन अब पूरी तरह से इस्लामिक कट्टरपंथ की राह पकड़ चुका है। जिसका सबूत है केरला में हुई हत्याएं।
🚩#ईसाई मिशनरियाँ और #मुस्लिम देश दिन-रात हिंदुस्तान और पूरी दुनिया से #हिन्दुस्तान को #मिटाने में लगे हैं अतः #हिन्दू सावधान रहें ।
🚩अभी समय है हिन्दू एक होकर हिन्दुओं पर हो रहे प्रहार को रोके तभी हिन्दू बच पायेंगे । #हिन्दू होगा तभी सनातन #संस्कृति #बचेगी ।
🚩अगर #सनातन संस्कृति नही #बचेगी तो दुनिया में इंसानियत ही नही बचेगी क्योंकि #हिन्दू संस्कृति ही ऐसी है जिसने #”वसुधैव कुटुम्बकम्” का वाक्य चरितार्थ करके दिखाया है ।
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